राबड़ी देवी को 15 दिन में खाली करना होगा 10 सर्कुलर रोड बंगला, पटना प्रशासन ने दी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
पटना जिला प्रशासन ने 30 मई 2026 को राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता और बिहार विधानसभा में विपक्ष की नेता राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगला खाली करने के लिए 15 दिन का अल्टीमेटम दिया है। प्रशासन ने उन्हें नव-आवंटित आवास संख्या 39, हार्डिंग रोड में स्थानांतरित होने का अनुरोध किया है और समय-सीमा पार होने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। यह विवाद सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) और विपक्षी RJD के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप का रूप ले चुका है।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह मामला तब उठा जब राज्य सरकार द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बावजूद राबड़ी देवी ने कथित तौर पर 10 सर्कुलर रोड का बंगला खाली करने से इनकार कर दिया। गौरतलब है कि राबड़ी देवी बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री हैं और वर्तमान में विधानसभा में विपक्ष की नेता के पद पर हैं। प्रशासन के अनुसार, उनके लिए वैकल्पिक सरकारी आवास पहले ही आवंटित किया जा चुका है।
भाजपा की प्रतिक्रिया
बिहार भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, "बिहार में कानून का राज है और कोई भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी छोटा या बड़ा हो, स्थापित कानूनों और नियमों से ऊपर नहीं हो सकता।"
सरावगी ने आगे कहा, "सरकारी आवास सार्वजनिक संपत्ति हैं जिनका रखरखाव करदाताओं के पैसे से होता है और इनका आवंटन सरकारी नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार ही किया जाता है।" उन्होंने तर्क दिया कि सरकारी आदेशों की अवहेलना लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मानदंडों को कमज़ोर करती है।
सरावगी ने यह भी आरोप लगाया कि लालू प्रसाद यादव परिवार की राजनीति लंबे समय से इस धारणा से प्रेरित रही है कि राजनीतिक सत्ता और सरकारी संसाधन सार्वजनिक धरोहर नहीं बल्कि व्यक्तिगत अधिकार हैं। उन्होंने राजनीतिक प्रश्न उठाते हुए पूछा कि क्या यह आवास केवल कुछ चुनिंदा लोगों का विशेषाधिकार बना रहना चाहिए, जबकि इसे दलित समुदाय के एक सदस्य को आवंटित किया गया है।
RJD का पलटवार
विपक्ष ने सरकार के इस रुख को सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया। RJD प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने बेदखली नोटिस को लेकर NDA सरकार पर लोकतांत्रिक मर्यादा और राजनीतिक शिष्टाचार के उल्लंघन का आरोप लगाया। गगन के अनुसार, यह कदम राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से उठाया गया है।
आगे क्या होगा
प्रशासन द्वारा दी गई 15 दिन की समय-सीमा समाप्त होने पर कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुलेगा। यह विवाद 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले NDA और RJD के बीच राजनीतिक तनाव को और गहरा कर सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों दल आगामी चुनावी मौसम की तैयारी में जुटे हैं।