16 जुलाई 2026
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सीबीआई ने मेरठ कैंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य को ₹3 लाख रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचा

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सीबीआई ने मेरठ कैंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य को ₹3 लाख रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचा

सारांश

सीबीआई ने मेरठ छावनी बोर्ड के मनोनीत सदस्य सतीश कुमार शर्मा को ₹3 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा। गांधी बाग के टेंडर को जारी रखने के बदले माँगी गई यह रकम एजेंसी के जाल में फँसी। मेरठ में यह सीबीआई की इस महीने की दूसरी बड़ी भ्रष्टाचार-रोधी कार्रवाई है।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 29 मई 2026 को मेरठ छावनी बोर्ड के मनोनीत सदस्य सतीश कुमार शर्मा को ₹3 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
आरोप है कि शर्मा ने गांधी बाग, मेरठ कैंट में पार्किंग, कैंटीन और प्रवेश शुल्क के टेंडर को जारी रखने के लिए रिश्वत माँगी थी।
आरोपी को गाजियाबाद की सक्षम अदालत में पेश किया जा रहा है; मामले की जांच जारी है।
इसी महीने सीबीआई ने सीजीएसटी मेरठ के अधीक्षक संजय मीणा और कंप्यूटर ऑपरेटर यश शर्मा को ₹6,000 की रिश्वत के मामले में भी गिरफ्तार किया था।
मेरठ में सीबीआई की यह लगातार दूसरी बड़ी भ्रष्टाचार-रोधी कार्रवाई है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 29 मई 2026 को मेरठ छावनी बोर्ड के मनोनीत सदस्य सतीश कुमार शर्मा को ₹3 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई एजेंसी द्वारा बिछाए गए जाल के तहत की गई, जिसमें आरोपी को गांधी बाग, मेरठ कैंट क्षेत्र में टेंडर संबंधी सुविधा के बदले रिश्वत मांगते और लेते पकड़ा गया।

मामले का मूल घटनाक्रम

जांच एजेंसी के अनुसार, सतीश कुमार शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने गांधी बाग, मेरठ कैंट में पार्किंग, कैंटीन और प्रवेश शुल्क के टेंडर को निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए शिकायतकर्ता से ₹3,00,000 की रिश्वत की मांग की थी। यह टेंडर शिकायतकर्ता की माँ द्वारा संचालित एक निजी फर्म को आवंटित था।

सीबीआई ने 29 मई को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की और उसी दिन जाल बिछाकर आरोपी को शिकायतकर्ता से रिश्वत की रकम मांगते और स्वीकार करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। जांचकर्ताओं के अनुसार मामले की जांच अभी जारी है।

न्यायालय में पेशी

गिरफ्तारी के बाद सतीश कुमार शर्मा को गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश की सक्षम अदालत में पेश किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि इस संबंध में और विवरण की प्रतीक्षा है।

मेरठ में सीबीआई की हालिया कार्रवाइयाँ

गौरतलब है कि यह मेरठ में सीबीआई की हाल की दूसरी बड़ी भ्रष्टाचार-रोधी कार्रवाई है। इसी महीने की शुरुआत में एजेंसी ने सीजीएसटी मेरठ, रेंज-I के अधीक्षक संजय मीणा और उनके कार्यालय में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर यश शर्मा को ₹6,000 की रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया था।

उस मामले में आरोप था कि यश शर्मा ने शिकायतकर्ता को जारी 'कारण बताओ नोटिस' को रद्द कराने के लिए अधीक्षक संजय मीणा की ओर से रिश्वत की मांग की थी। सीबीआई के जाल में दोनों रंगे हाथों पकड़े गए और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब सीबीआई ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार के मामलों पर अपनी पकड़ मजबूत की है। छावनी बोर्ड जैसी अर्ध-सैन्य नागरिक संस्थाओं में भ्रष्टाचार के मामले राष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय रहे हैं। आगे की जांच में अन्य संलिप्तताओं की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ये छिटपुट गिरफ्तारियाँ प्रणालीगत बदलाव लाएंगी। छावनी बोर्डों में टेंडर आवंटन की निगरानी के लिए स्वतंत्र तंत्र की अनुपस्थिति इस तरह के मामलों की पुनरावृत्ति की जड़ में है।
RashtraPress
16 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई ने मेरठ कैंट बोर्ड के किस सदस्य को गिरफ्तार किया?
सीबीआई ने मेरठ छावनी बोर्ड के मनोनीत सदस्य सतीश कुमार शर्मा को 29 मई 2026 को ₹3 लाख की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी एजेंसी द्वारा बिछाए गए जाल के तहत हुई।
मेरठ कैंट बोर्ड रिश्वत मामले में आरोप क्या है?
आरोप है कि सतीश कुमार शर्मा ने गांधी बाग, मेरठ कैंट में पार्किंग, कैंटीन और प्रवेश शुल्क के टेंडर को निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए शिकायतकर्ता की माँ की निजी फर्म से ₹3,00,000 की रिश्वत माँगी थी।
गिरफ्तार आरोपी को किस अदालत में पेश किया जा रहा है?
सतीश कुमार शर्मा को गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश की सक्षम अदालत में पेश किया जा रहा है। मामले की जांच अभी जारी है और आगे की जानकारी का इंतजार है।
मेरठ में सीबीआई की इस महीने और कौन-सी कार्रवाई हुई?
इसी महीने की शुरुआत में सीबीआई ने सीजीएसटी मेरठ, रेंज-I के अधीक्षक संजय मीणा और कंप्यूटर ऑपरेटर यश शर्मा को ₹6,000 की रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया था। उन पर आरोप था कि 'कारण बताओ नोटिस' रद्द कराने के लिए रिश्वत माँगी गई थी।
छावनी बोर्ड में भ्रष्टाचार के मामले क्यों सामने आते हैं?
छावनी बोर्ड अर्ध-सैन्य नागरिक संस्थाएँ हैं जहाँ टेंडर और सार्वजनिक सुविधाओं के आवंटन में पारदर्शिता की कमी अक्सर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है। स्वतंत्र निगरानी तंत्र की अनुपस्थिति इस समस्या की मुख्य वजह मानी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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