24 अगस्त 2026
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सीबीआई की 18वीं चार्जशीट: इंडियाबुल्स समूह पर घर खरीदारों से धोखाधड़ी का आरोप, राजारहाट प्रोजेक्ट मामला

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सीबीआई की 18वीं चार्जशीट: इंडियाबुल्स समूह पर घर खरीदारों से धोखाधड़ी का आरोप, राजारहाट प्रोजेक्ट मामला

सारांश

घर खरीदारों से कथित धोखाधड़ी के मामले में सीबीआई ने अपनी 18वीं चार्जशीट दाखिल की — इस बार निशाने पर हैं इंडियाबुल्स समूह की कंपनियाँ और राजारहाट हाउसिंग प्रोजेक्ट। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर चल रही इस जांच में अभी 31 और मामले लंबित हैं।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 24 अगस्त 2026 को घर खरीदारों से धोखाधड़ी के मामले में 18वीं चार्जशीट दाखिल की।
चार्जशीट मेसर्स एमकेएचएस हाउसिंग एलएलपी , इंडियाबुल्स नेस्ट्स लिमिटेड और इंडियाबुल्स अर्बन रेजिडेंसी लिमिटेड के निदेशकों व अधिकारियों के खिलाफ दाखिल।
मामला पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के राजारहाट के एक हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़ा है।
चार्जशीट सीबीआई विशेष कोर्ट-II, अलीपुर में दाखिल; भारतीय दंड संहिता की धोखाधड़ी, साजिश और विश्वासघात की धाराएँ लगाई गईं।
सीबीआई अभी भी सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत 31 अन्य मामलों की जांच कर रही है।
इससे पहले जेपी इंफ्राटेक , नाइनेक्स डेवलपर्स सहित अन्य कंपनियों के खिलाफ 17 चार्जशीट दाखिल हो चुकी हैं।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 24 अगस्त 2026 को घर खरीदारों के साथ कथित धोखाधड़ी के मामले में अपनी 18वीं चार्जशीट दाखिल की — यह चार्जशीट मेसर्स एमकेएचएस हाउसिंग एलएलपी, मेसर्स इंडियाबुल्स नेस्ट्स लिमिटेड (पूर्व में इंडियाबुल्स डिस्ट्रीब्यूशन सर्विसेज लिमिटेड) और मेसर्स इंडियाबुल्स अर्बन रेजिडेंसी लिमिटेड (पूर्व में इंडियाबुल्स इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स लिमिटेड) के निदेशकों व अधिकारियों के खिलाफ दाखिल की गई है। यह मामला पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के राजारहाट टाउन एरिया में स्थित एक हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित है।

मुख्य घटनाक्रम

सीबीआई के सूचना विभाग द्वारा जारी बयान के अनुसार, आरोपी बिल्डर कंपनियों और उनके निदेशकों ने एनबीएफसी अधिकारियों के साथ कथित मिलीभगत करके झूठे वादों और भ्रामक दावों के ज़रिए घर खरीदारों तथा निवेशकों को लुभाया। जांच में ठोस साक्ष्य मिलने के बाद भारतीय दंड संहिता की आपराधिक साजिश, उकसाने, धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात से संबंधित धाराओं के तहत यह चार्जशीट सीबीआई की विशेष कोर्ट-II, अलीपुर, उत्तर 24 परगना, पश्चिम बंगाल के समक्ष प्रस्तुत की गई है।

जांच का दायरा और पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब सीबीआई सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत देशभर की विभिन्न बिल्डर कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के खिलाफ 31 अन्य मामलों की जांच कर रही है। इन सभी मामलों में घर खरीदारों के साथ कथित धोखाधड़ी और फंड के डायवर्जन के आरोप हैं। गौरतलब है कि यह कार्रवाई उच्चतम न्यायालय की सक्रिय निगरानी में चल रही व्यापक जांच का हिस्सा है, जो रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेशकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शुरू की गई थी।

पहले की कार्रवाइयाँ

इस 18वीं चार्जशीट से पहले सीबीआई मेसर्स रुद्र बिल्डवेल कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स ड्रीम प्रोकॉन प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड, मेसर्स एवीजे डेवलपर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स सीएचडी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स सीक्वल बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स लॉजिक्स सिटी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स मंजू जे होम्स इंडिया लिमिटेड, मेसर्स शुभकामना बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स नाइनेक्स डेवलपर्स लिमिटेड सहित अन्य कंपनियों के खिलाफ 17 चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। यह निरंतर कार्रवाई दर्शाती है कि रियल एस्टेट क्षेत्र में धोखाधड़ी के मामलों पर जांच एजेंसी की पकड़ लगातार मजबूत हो रही है।

