राबड़ी देवी का 10 सर्कुलर रोड बंगला खाली करने से इनकार, उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी बोले — 'नियम सभी पर समान लागू'
सारांश
मुख्य बातें
बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता राबड़ी देवी ने पटना स्थित 10 सर्कुलर रोड सरकारी बंगला खाली करने से साफ इनकार कर दिया है — यह रुख भवन निर्माण विभाग के आधिकारिक नोटिस के बावजूद बरकरार है। इस विवाद पर बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने 30 मई को पत्रकारों से कहा कि सरकारी नियमों का पालन हर नागरिक की जिम्मेदारी है, चाहे उसकी राजनीतिक हैसियत कुछ भी हो।
मुख्य घटनाक्रम
बिहार सरकार के भवन निर्माण विभाग ने 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी बंगले का आवंटन राज्य सरकार में मंत्री नंद किशोर राम के नाम कर दिया है। विभाग ने बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष के रूप में राबड़ी देवी को औपचारिक नोटिस जारी कर आवास खाली करने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही बंगले पर नए वीवीआईपी नेमप्लेट लगाने की तैयारी भी शुरू हो गई है, जो औपचारिक हस्तांतरण का संकेत देती है।
विजय चौधरी की प्रतिक्रिया
उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी ने पटना में पत्रकारों के सवालों के जवाब में कहा, 'सरकारी प्रक्रियाओं में, कौन क्या कहता है, यह कम मायने रखता है। जो बात मायने रखती है, वह है आधिकारिक नियमों का पालन करना। भले ही कितनी भी संख्या में बल तैनात किया जाए, यह संख्या की बात नहीं है, बल्कि यह सरकारी नियमों का पालन करने की बात है।' उनका यह बयान राबड़ी देवी के उस सार्वजनिक रुख के सीधे जवाब में आया, जिसमें उन्होंने आवास न छोड़ने की घोषणा की थी।
राबड़ी देवी की चुनौती
पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को सीधे चुनौती देते हुए कहा, 'सरकार चाहे तो पुलिस बल का प्रयोग कर सकती है। वे अभी-अभी मुख्यमंत्री बने हैं। वे फोर्स बुलाकर आवास खाली करवाएं। हम आवास खाली नहीं करेंगे।' यह बयान राजनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें राज्य की कार्यपालिका को खुली चुनौती दी गई है।
विवाद की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि राबड़ी देवी लंबे समय से 10 सर्कुलर रोड बंगले में निवास कर रही हैं। यह बंगला अब सरकार द्वारा मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित किया जा चुका है। यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष के बीच पहले से ही राजनीतिक तनाव बना हुआ है। सरकारी आवास के उपयोग और आवंटन को लेकर यह पहला विवाद नहीं है — राज्य में इससे पहले भी कई नेताओं के आवास-संबंधी विवाद सामने आ चुके हैं।
आगे क्या
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार बल प्रयोग का विकल्प अपनाएगी या कानूनी रास्ता। भवन निर्माण विभाग की ओर से अगला कदम क्या होगा, इस पर सभी की नज़रें टिकी हैं। नई नेमप्लेट लगाने की तैयारी से संकेत मिलता है कि प्रशासन औपचारिक हस्तांतरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है।