सिद्दिपेट में कार कुएं में गिरी, एक परिवार के चार सदस्यों की मौत — दो मासूम बच्चे भी शामिल
सारांश
मुख्य बातें
तेलंगाना के सिद्दिपेट जिले में 20 अगस्त 2026 की देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक ही परिवार के चार सदस्यों की जान चली गई, जिनमें 4 वर्षीय और 2 वर्षीय दो मासूम बच्चे भी शामिल थे। दुब्बाका मंडल के अप्पनापल्ली के निकट उनकी कार सड़क किनारे एक खुले कुएं में जा गिरी।
हादसे का घटनाक्रम
मृतकों की पहचान डी. राजू (30), उनकी पत्नी भाग्य (25), बेटे निहांश (4) और बेटी शानविका (2) के रूप में हुई है। चारों बलवंतपुर गाँव, सिद्दिपेट के निवासी थे।
रेत व्यापारी राजू अपने परिवार के साथ एक रिश्तेदार के 'दश दिन कर्म' (मृत्यु के दसवें दिन की पारंपरिक रस्म) में शामिल होकर सिद्दिपेट से लौट रहे थे। अप्पनापल्ली के पास पहुँचते ही वाहन पर से नियंत्रण छूट गया और कार सड़क किनारे बने एक खुले कुएं में जा गिरी।
बचाव अभियान
स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी। पुलिस और दमकल कर्मियों ने क्रेन की सहायता से कुएं से कार और चारों शवों को बाहर निकाला। शवों को पोस्टमार्टम के लिए दुब्बाका सरकारी अस्पताल भेजा गया। पुलिस के अनुसार, तेज रफ्तार इस हादसे की संभावित वजह बताई जा रही है। मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी गई है।
तेलंगाना में सड़क सुरक्षा की स्थिति
यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब तेलंगाना में सड़क दुर्घटनाओं का आँकड़ा चिंताजनक स्तर पर है। पुलिस महानिदेशक सीवी आनंद के अनुसार, पिछले वर्ष राज्य में सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 8,000 लोगों की मौत हुई। उन्होंने बताया कि नवीनतम मानव संसाधन पुनर्गठन में सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है और यातायात प्रबंधन एवं दुर्घटना-रोकथाम के लिए 224 कर्मियों का आवंटन किया गया है।
पुलिस महानिदेशक ने यह भी कहा कि विभाग दुर्घटना-संभावित स्थानों की पहचान करने और बुनियादी ढाँचे की कमियों को दूर करने के लिए इंजीनियरिंग व अन्य सरकारी विभागों के साथ समन्वय करेगा। इसके अलावा राज्यव्यापी सड़क सुरक्षा अभियान चलाने की भी योजना है।
सरकार की पहल
गौरतलब है कि पिछले महीने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने अधिकारियों को राज्य में यातायात प्रबंधन और सड़क सुरक्षा के लिए एक समर्पित ब्यूरो स्थापित करने का निर्देश दिया था। उन्होंने परिवहन प्रणाली का व्यापक अध्ययन कराने और इस ब्यूरो को एक ठोस संस्थागत ढाँचा देने पर जोर दिया था। यातायात सुधार उपायों की हर दो से तीन महीने में समीक्षा करने का निर्देश भी दिया गया था।
अप्पनापल्ली का यह हादसा उन खुले कुओं और असुरक्षित सड़क किनारों की ओर ध्यान खींचता है जो ग्रामीण तेलंगाना में आज भी जानलेवा खतरा बने हुए हैं। प्रशासनिक संकल्पों और ज़मीनी हकीकत के बीच की खाई को पाटना अब नीति-निर्माताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।