शहडोल में सीबीआई का शिकंजा: सेंट्रल बैंक के सहायक प्रबंधक अभयंकर शर्मा ₹10,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जबलपुर इकाई ने 12 जून 2026 को शहडोल में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के सहायक प्रबंधक अभयंकर शर्मा को ₹10,000 की रिश्वत स्वीकार करते हुए मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। आरोप है कि शर्मा बैंकिंग कियोस्क संचालन की अनुमति और अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने के एवज में यह रकम माँग रहे थे।
मुख्य घटनाक्रम
शहडोल के स्थानीय निवासी दीपेंद्र सिंह ने जिले में चार नए बैंकिंग कियोस्क (ग्राहक सेवा केंद्र) खोलने के लिए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में आवेदन किया था। अधिकारियों के अनुसार, क्षेत्रीय कार्यालय में तैनात सहायक प्रबंधक अभयंकर शर्मा ने फाइल आगे बढ़ाने और आवश्यक स्वीकृति देने के लिए लगातार धन की माँग की।
तंग आकर दीपेंद्र सिंह ने सीबीआई की जबलपुर इकाई के पुलिस अधीक्षक एस.के. राठी से संपर्क कर लिखित शिकायत दर्ज कराई। जांच एजेंसी ने पहले गोपनीय तरीके से प्रारंभिक सत्यापन किया और मामला सही पाए जाने पर जाल बिछाया।
गिरफ्तारी का विवरण
तय रणनीति के तहत गुरुवार को शिकायतकर्ता दीपेंद्र सिंह रिश्वत की रकम लेकर बैंक अधिकारी के पास पहुँचा। आरोपी शर्मा बैंक परिसर से बाहर निकलकर पास के गुरुद्वारे के समीप आया और वहाँ ₹10,000 नकद स्वीकार किए। जैसे ही रकम उसके हाथ में आई, सादे कपड़ों में तैनात सीबीआई टीम ने उसे मौके पर ही दबोच लिया और रिश्वत की राशि बरामद कर ली।
ग्वालियर में छापेमारी
गिरफ्तारी के बाद सीबीआई की एक अन्य टीम ने ग्वालियर स्थित आरोपी के निजी आवास पर भी छापा मारा। अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई उसकी संपत्ति और संबंधित दस्तावेजों की जाँच के उद्देश्य से की गई। अभयंकर शर्मा मूल रूप से ग्वालियर के निवासी हैं।
कानूनी कार्रवाई
अधिकारियों के अनुसार, आरोपी के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी औपचारिकताएँ पूरी की जा रही हैं। हिरासत में लेने के बाद पूछताछ जारी है। गौरतलब है कि यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में भ्रष्टाचार की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
आगे की जाँच
सीबीआई की जबलपुर टीम मामले की आगे जाँच कर रही है। ग्वालियर छापे में बरामद दस्तावेजों और संपत्ति के विवरण की पड़ताल की जा रही है। आलोचकों का कहना है कि बैंकिंग सेवाओं तक पहुँच के लिए आम नागरिकों से रिश्वत माँगना वित्तीय समावेशन की नीतियों को सीधे नुकसान पहुँचाता है।