सीमांचल में बुनियादी सुविधाओं की कमी पर अख्तरुल ईमान का BJP पर हमला, बोले — 'सत्ता के नशे में काम कर रही है पार्टी'
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के बिहार प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अख्तरुल ईमान ने रविवार, 31 मई को कटिहार में भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर कड़े आरोप लगाए। उनका कहना है कि सीमांचल क्षेत्र आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है और BJP 'सबका साथ, सबका विकास' के अपने ही नारे के विपरीत आचरण कर रही है।
सीमांचल में विकास की जमीनी हकीकत
ईमान के अनुसार, सीमांचल के कई इलाकों में अब भी 100 प्रतिशत परिवारों तक मोबाइल कनेक्टिविटी नहीं पहुँची है। उन्होंने बताया कि अनेक गाँवों में बिजली की व्यवस्था नहीं है और रसोई गैस कनेक्शन भी सभी घरों तक नहीं पहुँचे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बुनियादी ज़रूरतें ही अधूरी हैं, तो विकास के बड़े दावों का आधार क्या है।
सर्वेक्षण में गड़बड़ी के आरोप
ईमान ने यह भी आरोप लगाया कि सीमांचल के विकास से संबंधित सरकारी सर्वेक्षणों में अनियमितताएँ हुई हैं। उनके अनुसार, कुछ अधिकारियों और पर्यवेक्षकों ने दबाव में आकर गलत आँकड़े तैयार किए। उन्होंने दावा किया कि कई लोगों ने स्वयं यह स्वीकार किया है कि ऊपर से आदेश मिलने पर झूठी रिपोर्टें बनाई गईं, जिससे पूरे क्षेत्र के विकास और भविष्य को दीर्घकालिक नुकसान हो सकता है।
BJP पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप
अख्तरुल ईमान ने कहा कि BJP 'सत्ता के नशे' में काम कर रही है। उन्होंने पश्चिम बंगाल में विपक्षी नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्रियों के साथ हो रहे व्यवहार को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया। आलोचकों का कहना है कि यह केंद्र और राज्य स्तर पर सत्ताधारी दल के बढ़ते दबदबे का संकेत है।
शेरशाहबादी समुदाय को 'बाहरी' बताने पर विरोध
ईमान ने शेरशाहबादी समुदाय को बाहरी बताए जाने पर कड़ा ऐतराज जताया। उनके अनुसार, यह समुदाय सीमांचल की सामाजिक और आर्थिक संरचना का अभिन्न हिस्सा है और कृषि तथा व्यापार में इसका उल्लेखनीय योगदान रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी समुदाय को निशाना बनाने से सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है और इसका असर अन्य समुदायों पर भी पड़ेगा।
भाईचारे की अपील
विधायक ने सभी समुदायों से एकजुट रहने और आपसी भाईचारे को मजबूत करने की अपील की। गौरतलब है कि सीमांचल — जिसमें कटिहार, पूर्णिया, अररिया और किशनगंज ज़िले शामिल हैं — बिहार का वह क्षेत्र है जो विकास सूचकांकों में लगातार पिछड़ा रहा है। ईमान की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब बिहार में 2025 के विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ राजनीतिक दलों के बीच तेज हो रही हैं।