आम जनता पर असर

राजारहाट जैसे उभरते आवासीय क्षेत्रों में निवेश करने वाले मध्यमवर्गीय खरीदारों के लिए यह मामला विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। कथित तौर पर इन खरीदारों ने अपनी जीवनभर की बचत इन परियोजनाओं में लगाई थी, लेकिन समय पर मकान नहीं मिले और फंड के दुरुपयोग के आरोप सामने आए। सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद ही इन मामलों में सीबीआई जांच शुरू हो सकी।

क्या होगा आगे

सीबीआई की विशेष कोर्ट-II, अलीपुर अब इस चार्जशीट पर सुनवाई करेगी। साथ ही, देश में अभी भी 31 अन्य मामले जांच के अधीन हैं, जिनमें अज्ञात अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन मामलों में दोषसिद्धि से रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेशकों के विश्वास को पुनर्स्थापित करने में मदद मिल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि इन मामलों में दोषसिद्धि की दर क्या रहेगी — भारत में सफेदपोश अपराध मामलों में अदालती प्रक्रिया अक्सर दशकों तक खिंचती है। रियल एस्टेट क्षेत्र में धोखाधड़ी के ये मामले सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद ही सुर्खियों में आए, जो नियामकीय ढाँचे की उस कमज़ोरी को उजागर करता है जिसे रेरा (RERA) के बावजूद पूरी तरह नहीं पाटा जा सका। 31 अन्य लंबित मामलों के साथ, यह स्पष्ट है कि समस्या किसी एक कंपनी तक सीमित नहीं — यह क्षेत्रव्यापी संरचनात्मक विफलता है जिसके लिए जवाबदेही तय करना अभी बाकी है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई ने 18वीं चार्जशीट किसके खिलाफ और क्यों दाखिल की?
सीबीआई ने यह चार्जशीट मेसर्स एमकेएचएस हाउसिंग एलएलपी, मेसर्स इंडियाबुल्स नेस्ट्स लिमिटेड और मेसर्स इंडियाबुल्स अर्बन रेजिडेंसी लिमिटेड के निदेशकों व अधिकारियों के खिलाफ दाखिल की है। आरोप है कि इन्होंने एनबीएफसी अधिकारियों के साथ मिलकर घर खरीदारों और निवेशकों से धोखाधड़ी की और अवैध वित्तीय लाभ उठाया।
यह मामला किस हाउसिंग प्रोजेक्ट से जुड़ा है?
यह मामला पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के राजारहाट टाउन एरिया में स्थित एक हाउसिंग प्रोजेक्ट से संबंधित है। चार्जशीट सीबीआई की विशेष कोर्ट-II, अलीपुर में दाखिल की गई है।
सीबीआई अभी कितने ऐसे मामलों की जांच कर रही है?
सीबीआई वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत देशभर की विभिन्न बिल्डर कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के खिलाफ 31 अन्य मामलों की जांच कर रही है। ये सभी मामले घर खरीदारों से कथित धोखाधड़ी और फंड डायवर्जन से जुड़े हैं।
इससे पहले सीबीआई ने किन बिल्डर कंपनियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी?
इस 18वीं चार्जशीट से पहले सीबीआई मेसर्स जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड, मेसर्स नाइनेक्स डेवलपर्स लिमिटेड, मेसर्स ड्रीम प्रोकॉन प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स रुद्र बिल्डवेल कंस्ट्रक्शंस और अन्य कंपनियों सहित कुल 17 चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।
घर खरीदारों पर इस मामले का क्या असर पड़ेगा?
चार्जशीट दाखिल होने से प्रभावित घर खरीदारों को न्यायिक प्रक्रिया के ज़रिए राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है। हालाँकि, विशेषज्ञों का कहना है कि सफेदपोश अपराध मामलों में अदालती कार्यवाही लंबी हो सकती है, इसलिए पीड़ितों को धैर्य रखना होगा।
राष्ट्र प्रेस
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