सीबीआई ने मेरठ कैंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य को ₹3 लाख रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 29 मई 2026 को मेरठ छावनी बोर्ड के मनोनीत सदस्य सतीश कुमार शर्मा को ₹3 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई एजेंसी द्वारा बिछाए गए जाल के तहत की गई, जिसमें आरोपी को गांधी बाग, मेरठ कैंट क्षेत्र में टेंडर संबंधी सुविधा के बदले रिश्वत मांगते और लेते पकड़ा गया।
मामले का मूल घटनाक्रम
जांच एजेंसी के अनुसार, सतीश कुमार शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने गांधी बाग, मेरठ कैंट में पार्किंग, कैंटीन और प्रवेश शुल्क के टेंडर को निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए शिकायतकर्ता से ₹3,00,000 की रिश्वत की मांग की थी। यह टेंडर शिकायतकर्ता की माँ द्वारा संचालित एक निजी फर्म को आवंटित था।
सीबीआई ने 29 मई को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की और उसी दिन जाल बिछाकर आरोपी को शिकायतकर्ता से रिश्वत की रकम मांगते और स्वीकार करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। जांचकर्ताओं के अनुसार मामले की जांच अभी जारी है।
न्यायालय में पेशी
गिरफ्तारी के बाद सतीश कुमार शर्मा को गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश की सक्षम अदालत में पेश किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि इस संबंध में और विवरण की प्रतीक्षा है।
मेरठ में सीबीआई की हालिया कार्रवाइयाँ
गौरतलब है कि यह मेरठ में सीबीआई की हाल की दूसरी बड़ी भ्रष्टाचार-रोधी कार्रवाई है। इसी महीने की शुरुआत में एजेंसी ने सीजीएसटी मेरठ, रेंज-I के अधीक्षक संजय मीणा और उनके कार्यालय में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर यश शर्मा को ₹6,000 की रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया था।
उस मामले में आरोप था कि यश शर्मा ने शिकायतकर्ता को जारी 'कारण बताओ नोटिस' को रद्द कराने के लिए अधीक्षक संजय मीणा की ओर से रिश्वत की मांग की थी। सीबीआई के जाल में दोनों रंगे हाथों पकड़े गए और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब सीबीआई ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के मामलों पर अपनी पकड़ मजबूत की है। छावनी बोर्ड जैसी अर्ध-सैन्य नागरिक संस्थाओं में भ्रष्टाचार के मामले राष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय रहे हैं। आगे की जांच में अन्य संलिप्तताओं की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।