14 जुलाई 2026
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ईवीएम पर BJP थी सबसे बड़ी आलोचक, चंद्रबाबू के वीवीपैट सुझाव ने बदली तस्वीर: पूर्व सीईसी कुरैशी

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ईवीएम पर BJP थी सबसे बड़ी आलोचक, चंद्रबाबू के वीवीपैट सुझाव ने बदली तस्वीर: पूर्व सीईसी कुरैशी

सारांश

जो पार्टी आज ईवीएम की सबसे बड़ी समर्थक है, वही कभी उसकी सबसे मुखर आलोचक थी — यह याद दिलाया पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त कुरैशी ने। और जिस VVPAT ने ईवीएम में भरोसा लौटाया, वह सुझाव आया था तकनीक-समर्थक नेता चंद्रबाबू नायडू से — विपक्षी प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई करते हुए।

मुख्य बातें

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई.
कुरैशी ने 14 जुलाई 2026 को कहा कि BJP कभी ईवीएम की सबसे बड़ी आलोचक थी।
नरसिम्हा राव ने 'डेमोक्रेसी एट रिस्क' पुस्तक लिखी थी, जिसकी भूमिका लालकृष्ण आडवाणी ने लिखी थी।
चंद्रबाबू नायडू ने VVPAT लागू करने का सुझाव दिया था ताकि मतदाता अपने वोट की पुष्टि स्वयं कर सके।
VVPAT सत्यापन में लाखों पर्चियों का ईवीएम के आंकड़ों से मिलान हुआ और सभी रिकॉर्ड पूरी तरह मेल खाए।
कुरैशी ने कहा कि VVPAT पर्चियों की गिनती की संख्या पर जारी बहस का समाधान संवाद से निकाला जा सकता है।

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने 14 जुलाई 2026 को एक विशेष बातचीत में खुलासा किया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) कभी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की सबसे मुखर आलोचक थी और उसने कई मौकों पर इस तकनीक की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए थे। उन्होंने यह भी बताया कि तेलुगु देशम पार्टी (TDP) प्रमुख एन. चंद्रबाबू नायडू ने ही वोटर वेरीफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल (VVPAT) लागू करने का सुझाव दिया था, जिसने ईवीएम प्रणाली में जनता का भरोसा फिर से कायम करने में निर्णायक भूमिका निभाई।

BJP और 'डेमोक्रेसी एट रिस्क' की पुस्तक

कुरैशी ने बताया कि जब उन्होंने वर्ष 2010 में मुख्य चुनाव आयुक्त का पद संभाला, उस समय ईवीएम को लेकर विवाद अपने चरम पर था। उन्होंने कहा, 'उस दौर में BJP ईवीएम की सबसे बड़ी आलोचक थी। जी.वी.एल. नरसिम्हा राव ने 'डेमोक्रेसी एट रिस्क' नामक पुस्तक लिखी थी, जिसकी भूमिका लालकृष्ण आडवाणी ने लिखी थी। इसमें ईवीएम की विश्वसनीयता और भरोसेमंद होने पर सवाल उठाए गए थे।' यह ऐसे समय में आया है जब आज उन्हीं दलों की ईवीएम को लेकर स्थिति बदल चुकी है।

चंद्रबाबू नायडू की अगुवाई में विपक्षी प्रतिनिधिमंडल

कुरैशी ने बताया कि पद संभालने के तुरंत बाद उन्होंने सभी विपक्षी दलों की बैठक बुलाई। उस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व चंद्रबाबू नायडू कर रहे थे, जिसे देखकर उन्हें आश्चर्य हुआ — क्योंकि नायडू को तकनीक-समर्थक नेता माना जाता रहा है। कुरैशी ने कहा, 'मैंने उनसे कहा — चंद्रबाबू जी, आपकी क्या शिकायत है, बताइए। मेरी चुनौती है कि दिन के अंत तक या तो आप मुझे मना लेंगे या मैं आपको ईवीएम का ब्रांड एंबेसडर बना दूंगा।'

VVPAT का सुझाव और पारदर्शिता की माँग

कुरैशी के अनुसार, नायडू ने स्पष्ट किया कि उनका आरोप ईवीएम में छेड़छाड़ का नहीं था, बल्कि उनकी चिंता मतदान प्रक्रिया में प्रत्यक्ष पारदर्शिता की कमी को लेकर थी। नायडू के हवाले से कुरैशी ने बताया: 'हम सिर्फ यह कह रहे हैं कि इसमें पारदर्शिता नहीं है। जब आप बटन दबाते हैं, तो वोट मशीन के भीतर चला जाता है, लेकिन यह दिखाई नहीं देता कि वह सही उम्मीदवार के खाते में गया या नहीं।' इसके समाधान के रूप में नायडू ने VVPAT लागू करने का प्रस्ताव रखा।

