श्रीनगर नगर निगम के वार्ड अधिकारी को सीबीआई ने ₹10,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 16 अक्टूबर 2026 को श्रीनगर नगर निगम (एसएमसी) के सफाकदल वार्ड के एक वार्ड अधिकारी को ₹10,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपी की पहचान शेख जमील मोहम्मद के रूप में हुई है, जिन पर आरोप है कि उन्होंने एक शिकायतकर्ता के घर पर चल रहे मामूली मरम्मत कार्य को जारी रखने की अनुमति के बदले यह राशि माँगी थी।
मुख्य घटनाक्रम
सीबीआई के अनुसार, एजेंसी को एक शिकायत प्राप्त हुई थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि वार्ड अधिकारी शेख जमील मोहम्मद ने शिकायतकर्ता के आवासीय परिसर में चल रहे छोटे-मोटे मरम्मत कार्य को अनुमति देने के एवज़ में ₹10,000 की रिश्वत की माँग की। शिकायत के आधार पर एजेंसी ने 15 अक्टूबर 2026 को आरोपी के विरुद्ध औपचारिक मामला दर्ज किया।
इसके पश्चात सीबीआई ने गुरुवार को एक सुनियोजित जाल बिछाया। आरोपी वार्ड अधिकारी को शिकायतकर्ता से ₹10,000 की रिश्वत माँगते और स्वीकार करते हुए मौके पर ही पकड़ लिया गया। गिरफ्तारी के बाद मामले की आगे की जांच जारी है।
सीबीआई का जम्मू-कश्मीर में अधिकार क्षेत्र
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि सीबीआई को जम्मू-कश्मीर में मामलों की जांच का पूर्ण अधिकार प्राप्त है। यह अधिकार 1958 और 1963 में राज्य सरकार द्वारा दी गई सामान्य सहमति तथा दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (डीएसपीई) अधिनियम, 1946 के प्रावधानों के तहत मिला हुआ है।
जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 लागू होने के बाद और केंद्रीय भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित अन्य केंद्रीय कानूनों के विस्तार के साथ, सीबीआई अब इस केंद्र शासित प्रदेश में बिना किसी बाधा के मामले दर्ज कर सकती है और जांच कर सकती है।
नागरिकों से सीबीआई की अपील
इस मामले के साथ-साथ सीबीआई ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी उनसे रिश्वत माँगे या वे किसी भ्रष्टाचार का सामना करें, तो वे इसकी रिपोर्ट अवश्य करें। शिकायत दर्ज कराने के लिए नागरिक श्रीनगर स्थित सीबीआई, एसीबी कार्यालय — गेस्ट हाउस नंबर 6, एमएलए हॉस्टल के पास, एमए रोड, श्रीनगर — में जा सकते हैं, 9419900977 पर संपर्क कर सकते हैं या ईमेल के ज़रिए जानकारी साझा कर सकते हैं।
आम जनता पर असर
यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब जम्मू-कश्मीर में भ्रष्टाचार-विरोधी अभियान को लेकर प्रशासनिक दबाव बढ़ा हुआ है। नगर निगम स्तर पर रिश्वत के ऐसे मामले आमतौर पर आम नागरिकों को सीधे प्रभावित करते हैं, क्योंकि घर की मरम्मत जैसे बुनियादी कार्यों के लिए भी उन्हें अनुमति के लिए स्थानीय अधिकारियों पर निर्भर रहना पड़ता है।
इस गिरफ्तारी से यह संकेत मिलता है कि सीबीआई अब केवल बड़े मामलों तक सीमित नहीं रह रही, बल्कि जमीनी स्तर के भ्रष्टाचार पर भी नज़र रख रही है। आगे की जांच में यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह प्रकरण किसी बड़े रैकेट से जुड़ा है या नहीं।