कैबिनेट ने आईवीएफआरटी योजना की 1,800 करोड़ रुपए के बजट के साथ 2026 के बाद भी जारी रखने की स्वीकृति दी
सारांश
Key Takeaways
- कैबिनेट ने 1,800 करोड़ रुपए के बजट के साथ आईवीएफआरटी योजना को 2026 से 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दी।
- इस योजना का उद्देश्य आव्रजन और वीजा प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करना है।
- यह योजना राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने में सहायक होगी।
- यह परियोजना पर्यटन और व्यापार क्षेत्रों को बढ़ावा देने में मदद करेगी।
- इसका बजट 2010 से अब तक कई बार संशोधित किया गया है।
नई दिल्ली, २५ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कैबिनेट ने १,८०० करोड़ रुपए के बजट के साथ आव्रजन, वीजा, विदेशी पंजीकरण और ट्रैकिंग (आईवीएफआरटी) योजना को ३१ मार्च, २०२६ के बाद भी पाँच साल१ अप्रैल, २०२६ से ३१ मार्च, २०३१ तक जारी रखने की स्वीकृति दे दी है।
आईवीएफआरटी प्लेटफॉर्म का मुख्य उद्देश्य भारत में आव्रजन और वीजा जारी करने के कार्यों को सुव्यवस्थित करना और उन्हें आपस में जोड़ना है।
कैबिनेट की ओर से जारी प्रेस रिलीज में बताया गया कि इसका उद्देश्य वैध यात्रियों को सुविधाएँ प्रदान करना और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाना है। इस परियोजना को १३ मई, २०१० को आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति द्वारा १,०११ करोड़ रुपए के बजट के साथ सितंबर २०१४ तक की अवधि के लिए स्वीकृत किया गया था।
बाद में, परियोजना का बजट आवंटन २०१५ में संशोधित कर ६३८.९० करोड़ रुपए किया गया और कार्यान्वयन की समयसीमा को ३१ मार्च, २०१७ तक बढ़ाया गया, फिर इसे बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय बोझ के ३१ मार्च, २०२१ तक बढ़ा दिया गया। इसके बाद, कैबिनेट ने १९ जनवरी, २०२२ को इस परियोजना को १,३६५ करोड़ रुपए के बजट के साथ १ अप्रैल, २०२१ से ३१ मार्च, २०२६ तक की अवधि के लिए मंजूरी दी थी।
कैबिनेट ने कहा कि यह योजना मोबाइल-आधारित सेवाओं और सुरक्षित यात्री आवागमन के लिए सेल्फ-सर्विस कियोस्क जैसे उभरते टेक्नोलॉजी को अपनाकर आव्रजन और वीजा प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाएगी। यह देशव्यापी स्तर पर आव्रजन चौकियों, एफआरआरओ और डेटा केंद्रों में बुनियादी ढांचे को उन्नत और विस्तारित करेगी।
इसके अलावा, यह परियोजना एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म की शुरुआत, मुख्य अनुप्रयोग संरचना का नवीनीकरण और बेहतर दक्षता तथा उपयोगकर्ता अनुभव के लिए नेटवर्क और परिनियोजन ढांचे को मजबूत करने के माध्यम से प्रौद्योगिकी और सेवा वितरण को अनुकूलित करेगी। इससे वैध यात्रियों को सुविधाएं मिलेंगी और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। यह सेवा निरंतरता बनाए रखने और भविष्य में भारत में अधिक विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए नवीन प्रौद्योगिकी समाधानों को लागू करने में मदद करेगी।
बयान में कहा गया कि इससे पर्यटन, चिकित्सा और व्यापार क्षेत्रों को बढ़ावा मिलेगा। आईवीएफआरटी के सकारात्मक प्रभाव से अंतरराष्ट्रीय यातायात, व्यापार, वाणिज्य और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इससे आर्थिक विकास की संभावनाएं बढ़ेंगी और रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी।
आईवीएफआरटी प्रणाली ने आव्रजन और वीजा संबंधी सभी कार्यों में सेवा वितरण और परिचालन दक्षता में महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। इस प्रणाली ने ऑनलाइन अपॉइंटमेंट शेड्यूलिंग और भुगतान की सुविधाएं प्रदान की हैं, जिससे 100 प्रतिशत संपर्क रहित और व्यक्तिगत संपर्क रहित वीजा प्रक्रिया संभव हुई है। पिछले पाँच वर्षों में 91.24 प्रतिशत ई-वीजा आवेदनों को 72 घंटों के भीतर मंजूरी मिली है। आव्रजन चौकियों पर यात्रियों की औसत निकासी का समय बायोमेट्रिक्स सहित पारंपरिक 5-6 मिनट से घटकर 2.5-3 मिनट रह गया है।
१३ प्रमुख हवाई अड्डों पर लागू किए गए स्वचालित ई-गेट के माध्यम से फास्ट ट्रैक इमिग्रेशन-ट्रस्टेड ट्रैवलर प्रोग्राम (एफटीआई-टीटीपी) के कारण आव्रजन प्रक्रिया में लगने वाला समय 2.5-3 मिनट से घटकर 30 सेकंड हो गया है। वर्तमान में भारतीय नागरिकों और ओसीआई कार्डधारकों के लिए इसका पंजीकरण निशुल्क है।