नासा अंतरिक्ष यात्री डॉ. अनिल मेनन आज रात ISS के लिए रवाना, पलक्कड़ का नाम पहुँचा अंतरिक्ष तक
सारांश
मुख्य बातें
नासा के अंतरिक्ष यात्री डॉ. अनिल मेनन 15 जुलाई 2025 की रात 8:17 बजे IST पर कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से सोयूज एमएस-29 अंतरिक्ष यान के ज़रिए अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए उड़ान भरेंगे। यह आठ महीने का मिशन अगले साल अप्रैल 2026 में चालक दल की पृथ्वी पर वापसी के साथ पूरा होगा। केरल के पलक्कड़ जिले के ओट्टापालम से पारिवारिक जड़ें रखने वाले डॉ. मेनन की यह उड़ान जिले के लिए एक ऐतिहासिक गर्व का क्षण है।
मिशन का विवरण
डॉ. अनिल मेनन इस अभियान में रूसी कॉस्मोनॉट्स प्योत्र दुब्रोव और अन्ना किकिना के साथ यात्रा करेंगे। तीनों अंतरिक्ष यात्री ISS पर कई वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम देंगे। यह मिशन विशेष रूप से दीर्घकालिक मानव अंतरिक्ष अभियानों के दौरान उत्पन्न होने वाली चिकित्सकीय चुनौतियों पर केंद्रित शोध के लिए महत्त्वपूर्ण है।
डॉ. मेनन के शोध से प्राप्त जानकारियाँ पृथ्वी की निचली कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट) से आगे — चंद्रमा और मंगल जैसे भविष्य के गहरे अंतरिक्ष अभियानों — की योजना बनाने में अहम भूमिका निभाएंगी।
डॉ. अनिल मेनन: बहुआयामी व्यक्तित्व
डॉ. मेनन ओट्टापालम के शंकरन मेनन और यूक्रेन की एलिजाबेथ समोयलेंको के पुत्र हैं। अंतरिक्ष यात्री बनने से पहले उन्होंने चिकित्सक, मैकेनिकल इंजीनियर, अमेरिकी अंतरिक्ष बल के फ्लाइट सर्जन और पायलट के रूप में अपनी पहचान बनाई। इसके बाद उन्होंने नासा के अंतरिक्ष यात्री दल में स्थान प्राप्त किया।
प्रक्षेपण से कुछ घंटे पूर्व डॉ. मेनन ने इंस्टाग्राम पर अपना उत्साह साझा करते हुए नासा, परिवार और मित्रों के निरंतर सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
पलक्कड़ की गौरवशाली विरासत
पलक्कड़ जिले ने भारत और विश्व को अनेक प्रतिष्ठित हस्तियाँ दी हैं। दिग्गज अभिनेता और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम.जी. रामचंद्रन, राजनयिक, लेखक और सांसद शशि थरूर (जिनके परिवार की जड़ें पलक्कड़ से जुड़ी हैं) तथा कथकली के महान कलाकार और केरल कलामंडलम के पूर्व प्राचार्य कलामंडलम रामनकुट्टी नायर इस जिले की विरासत के प्रमुख स्तंभ हैं।
इसरो के गगनयान कार्यक्रम के अंतरिक्ष यात्री और भारतीय वायु सेना के एयर कमोडोर प्रशांत बालकृष्णन नायर भी पलक्कड़ जिले से ही हैं — जो इस जिले के अंतरिक्ष से गहरे नाते को और पुख्ता करता है।
वैज्ञानिक महत्त्व और आगे की राह
यह अभियान केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं है — यह भारतीय मूल के वैज्ञानिकों की उस बढ़ती भूमिका का प्रतीक है जो वैश्विक अंतरिक्ष अन्वेषण में निर्णायक होती जा रही है। गौरतलब है कि यह डॉ. मेनन की पहली अंतरिक्ष यात्रा है, और आठ महीने के इस दीर्घकालिक मिशन से प्राप्त चिकित्सीय डेटा नासा की भविष्य की गहरे अंतरिक्ष नीति को सीधे प्रभावित करेगा।