12 अक्टूबर 2026
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कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा प्रस्ताव: पूरे बंगाल के कोर्ट परिसरों में वकीलों समेत सभी के लिए मेटल डिटेक्टर जांच

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कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा प्रस्ताव: पूरे बंगाल के कोर्ट परिसरों में वकीलों समेत सभी के लिए मेटल डिटेक्टर जांच

सारांश

कई न्यायालयों में सुरक्षा चूक और एक वरिष्ठ वकील के घर पर हमले के बाद कलकत्ता हाईकोर्ट ने पूरे बंगाल में कोर्ट परिसरों के प्रवेश द्वार पर मेटल डिटेक्टर जांच का प्रस्ताव रखा है — वकीलों को भी इससे छूट नहीं। अब बार काउंसिल की सहमति तय करेगी कि यह प्रस्ताव आदेश बनेगा या नहीं।

मुख्य बातें

कलकत्ता हाईकोर्ट ने 12 अक्टूबर 2026 को पश्चिम बंगाल के सभी कोर्ट परिसरों में मेटल डिटेक्टर जांच अनिवार्य करने का प्रस्ताव दिया।
चीफ जस्टिस रवींद्र वी.
घुगे और जस्टिस ओम नारायण राय की बेंच बारुईपुर, बैंकशाल, चंदननगर कोर्ट घटनाओं पर सुओ मोटो सुनवाई कर रही है।
वरिष्ठ अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य के आवास पर हमला भी इस मामले में शामिल है।
बेंच ने कोर्ट परिसर में सिगरेट, पान और गुटखा पर प्रतिबंध का भी आदेश दिया।
बारुईपुर कोर्ट में अधिवक्ता सायन बनर्जी पर अंडा फेंकने की घटना में अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं ।
राज्य सरकार को 11 दिसंबर 2026 तक अगली सुरक्षा रिपोर्ट देनी है।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने 12 अक्टूबर 2026 को पश्चिम बंगाल के समस्त न्यायालय परिसरों में प्रवेश करने वाले हर व्यक्ति — वकीलों सहित — के लिए मेटल डिटेक्टर से अनिवार्य जांच का प्रस्ताव रखा है। यह कदम राज्य के कई न्यायालयों में हुई गंभीर सुरक्षा घटनाओं के मद्देनज़र उठाया गया है, जिन्होंने न्यायिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े किए हैं।

मामले की पृष्ठभूमि

चीफ जस्टिस रवींद्र वी. घुगे और जस्टिस ओम नारायण राय की डिवीजन बेंच एक सुओ मोटो मामले की सुनवाई कर रही थी। यह स्वतः संज्ञान बारुईपुर, बैंकशाल और चंदननगर न्यायालयों में घटित घटनाओं तथा वरिष्ठ अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य के आवास पर हुए हमले के संदर्भ में लिया गया था। इन घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत सुरक्षा रिपोर्ट तलब की थी।

चीफ जस्टिस का प्रस्ताव और अगला कदम

चीफ जस्टिस ने राज्य के सभी ज़िला न्यायाधीशों को पत्र लिखकर न्यायालय के प्रवेश द्वार पर मेटल डिटेक्टर जांच लागू करने का प्रस्ताव दिया है। साथ ही बार एसोसिएशन से इस विषय पर विचार-विमर्श करने को कहा गया है। बेंच ने स्पष्ट किया कि यदि बार काउंसिल और बार एसोसिएशन किसी सर्वसम्मत निर्णय पर पहुँचते हैं और उसे लिखित रूप में प्रस्तुत करते हैं, तभी कोई औपचारिक आदेश जारी किया जाएगा। इस प्रकार अदालत ने एकतरफा आदेश देने की बजाय सहमति-आधारित दृष्टिकोण अपनाया है।

अन्य सुरक्षा निर्देश

बेंच ने यह भी आदेश दिया कि पूरे राज्य में कोर्ट परिसरों के भीतर सिगरेट, पान और गुटखा पर पाबंदी लगाई जाए। कुछ अधिवक्ताओं ने परिसर में नामित धूम्रपान क्षेत्र (डेजिग्नेटेड स्मोकिंग जोन) स्थापित करने का सुझाव भी रखा। गौरतलब है कि बारुईपुर कोर्ट में अधिवक्ता सायन बनर्जी पर अंडा फेंके जाने की घटना के मामले में अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

राज्य सरकार की प्रतिक्रिया

राज्य के वकील ने बेंच को बताया कि वकीलों ने काम बंद करने का अपना निर्णय वापस ले लिया है, सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया है और न्यायालयों में कामकाज सामान्य हो गया है। राज्य सरकार ने बैंकशाल कोर्ट, वेस्ट मिदनापुर और भट्टाचार्य के आवास पर हुए हमलों के संदर्भ में की गई कार्रवाई का भी ब्यौरा बेंच के सामने रखा।

अगली सुनवाई

डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार को 11 दिसंबर 2026 तक अगली प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। यह मामला पश्चिम बंगाल में न्यायिक सुरक्षा के व्यापक ढाँचे पर एक नज़ीर स्थापित कर सकता है, और बार-बेंच संवाद का परिणाम तय करेगा कि यह प्रस्ताव कानूनी आदेश का रूप लेता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो पुलिस की जवाबदेही पर सवाल उठाती है। हाईकोर्ट का बार एसोसिएशन से सहमति माँगना लोकतांत्रिक दृष्टि से सराहनीय है, लेकिन यह प्रक्रिया को विलंबित भी कर सकता है — और सुरक्षा का मामला आम सहमति की प्रतीक्षा में नहीं रह सकता।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कलकत्ता हाईकोर्ट ने मेटल डिटेक्टर जांच का प्रस्ताव क्यों रखा?
कलकत्ता हाईकोर्ट ने बारुईपुर, बैंकशाल और चंदननगर न्यायालयों में हुई सुरक्षा घटनाओं तथा वरिष्ठ अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य के घर पर हमले के बाद यह प्रस्ताव रखा। इन घटनाओं ने न्यायालय परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था की कमज़ोरियाँ उजागर कीं।
क्या वकीलों को भी मेटल डिटेक्टर से गुज़रना होगा?
हाईकोर्ट के प्रस्ताव के अनुसार कोर्ट परिसर में प्रवेश करने वाले सभी लोगों — वकीलों सहित — के लिए मेटल डिटेक्टर जांच अनिवार्य होगी। हालाँकि यह अभी प्रस्ताव स्तर पर है और बार काउंसिल की लिखित सहमति के बाद ही औपचारिक आदेश जारी होगा।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
कलकत्ता हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 11 दिसंबर 2026 तक अगली सुरक्षा प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। उसी दिन मामले की अगली सुनवाई होने की संभावना है।
बारुईपुर कोर्ट में अधिवक्ता पर अंडा फेंकने की घटना का क्या हुआ?
बारुईपुर न्यायालय में अधिवक्ता सायन बनर्जी पर अंडा फेंके जाने की घटना में अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। हाईकोर्ट की सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया, जो पुलिस कार्रवाई की धीमी गति को दर्शाता है।
कोर्ट परिसर में और क्या प्रतिबंध लगाए गए हैं?
हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि पूरे पश्चिम बंगाल के न्यायालय परिसरों के भीतर सिगरेट, पान और गुटखा पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए। कुछ वकीलों ने परिसर में नामित धूम्रपान क्षेत्र बनाने का सुझाव भी दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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