त्रिपुरा चुनाव से पहले ईवीएम पर लेफ्ट फ्रंट के आरोप, पारदर्शिता पर उठे सवाल

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त्रिपुरा चुनाव से पहले ईवीएम पर लेफ्ट फ्रंट के आरोप, पारदर्शिता पर उठे सवाल

सारांश

त्रिपुरा में आगामी चुनावों से पहले ईवीएम के उपयोग को लेकर लेफ्ट फ्रंट ने गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि चुनाव आयोग वीवीपैट युक्त मशीनों का इस्तेमाल नहीं कर रहा है, जिससे मतदान की पारदर्शिता पर प्रश्न उठ रहे हैं।

मुख्य बातें

त्रिपुरा चुनावों में ईवीएम के मुद्दे पर विवाद गहराया।
लेफ्ट फ्रंट ने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए।
वीवीपैट की अनुपस्थिति से मतदान की पारदर्शिता पर सवाल।
धर्मनगर उपचुनाव 9 अप्रैल को होगा।
टीटीएएडीसी चुनाव में 173 उम्मीदवार भाग ले रहे हैं।

अगरतला, 3 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। त्रिपुरा में आगामी चुनावों से पहले इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को लेकर एक नया विवाद उभर आया है। माकपा के नेतृत्व वाले लेफ्ट फ्रंट ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग वीवीपैट (वोटर वेरिफाईबल पेपर ऑडिट ट्रेल) यूनिट के बिना ईवीएम का उपयोग कर रहा है, जबकि राज्य में पर्याप्त मशीनें उपलब्ध हैं।

लेफ्ट नेताओं का कहना है कि ये ईवीएम मध्य प्रदेश से लाई गई हैं और इनमें वीवीपैट की सुविधा नहीं है, जिससे मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।

त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (टीटीएएडीसी) के 30 सदस्यीय परिषद के लिए 12 अप्रैल को मतदान होना है, जबकि उत्तर त्रिपुरा के धर्मनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव 9 अप्रैल को कराया जाएगा।

लेफ्ट फ्रंट के संयोजक और पूर्व मंत्री माणिक डे ने बताया कि हाल ही में हुई सर्वदलीय बैठक में लेफ्ट, कांग्रेस और अन्य दलों ने वीवीपैट युक्त ईवीएम के इस्तेमाल की मांग की थी, लेकिन राज्य चुनाव आयुक्त मनोज कुमार ने इसे खारिज कर दिया।

माणिक डे ने राज्य चुनाव आयोग पर “राजनीतिक दृष्टिकोण” से काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि आयोग ने चुनावों में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों (सीएपीएफ) की तैनाती की मांग को भी ठुकरा दिया है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य के जनजातीय कल्याण मंत्री बिकाश देबबर्मा ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा कि मतदाता चाहे किसी भी बटन को दबाए, वोट बीजेपी के पक्ष में जाएगा। इस बयान के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

लेफ्ट नेताओं ने वेबकास्टिंग की मांग ठुकराने पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि आयोग द्वारा “फंड की कमी” का हवाला देना पारदर्शिता के सिद्धांतों के खिलाफ है।

इसके अलावा, लेफ्ट फ्रंट ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान खुलेआम पैसे और मुफ्त चीजें बांटी जा रही हैं, लेकिन आयोग इस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।

धर्मनगर उपचुनाव में भाजपा, माकपा, कांग्रेस और अन्य दलों के कुल छह उम्मीदवार मैदान में हैं। यह सीट पूर्व विधायक और विधानसभा अध्यक्ष बिस्वा बंधु सेन के 26 दिसंबर 2025 को निधन के बाद खाली हुई थी।

राज्य चुनाव आयोग के मुताबिक, टीटीएएडीसी चुनाव में भाजपा, टिपरा मोथा पार्टी और लेफ्ट फ्रंट ने सभी 28 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं। कांग्रेस 27 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि आईपीएफटी ने 24 सीटों पर प्रत्याशी खड़े किए हैं। इसके अलावा 38 निर्दलीय और छोटे दलों के उम्मीदवार भी चुनाव मैदान में हैं।

कुल मिलाकर 12 अप्रैल को होने वाले टीटीएएडीसी चुनाव में 173 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। यह परिषद राज्य के लगभग दो-तिहाई भूभाग (करीब 10,491 वर्ग किमी) को कवर करती है और 12 लाख से अधिक आबादी का प्रतिनिधित्व करती है, जिसमें करीब 84 प्रतिशत जनजातीय समुदाय शामिल हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि यह मतदान की पारदर्शिता और निष्पक्षता को प्रभावित कर सकता है। सभी राजनीतिक दलों को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
RashtraPress
19 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईवीएम में वीवीपैट का क्या महत्व है?
वीवीपैट मतदाता को उनके वोट की पुष्टि करने का अवसर प्रदान करता है, जिससे मतदान प्रक्रिया की पारदर्शिता बढ़ती है।
लेफ्ट फ्रंट ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए हैं?
लेफ्ट फ्रंट का आरोप है कि चुनाव आयोग बिना वीवीपैट वाली ईवीएम का इस्तेमाल कर रहा है, जबकि राज्य में पर्याप्त मशीनें उपलब्ध हैं।
धर्मनगर विधानसभा सीट पर कब मतदान होगा?
धर्मनगर विधानसभा सीट पर उपचुनाव 9 अप्रैल को होगा।
टीटीएएडीसी चुनाव कब होंगे?
टीटीएएडीसी के लिए मतदान 12 अप्रैल को होगा।
क्या चुनाव में अन्य दल भी शामिल हैं?
जी हाँ, भाजपा, कांग्रेस, माकपा और अन्य दल चुनाव में भाग ले रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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