सीबीआई ने मेरठ कैंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य को ₹3 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 29 मई 2026 को उत्तर प्रदेश के मेरठ कैंटोनमेंट बोर्ड के एक मनोनीत सदस्य को ₹3 लाख की अवैध रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई 30 मई 2026 को सार्वजनिक हुई, जबकि मामले में प्रारंभिक एफआईआर एक दिन पूर्व 29 मई को दर्ज की गई थी। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को गाजियाबाद स्थित सक्षम न्यायालय में पेश किया जा रहा है।
मामले की पृष्ठभूमि
सीबीआई के अनुसार यह प्रकरण मेरठ कैंट क्षेत्र के गांधी बाग से जुड़ा है, जहाँ पार्किंग, कैंटीन और प्रवेश शुल्क वसूली से संबंधित एक टेंडर प्रक्रिया चल रही थी। यह टेंडर एक निजी फर्म को आवंटित किया गया था, जिसका संचालन शिकायतकर्ता अपनी माँ की ओर से देख रहा था।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कैंटोनमेंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य लगातार दबाव बना रहे थे और टेंडर को बिना किसी रुकावट के जारी रखने के एवज में ₹3 लाख की अवैध राशि की माँग कर रहे थे। इस शिकायत के आधार पर सीबीआई ने जाँच शुरू कर आरोपों की पुष्टि के लिए एक सुनियोजित रणनीति तैयार की।
सीबीआई का जाल और गिरफ्तारी
29 मई 2026 को सीबीआई ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया। आरोपी को ठीक उस समय पकड़ा गया जब वह शिकायतकर्ता से ₹3 लाख की राशि स्वीकार कर रहा था। गिरफ्तारी के तत्काल बाद आरोपी को हिरासत में ले लिया गया और उसके खिलाफ विधिवत मामला दर्ज किया गया।
जाँच का दायरा
सीबीआई अधिकारियों के अनुसार मामले की विस्तृत जाँच जारी है। अधिकारी यह भी पता लगा रहे हैं कि इस प्रकरण में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता है या नहीं, और क्या यह भ्रष्टाचार का कोई बड़ा नेटवर्क है। गौरतलब है कि कैंटोनमेंट बोर्डों में टेंडर प्रक्रियाओं से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं।
प्रशासनिक हलकों में हलचल
इस गिरफ्तारी के बाद मेरठ कैंटोनमेंट बोर्ड से जुड़े प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और आगे की कार्रवाई न्यायालय के समक्ष जाँच रिपोर्ट पेश होने के बाद तय होगी।