महुआ मोइत्रा को कलकत्ता हाईकोर्ट से राहत, गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक 29 जनवरी तक बढ़ी
सारांश
मुख्य बातें
तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा को कलकत्ता हाईकोर्ट ने 1 अक्टूबर 2026 को धार्मिक भावनाएँ आहत करने के मामले में गिरफ्तारी सहित किसी भी सख्त कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा 29 जनवरी 2027 तक बढ़ा दी है। जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की सिंगल बेंच ने यह आदेश पारित करते हुए स्पष्ट किया कि मोइत्रा के विरुद्ध जाँच कानूनी प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगी। अगली सुनवाई 13 जनवरी को तय की गई है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला इस वर्ष की शुरुआत में हुए विधानसभा चुनावों के बाद उत्पन्न हुआ। आरोप है कि 15 जून को एक फेसबुक लाइव प्रसारण के दौरान कृष्णानगर की सांसद मोइत्रा ने कथित तौर पर ऐसी टिप्पणियाँ कीं जिनसे एक विशेष समुदाय की धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं। इसके अगले दिन, नदिया जिले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के करीमपुर मंडल-4 ब्लॉक के महासचिव हीराक भट्टाचार्य ने होगलबेरिया पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जाँच शुरू की।
अदालत का आदेश और जाँच की दिशा
मोइत्रा ने इस वर्ष जुलाई में कलकत्ता हाईकोर्ट में एफआईआर को चुनौती दी थी, जिसके बाद जस्टिस भट्टाचार्य की बेंच ने उन्हें 5 अक्टूबर तक अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी। गुरुवार को उसी सुरक्षा को विस्तार देते हुए अब 29 जनवरी 2027 तक बढ़ाया गया है। अदालत ने मोइत्रा को जाँच के दौरान जाँच अधिकारी का पूर्ण सहयोग करने का निर्देश भी दिया है।
सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा अलग मामला
एक अन्य प्रकरण में, अदालत ने मोइत्रा को उनके संसदीय क्षेत्र के दौरे के समय अंडे से हुए हमले के बाद दी गई पुलिस सुरक्षा को 30 नवंबर तक जारी रखने का आदेश दिया। पूर्व के आदेश के तहत क्षेत्र दौरों के दौरान दो पुलिसकर्मी उनके साथ रहेंगे। हालाँकि, अंडे से हमले से जुड़े मामले अभी कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विट्ठलराव घुगे की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच के समक्ष लंबित हैं। इसी कारण जस्टिस भट्टाचार्य ने उस मामले की आगे की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया।
राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी BJP के बीच राजनीतिक तनाव ऊँचा है। गौरतलब है कि मोइत्रा पहले भी संसद में नकद-लेकर-सवाल पूछने के विवाद में रह चुकी हैं और बाद में उन्हें लोकसभा सदस्यता से निष्कासित किया गया था, हालाँकि वे बाद में चुनाव जीतकर वापस लौटीं। इस पृष्ठभूमि में नया आपराधिक मामला उनकी राजनीतिक छवि के लिए एक और परीक्षा है।
आगे क्या होगा
मामले की अगली सुनवाई 13 जनवरी 2027 को निर्धारित है। तब तक मोइत्रा को गिरफ्तारी व किसी भी कठोर कार्रवाई से सुरक्षा मिली रहेगी, बशर्ते वे जाँच में सहयोग करती रहें। अदालत का अंतिम रुख मामले की मेरिट पर जनवरी में स्पष्ट होने की संभावना है।