राबड़ी देवी का सरकारी बंगला विवाद: बेटी रोहिणी आचार्या ने सम्राट चौधरी सरकार को बताया 'प्रतिशोध मॉडल'
सारांश
मुख्य बातें
बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड, पटना स्थित सरकारी आवास खाली करने के नोटिस के बाद राजनीतिक विवाद गहरा गया है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्या ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सरकार को खुली चुनौती देते हुए इस कार्रवाई को 'प्रतिशोध मॉडल' करार दिया। पटना जिला प्रशासन ने राबड़ी देवी को नव-आवंटित आवास 39, हार्डिंग रोड में स्थानांतरित होने के लिए 15 दिन का समय दिया है, जिसके बाद कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
मुख्य घटनाक्रम
राज्य सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को 10 सर्कुलर रोड खाली करने का नोटिस जारी किया और उन्हें वैकल्पिक आवास के रूप में 39, हार्डिंग रोड का बंगला आवंटित किया। कथित तौर पर नोटिस मिलने के बावजूद राबड़ी देवी ने मौजूदा बंगला खाली करने से इनकार कर दिया। इसके बाद पटना जिला प्रशासन ने उनसे नव-आवंटित आवास में शिफ्ट होने का अनुरोध किया और 15 दिन की समयसीमा तय की।
रोहिणी आचार्या की चुनौती
पिछले लोकसभा चुनाव में सारण सीट से राजद की टिकट पर चुनाव लड़ चुकीं रोहिणी आचार्या ने एक्स पर लिखा, 'अगर हिम्मत है तो जबरन बंगला खाली करवाए सरकार।' उन्होंने आगे लिखा कि जनहित के ज्वलंत मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए सम्राट चौधरी की सरकार राजनीतिक प्रतिशोध की राह पर है।
रोहिणी आचार्या ने अपनी पोस्ट में आरोप लगाया कि 'पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को आवास से बेदखल करने का तुगलकी फरमान और आवास पर पुलिस भेजना लोकतंत्र नहीं, सत्ता के अहंकार एवं बेजा दबंगई की निशानी है।' उन्होंने यह भी कहा कि बेरोज़गारी, महंगाई, भ्रष्टाचार और बढ़ते अपराध जैसे मुद्दों पर निष्क्रिय सरकार विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने में सक्रिय है।
राजद की प्रतिक्रिया
राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल ने भी सरकार के इस आदेश का प्रतिकार करने की बात कही है। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब बिहार में सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्षी राजद के बीच राजनीतिक तनाव पहले से ही बना हुआ है।
सरकार का पक्ष
सरकार की ओर से कहा गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री को नियमों के अनुसार वैकल्पिक आवास आवंटित किया गया है और उन्हें नव-आवंटित बंगले में शिफ्ट होना चाहिए। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि समयसीमा समाप्त होने पर कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
आगे क्या होगा
पटना जिला प्रशासन द्वारा दी गई 15 दिन की समयसीमा के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। यदि राबड़ी देवी बंगला खाली नहीं करतीं, तो प्रशासन कानूनी कार्रवाई की ओर बढ़ सकता है। यह मामला बिहार की राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ते टकराव का नया अध्याय बन सकता है।