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राबड़ी देवी आवास विवाद: प्रभुनाथ यादव बोले — 39 नंबर बंगला भूतहा है, वहाँ नहीं जाएंगे

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राबड़ी देवी आवास विवाद: प्रभुनाथ यादव बोले — 39 नंबर बंगला भूतहा है, वहाँ नहीं जाएंगे

सारांश

राबड़ी देवी को सरकारी आवास खाली करने का आदेश मिला, तो परिवार ने 39 नंबर के वैकल्पिक बंगले को 'भूतहा' कहकर ठुकरा दिया। प्रभुनाथ यादव ने सरकार पर चुनिंदा कार्रवाई का आरोप लगाया और कहा — किराये पर जाएंगे, पर 39 नंबर नहीं।

मुख्य बातें

राबड़ी देवी को पटना स्थित सरकारी आवास खाली करने का आदेश मिला है।
परिवार ने कुछ सामान तेजस्वी यादव के निवास 1 पोलो रोड पर भेजा, लेकिन आवास अभी पूरी तरह खाली नहीं किया गया।
भाई प्रभुनाथ सिंह यादव ने कहा — वैकल्पिक 39 नंबर बंगला 'भूतहा' है, वहाँ नहीं जाएंगे।
परिवार ने संकेत दिया कि ज़रूरत पड़ी तो किराये के मकान में जाएंगे।
प्रभुनाथ यादव ने जीतन राम मांझी , नीतीश कुमार , शहनवाज हुसैन समेत अन्य नेताओं के बंगलों की भी समीक्षा की माँग की।

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को सरकारी आवास खाली करने का आदेश मिलने के बाद पटना में राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। 18 जून को मिली जानकारी के अनुसार, राबड़ी देवी के सरकारी बंगले से कुछ सामान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के सरकारी निवास 1 पोलो रोड पर भेजा गया है। हालाँकि, परिवार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह आवास पूरी तरह अभी खाली नहीं किया जा रहा — केवल कुछ सामान स्थानांतरित किया गया है।

प्रभुनाथ यादव का बयान

राबड़ी देवी के बड़े भाई प्रभुनाथ सिंह यादव ने गुरुवार को कहा कि आवास खाली करने की प्रक्रिया अभी औपचारिक रूप से शुरू नहीं हुई है। उन्होंने कहा, 'घर अभी खाली नहीं किया जा रहा है। सिर्फ छोटा-मोटा सामान ही दूसरी जगह ले जाया जा रहा है। इसे कभी न कभी तो खाली करना ही होगा — जब खाली करने का आदेश है तो खाली तो करना ही होगा।'

उन्होंने यह भी बताया कि परिवार की इच्छा थी कि जब तक सदस्यता बनी रहे, तब तक आवास में रहने की अनुमति मिले, लेकिन सरकार ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया।

सरकार के फैसले पर सवाल

प्रभुनाथ यादव ने सरकार के इस कदम को एकतरफा बताते हुए कहा कि यदि आवास खाली कराने की नीति लागू करनी थी, तो अन्य नेताओं के बंगलों की भी समीक्षा होनी चाहिए थी। उन्होंने नाम लेते हुए कहा, 'अगर खाली ही कराना था तो जीतन राम मांझी का खाली कराते, नीतीश कुमार का खाली कराते, संजय झा हैं, देवेश चंद्र ठाकुर हैं, शहनवाज हुसैन हैं।' उनका इशारा था कि यह कार्रवाई चुनिंदा तरीके से की जा रही है।

39 नंबर बंगले पर प्रभुनाथ की आपत्ति

परिवार को वैकल्पिक आवास के रूप में 39 नंबर बंगला आवंटित किए जाने की चर्चा है, लेकिन प्रभुनाथ यादव ने साफ कहा कि वहाँ जाने का कोई इरादा नहीं है। उनके अनुसार, '39 नंबर बंगला भूतहा है, वहाँ कभी भी नहीं जाएंगे।' उन्होंने कहा कि जब मौजूदा बंगला खाली करना होगा, तो परिवार आसपास ही किसी किराये के मकान में चला जाएगा।

आगे क्या होगा

यह विवाद बिहार की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है, क्योंकि राष्ट्रीय जनता दल (RJD) इसे सत्तारूढ़ गठबंधन की राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई के रूप में पेश कर रही है। गौरतलब है कि राबड़ी देवी दशकों से इस सरकारी आवास में रह रही हैं और यह मामला अब न्यायिक या प्रशासनिक समीक्षा की दिशा में जा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

नीतीश, शहनवाज — वे सब सत्तारूढ़ गठबंधन के हैं, और यह सवाल वैध है कि क्या यह नीति सबके लिए समान रूप से लागू होती है। दूसरी ओर, 39 नंबर बंगले को 'भूतहा' कहना एक राजनीतिक संदेश भी है — परिवार सरकारी शर्तों पर नहीं, अपनी शर्तों पर जाएगा। असली परीक्षा यह है कि क्या सरकार इस मामले में कानूनी रास्ता अपनाती है या राजनीतिक समझौता।
RashtraPress
5 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राबड़ी देवी को सरकारी आवास खाली करने का आदेश क्यों दिया गया?
बिहार सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को उनका सरकारी आवास खाली करने का निर्देश दिया है। परिवार का कहना है कि उनकी इच्छा थी कि जब तक सदस्यता बनी रहे, तब तक आवास में रहने की अनुमति दी जाए, लेकिन सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया।
39 नंबर बंगले को लेकर परिवार की क्या आपत्ति है?
प्रभुनाथ सिंह यादव ने कहा कि 39 नंबर बंगला 'भूतहा' है और परिवार वहाँ जाने का कोई इरादा नहीं रखता। उन्होंने कहा कि ज़रूरत पड़ी तो वे आसपास किराये के मकान में चले जाएंगे।
क्या राबड़ी देवी का आवास अभी खाली हो गया है?
नहीं। प्रभुनाथ यादव के अनुसार, अभी केवल छोटा-मोटा सामान तेजस्वी यादव के 1 पोलो रोड निवास पर भेजा गया है। आवास खाली करने की औपचारिक प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है।
प्रभुनाथ यादव ने किन नेताओं के बंगलों की समीक्षा की माँग की?
प्रभुनाथ यादव ने जीतन राम मांझी, नीतीश कुमार, संजय झा, देवेश चंद्र ठाकुर और शहनवाज हुसैन के आवासों की भी समीक्षा की माँग की। उनका कहना है कि यदि नीति समान रूप से लागू होनी थी, तो इन सभी के बंगलों की भी जाँच होनी चाहिए थी।
इस विवाद का बिहार की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है?
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) इस मामले को सत्तारूढ़ गठबंधन की चुनिंदा और राजनीति-प्रेरित कार्रवाई के रूप में पेश कर रही है। यह विवाद आगामी राजनीतिक बहस का केंद्र बन सकता है, खासकर तब जब परिवार न्यायिक या प्रशासनिक राहत की ओर रुख करे।
राष्ट्र प्रेस
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