गाजियाबाद हाउसिंग घोटाला: सीबीआई ने मंजू जे. होम्स और SBI अधिकारियों के खिलाफ 9वीं चार्जशीट दाखिल की

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गाजियाबाद हाउसिंग घोटाला: सीबीआई ने मंजू जे. होम्स और SBI अधिकारियों के खिलाफ 9वीं चार्जशीट दाखिल की

सारांश

सीबीआई ने गाजियाबाद हाउसिंग प्रोजेक्ट में बिल्डर-बैंक गठजोड़ का भंडाफोड़ करते हुए 9वीं चार्जशीट दाखिल की है। मेसर्स मंजू जे. होम्स इंडिया और SBI अधिकारियों पर होमबायर्स से सुनियोजित ठगी के आरोप हैं। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर देशभर में ऐसे 50 मामलों की जांच जारी है।

मुख्य बातें

सीबीआई ने गाजियाबाद हाउसिंग घोटाले में 9वीं चार्जशीट सक्षम अदालत में दाखिल की।
होम्स इंडिया लिमिटेड के निदेशकों और SBI के कुछ अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है।
आरोपों में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रावधान शामिल हैं।
सीबीआई सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर देशभर में ऐसे 50 मामलों की जांच कर रही है।
इससे पहले 8 चार्जशीट दाखिल हो चुकी हैं, जिनमें जयपी इंफ्राटेक, लॉजिक्स सिटी डेवलपर्स समेत कई बड़ी कंपनियाँ शामिल हैं।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने गाजियाबाद स्थित एक हाउसिंग प्रोजेक्ट में व्यापक बिल्डर-बैंक गठजोड़ का भंडाफोड़ करते हुए 9वीं चार्जशीट सक्षम अदालत में दाखिल की है। इस चार्जशीट में मेसर्स मंजू जे. होम्स इंडिया लिमिटेड, उसके निदेशकों और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के कुछ अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, इस साजिश में निर्दोष होमबायर्स और वित्तीय संस्थानों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।

मुख्य आरोप और आपराधिक साजिश

सीबीआई के अनुसार, मेसर्स मंजू जे. होम्स इंडिया लिमिटेड के निदेशकों ने SBI के कुछ अधिकारियों और अन्य निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र रचा। आरोप है कि घर खरीदने के इच्छुक लोगों और निवेशकों को बड़े-बड़े वादे तथा झूठे आश्वासन देकर फंसाया गया और धोखाधड़ी के ज़रिए अवैध आर्थिक लाभ कमाया गया।

चार्जशीट में दर्ज धाराओं में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करना व उनका इस्तेमाल करना तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत के प्रावधान शामिल हैं।

बैंक अधिकारियों की भूमिका

जांच में सामने आया कि आरोपी SBI अधिकारियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए तय नियमों और प्रक्रियाओं को दरकिनार किया। इन अधिकारियों ने बिल्डर कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया, जिसके परिणामस्वरूप वित्तीय संस्थान को सीधा नुकसान हुआ और होमबायर्स ठगी का शिकार बने।

जांच एजेंसी का कहना है कि मामले में बड़ी मात्रा में दस्तावेजी और मौखिक साक्ष्य मिले हैं, जो यह स्पष्ट करते हैं कि यह महज एक साधारण धोखाधड़ी नहीं, बल्कि सरकारी पदों के दुरुपयोग, फंड की हेराफेरी और होमबायर्स के साथ सुनियोजित ठगी का मामला है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 50 मामलों की जांच

गौरतलब है कि सीबीआई फिलहाल सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर देशभर में ऐसे 50 मामलों की जांच कर रही है। ये मामले विभिन्न बिल्डर कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के अज्ञात अधिकारियों से जुड़े हैं, जिन पर होमबायर्स से धोखाधड़ी और फंड डायवर्जन के आरोप हैं। यह 9वीं चार्जशीट उस व्यापक जांच अभियान की कड़ी है जो रियल एस्टेट क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए चलाई जा रही है।

पूर्व में दाखिल चार्जशीट — किन कंपनियों पर हुई कार्रवाई

इससे पहले सीबीआई 8 चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिनमें रुद्र बिल्डवेल कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड, ड्रीम प्रोकॉन प्राइवेट लिमिटेड, जयपी इंफ्राटेक लिमिटेड, एवीजे डेवलपर्स (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड, सीएचडी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, शुभकामना बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड, सीक्वल बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड और लॉजिक्स सिटी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियाँ शामिल हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब रियल एस्टेट क्षेत्र में होमबायर्स के हितों की सुरक्षा को लेकर न्यायपालिका और नियामक संस्थाएं दोनों सक्रिय हैं।

सीबीआई का रुख और आगे की कार्रवाई

सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि आर्थिक अपराध, भ्रष्टाचार और आम नागरिकों के साथ धोखाधड़ी के मामलों में जवाबदेही तय करना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। एजेंसी ने कहा कि जहाँ भी होमबायर्स और आम निवेशकों के हित प्रभावित होते हैं, वहाँ सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। शेष 50 में से जांच के तहत आने वाले मामलों में भी जल्द कार्रवाई अपेक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसे भरे बिना न्याय अधूरा रहेगा।
RashtraPress
20 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गाजियाबाद हाउसिंग घोटाले में सीबीआई ने किसके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है?
सीबीआई ने मेसर्स मंजू जे. होम्स इंडिया लिमिटेड, उसके निदेशकों और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के कुछ अधिकारियों के खिलाफ 9वीं चार्जशीट दाखिल की है। इन पर होमबायर्स और वित्तीय संस्थानों के साथ सुनियोजित धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप हैं।
इस मामले में क्या-क्या आरोप लगाए गए हैं?
चार्जशीट में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी, फर्जी दस्तावेज तैयार करना और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत के प्रावधान शामिल हैं। आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने नियमों को दरकिनार कर बिल्डर को अनुचित लाभ पहुंचाया।
सीबीआई देशभर में कितने ऐसे मामलों की जांच कर रही है?
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर सीबीआई फिलहाल देशभर में ऐसे 50 मामलों की जांच कर रही है। ये मामले विभिन्न बिल्डर कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों से जुड़े हैं, जिन पर होमबायर्स से धोखाधड़ी और फंड डायवर्जन के आरोप हैं।
इससे पहले सीबीआई किन कंपनियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है?
सीबीआई पहले 8 चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिनमें जयपी इंफ्राटेक लिमिटेड, लॉजिक्स सिटी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड, रुद्र बिल्डवेल कंस्ट्रक्शंस, ड्रीम प्रोकॉन, एवीजे डेवलपर्स, सीएचडी डेवलपर्स, शुभकामना बिल्डटेक और सीक्वल बिल्डकॉन जैसी कंपनियाँ शामिल हैं।
होमबायर्स इस मामले में कैसे प्रभावित हुए हैं?
आरोप है कि बिल्डर कंपनी ने घर खरीदने के इच्छुक लोगों को झूठे वादे और आश्वासन देकर निवेश कराया और धोखाधड़ी से उनकी रकम हड़प ली। बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से फंड का दुरुपयोग हुआ, जिससे होमबायर्स को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
राष्ट्र प्रेस
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