कलकत्ता हाई कोर्ट का बड़ा आदेश: महुआ मोइत्रा सुरक्षा मामले में गृह मंत्रालय को पक्षकार बनाया
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाई कोर्ट ने 14 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय गृह मंत्रालय को कृष्णानगर लोकसभा सांसद और तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता महुआ मोइत्रा की सुरक्षा से जुड़े मामले में गुरुवार तक पक्षकार के रूप में शामिल होने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति सौगता भट्टाचार्य की एकल-न्यायाधीश पीठ ने यह आदेश उस समय सुनाया जब अदालत में राज्य सरकार की रिपोर्ट और मोइत्रा के वकील के प्रतिवाद पर सुनवाई हुई। इस मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
मुख्य घटनाक्रम
मोइत्रा ने कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि नदिया जिले के उनके लोकसभा क्षेत्र में शरारती तत्व उन्हें लगातार परेशान कर रहे हैं। उनके अनुसार, पार्टी कार्यालय में उन पर अंडे फेंके गए और निर्वाचन क्षेत्र में कार से यात्रा के दौरान उन पर हमला भी किया गया।
प्रारंभिक सुनवाई में कोर्ट ने आदेश दिया था कि मोइत्रा के निर्वाचन क्षेत्र में रहने के दौरान उन्हें पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराई जाए और दो सुरक्षा गार्ड तैनात किए जाएं। बावजूद इसके हमले और उत्पीड़न जारी रहने का आरोप लगाते हुए उन्होंने पूर्णकालिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की माँग के साथ पुनः अदालत का दरवाजा खटखटाया।
राज्य सरकार की रिपोर्ट
7 अक्टूबर 2026 को अदालत ने पश्चिम बंगाल सरकार से रिपोर्ट माँगी थी और लोकसभा सदस्यों की सुरक्षा से संबंधित नियमों की जानकारी देने का निर्देश दिया था। बुधवार को राज्य के अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने अदालत में रिपोर्ट पेश करते हुए बताया कि कृष्णानगर सांसद को केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशानिर्देशों और सांसद की 'येलो बुक' के अनुसार सुरक्षा प्रदान की जा रही है।
अतिरिक्त महाधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि मोइत्रा को 'येलो बुक' के प्रावधानों के तहत 'एक्स' श्रेणी की सुरक्षा दी गई है।
सांसद के वकील का पक्ष
मोइत्रा के वकील ने अदालत को बताया कि यद्यपि उनकी मुवक्किल के लिए एक निजी सुरक्षा अधिकारी (PSO) नियुक्त है, तथापि वह चौबीसों घंटे उनके साथ नहीं रहता। वकील ने तर्क दिया कि लगातार हमलों की पृष्ठभूमि में मोइत्रा को बढ़ी हुई और निरंतर सुरक्षा की आवश्यकता है, और इस संदर्भ में केंद्रीय गृह मंत्रालय का हस्तक्षेप आवश्यक है।
इन दलीलों को सुनने के बाद न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने गृह मंत्रालय को गुरुवार तक मामले में पक्षकार बनाने का आदेश पारित किया।
आम जनता पर असर और व्यापक संदर्भ
यह मामला उस बड़े विमर्श को उजागर करता है जिसमें सवाल उठाया जाता है कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, विशेषकर विपक्षी दलों के सांसदों को, उनके अपने निर्वाचन क्षेत्र में सुरक्षित माहौल मिल रहा है या नहीं। पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के सांसद का अदालत की शरण लेना, राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
गौरतलब है कि 'एक्स' श्रेणी की सुरक्षा में आमतौर पर एक PSO और कुछ सशस्त्र गार्ड शामिल होते हैं, लेकिन इसमें पूर्णकालिक एस्कॉर्ट का प्रावधान अनिवार्य रूप से नहीं होता। मोइत्रा का तर्क है कि उनकी परिस्थितियाँ इस मानक व्यवस्था से कहीं अधिक गंभीर हैं।
क्या होगा आगे
केंद्रीय गृह मंत्रालय के पक्षकार बनने के बाद अदालत यह तय करेगी कि मोइत्रा को मिलने वाली सुरक्षा केंद्रीय नियमों के अनुरूप है या नहीं, और क्या बढ़ी हुई सुरक्षा देना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी बनती है। इस मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर 2026 को होगी, जब गृह मंत्रालय का पक्ष भी अदालत के सामने आएगा।