15 जुलाई 2026
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ट्रंप ने खार्ग द्वीप के तेल ठिकानों को बचाया, लेकिन ईरान पर जमीनी हमले से इनकार नहीं

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ट्रंप ने खार्ग द्वीप के तेल ठिकानों को बचाया, लेकिन ईरान पर जमीनी हमले से इनकार नहीं

सारांश

ट्रंप ने माना कि खार्ग द्वीप पर अमेरिकी हमलों में तेल ठिकानों को जानबूझकर बचाया गया — वैश्विक अर्थव्यवस्था की चिंता में। लेकिन जमीनी अभियान और द्वीप पर नियंत्रण की संभावना से इनकार नहीं किया। यह बयान फारस की खाड़ी में तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों के लिए नई अनिश्चितता का संकेत है।

मुख्य बातें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने सेना को खार्ग द्वीप के तेल ठिकानों को निशाना न बनाने का निर्देश दिया था।
ट्रंप के अनुसार अमेरिका ने खार्ग द्वीप पर दो या तीन बार हमले किए, लेकिन तेल प्रतिष्ठान जानबूझकर बचाए गए।
ट्रंप ने दावा किया कि ईरान को अपना सैन्य ढाँचा दोबारा खड़ा करने में लगभग 20 वर्ष लग सकते हैं।
ईरान पर जमीनी सैन्य अभियान और खार्ग द्वीप पर नियंत्रण की संभावना से ट्रंप ने इनकार नहीं किया।
खार्ग द्वीप ईरान के कच्चे तेल निर्यात का प्रमुख केंद्र है; इस पर रुकावट से भारत सहित एशियाई देशों पर असर पड़ सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 15 जुलाई 2026 को स्वीकार किया कि उन्होंने अमेरिकी सेना को ईरान के खार्ग द्वीप पर हमलों के दौरान वहाँ के तेल ठिकानों को निशाना न बनाने का स्पष्ट निर्देश दिया था — क्योंकि उनके अनुसार इन प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुँचने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता था। साथ ही, उन्होंने ईरान के विरुद्ध भविष्य में जमीनी सैन्य अभियान या खार्ग द्वीप पर नियंत्रण हासिल करने की संभावना से साफ़ इनकार भी नहीं किया।

हमले हुए, लेकिन तेल ठिकाने बचाए गए

फॉक्स न्यूज़ को दिए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने खार्ग द्वीप पर दो या तीन बार हमले किए, परंतु इन हमलों के दौरान तेल ठिकानों को जानबूझकर नहीं छुआ गया। उनके अनुसार, यह निर्णय रणनीतिक सोच का हिस्सा था — वे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को अस्थिर नहीं करना चाहते थे। हालाँकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिका चाहे तो भविष्य में इन प्रतिष्ठानों को निशाना बना सकता है।

जमीनी अभियान और द्वीप पर नियंत्रण की संभावना

जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वे खार्ग द्वीप पर नियंत्रण हासिल करने की योजना रखते हैं, तो उन्होंने स्पष्ट उत्तर देने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि यदि ईरान की सैन्य क्षमता को पर्याप्त रूप से कमज़ोर कर दिया जाता है, तो वे ऐसे कदम पर विचार कर सकते हैं। जमीनी सैन्य अभियान की संभावना के बारे में ट्रंप ने कहा कि वे इस विकल्प को सिरे से नहीं नकार रहे — कुछ परिस्थितियों में इसकी आवश्यकता पड़ सकती है, हालाँकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि ऐसे अभियान में किन अन्य बलों की भूमिका होगी।

ईरान की सैन्य क्षमता पर ट्रंप का दावा

ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य अभियान से ईरान के सैन्य ढाँचे को इतना नुकसान पहुँचा है कि यदि अभियान अभी समाप्त भी हो जाए, तो उसे दोबारा खड़ा करने में ईरान को लगभग 20 वर्ष लग सकते हैं। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ बातचीत केवल ताकत के आधार पर संभव है और सैन्य शक्ति ही असली ताकत है। ट्रंप के अनुसार, ईरान के पास अभी भी कुछ सैन्य क्षमता बची है, लेकिन वह काफी सीमित हो चुकी है।

खार्ग द्वीप का रणनीतिक महत्व

खार्ग द्वीप फारस की खाड़ी में ईरान के तट से दूर स्थित है और दशकों से देश के कच्चे तेल निर्यात का प्रमुख केंद्र रहा है। इस द्वीप पर किसी भी प्रकार की रुकावट अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति और कच्चे तेल की कीमतों को सीधे प्रभावित कर सकती है। यह ऐसे समय में अहम है जब भारत सहित प्रमुख एशियाई आयातक देश ईरानी और खाड़ी क्षेत्र के तेल पर निर्भर हैं।

आगे क्या होगा

ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी हमले तब तक जारी रह सकते हैं, जब तक वे स्वयं उन्हें रोकने का निर्णय नहीं लेते। यह बयान वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों और कूटनीतिक हलकों में अनिश्चितता बढ़ाने वाला है। विशेषज्ञों के अनुसार, खार्ग द्वीप पर किसी भी संभावित जमीनी कार्रवाई के दूरगामी भू-राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन जमीनी अभियान का विकल्प खुला रखकर ईरान पर दबाव बनाए रखा है। गौरतलब है कि खार्ग द्वीप पर नियंत्रण की संभावना — भले ही अभी काल्पनिक हो — फारस की खाड़ी की भू-राजनीति को मौलिक रूप से बदल सकती है और भारत जैसे प्रमुख तेल आयातकों के लिए ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। '20 वर्ष' की पुनर्निर्माण समयसीमा का दावा सत्यापन योग्य नहीं है और इसे ट्रंप के अपने आकलन के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ट्रंप ने खार्ग द्वीप के तेल ठिकानों को निशाना क्यों नहीं बनाया?
ट्रंप के अनुसार, उन्होंने अमेरिकी सेना को तेल ठिकानों को नुकसान न पहुँचाने का निर्देश दिया क्योंकि ये वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। उनका मानना है कि इन प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुँचने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति और कीमतें बुरी तरह प्रभावित हो सकती थीं।
खार्ग द्वीप पर अमेरिका ने कितने हमले किए?
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका ने खार्ग द्वीप पर दो या तीन बार हमले किए। हालाँकि इन हमलों के दौरान तेल ठिकानों को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया गया।
क्या अमेरिका ईरान पर जमीनी सैन्य अभियान चला सकता है?
ट्रंप ने जमीनी सैन्य अभियान की संभावना से इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि कुछ परिस्थितियों में इसकी आवश्यकता पड़ सकती है, हालाँकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि ऐसे अभियान में किन अन्य बलों की भूमिका होगी।
खार्ग द्वीप इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
खार्ग द्वीप फारस की खाड़ी में स्थित ईरान के कच्चे तेल निर्यात का प्रमुख केंद्र है। इस द्वीप पर किसी भी रुकावट से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं, जिसका सीधा असर भारत सहित प्रमुख एशियाई आयातक देशों पर पड़ सकता है।
ट्रंप के अनुसार ईरान की सैन्य स्थिति क्या है?
ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी अभियान से ईरान के सैन्य ढाँचे को इतना नुकसान पहुँचा है कि उसे दोबारा खड़ा करने में लगभग 20 वर्ष लग सकते हैं। उनके अनुसार ईरान के पास अभी भी कुछ सैन्य क्षमता बची है, लेकिन वह काफी सीमित हो चुकी है।
राष्ट्र प्रेस
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