कुरैशी ने VVPAT की कार्यप्रणाली का उल्लेख करते हुए नायडू के सुझाव को इस प्रकार बताया: 'VVPAT में मशीन के साथ एक प्रिंटर जुड़ा होगा। बटन दबाने पर स्क्रीन पर चुने गए उम्मीदवार का नाम या चुनाव चिह्न दिखाई देगा, जिससे मतदाता पुष्टि कर सकेगा कि उसका वोट सही उम्मीदवार को गया है। इसके बाद एक पर्ची अपने आप कटकर सीलबंद बॉक्स में चली जाएगी और बाद में मशीन के आंकड़ों का इन पर्चियों से मिलान किया जा सकेगा।'

VVPAT से मजबूत हुई चुनावी विश्वसनीयता

कुरैशी ने बताया कि VVPAT लागू होने के बाद सत्यापन के दौरान लाखों पर्चियों का ईवीएम में दर्ज वोटों से मिलान किया गया और सभी के रिकॉर्ड पूरी तरह मेल खाते पाए गए। उन्होंने कहा, 'VVPAT की मदद से हम ईवीएम की विश्वसनीयता को फिर से स्थापित करने में सफल रहे।' गौरतलब है कि यह वही तकनीक है जिसे एक तकनीक-विरोधी प्रतिनिधिमंडल ने सुझाया था।

VVPAT पर्चियों की गिनती को लेकर जारी बहस

मौजूदा विवाद पर कुरैशी ने कहा कि कितनी VVPAT पर्चियों की गिनती होनी चाहिए, यह एक तकनीकी और प्रक्रियात्मक विषय है। उनका मानना है कि यदि कई राजनीतिक दल इस पर सवाल उठा रहे हैं, तो उनकी बात सुनी जानी चाहिए। उन्होंने कहा, 'जैसे पहले बातचीत के जरिए समाधान निकाला गया था, वैसे ही अब भी संवाद से रास्ता निकलेगा।' आने वाले चुनावों में यह बहस और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल बना रहता है कि आज की VVPAT पर्ची गिनती की बहस में वही संवाद की इच्छाशक्ति दिखती है या नहीं।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पूर्व सीईसी एस.वाई. कुरैशी ने BJP और ईवीएम को लेकर क्या कहा?
कुरैशी ने कहा कि BJP वर्ष 2010 से पहले ईवीएम की सबसे बड़ी आलोचक थी और उसने 'डेमोक्रेसी एट रिस्क' नामक पुस्तक भी प्रकाशित की थी, जिसमें ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए थे। इस पुस्तक की भूमिका लालकृष्ण आडवाणी ने लिखी थी।
VVPAT का सुझाव सबसे पहले किसने दिया था?
कुरैशी के अनुसार, TDP प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने VVPAT लागू करने का सुझाव दिया था। नायडू उस विपक्षी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे थे जो 2010 में ईवीएम पर पारदर्शिता की माँग लेकर चुनाव आयोग के पास आया था।
VVPAT क्या है और यह कैसे काम करता है?
VVPAT एक प्रिंटर युक्त प्रणाली है जो ईवीएम से जुड़ी होती है। बटन दबाने पर स्क्रीन पर चुने गए उम्मीदवार का नाम या चुनाव चिह्न दिखता है, फिर एक पर्ची सीलबंद बॉक्स में चली जाती है जिसका बाद में मशीन के आंकड़ों से मिलान किया जा सकता है।
VVPAT से ईवीएम पर भरोसा कैसे बढ़ा?
VVPAT लागू होने के बाद सत्यापन में लाखों पर्चियों का ईवीएम में दर्ज वोटों से मिलान किया गया और सभी रिकॉर्ड पूरी तरह मेल खाते पाए गए। कुरैशी ने कहा कि इससे ईवीएम की विश्वसनीयता फिर से स्थापित करने में सफलता मिली।
VVPAT पर्चियों की गिनती को लेकर अभी क्या विवाद है?
कई राजनीतिक दल माँग कर रहे हैं कि अधिक संख्या में VVPAT पर्चियों की गिनती हो। कुरैशी ने कहा कि यह एक प्रक्रियागत विषय है और यदि कई दल सवाल उठा रहे हैं तो उनकी बात सुनी जानी चाहिए — जैसे पहले संवाद से समाधान निकला था, वैसे ही अब भी निकल सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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