15 जुलाई 2026
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सीबीआई ने मेरठ कैंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य को ₹3 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचा

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सीबीआई ने मेरठ कैंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य को ₹3 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचा

सारांश

सीबीआई ने मेरठ कैंटोनमेंट बोर्ड के एक मनोनीत सदस्य को गांधी बाग टेंडर के बदले ₹3 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचा। यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के उस नेटवर्क की पड़ताल की शुरुआत है, जो कथित तौर पर कैंट बोर्ड की टेंडर प्रक्रियाओं में गहरी जड़ें जमाए हो सकता है।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 29 मई 2026 को मेरठ कैंटोनमेंट बोर्ड के एक मनोनीत सदस्य को ₹3 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
मामला गांधी बाग क्षेत्र में पार्किंग, कैंटीन और प्रवेश शुल्क वसूली के टेंडर से जुड़ा है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि आरोपी टेंडर संचालन को बाधित न करने के बदले लगातार पैसे की माँग कर रहा था।
आरोपी को गाजियाबाद स्थित सक्षम न्यायालय में पेश किया जा रहा है।
सीबीआई जाँच कर रही है कि क्या इस प्रकरण में कोई बड़ा भ्रष्टाचार नेटवर्क शामिल है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 29 मई 2026 को उत्तर प्रदेश के मेरठ कैंटोनमेंट बोर्ड के एक मनोनीत सदस्य को ₹3 लाख की अवैध रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई 30 मई 2026 को सार्वजनिक हुई, जबकि मामले में प्रारंभिक एफआईआर एक दिन पूर्व 29 मई को दर्ज की गई थी। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को गाजियाबाद स्थित सक्षम न्यायालय में पेश किया जा रहा है।

मामले की पृष्ठभूमि

सीबीआई के अनुसार यह प्रकरण मेरठ कैंट क्षेत्र के गांधी बाग से जुड़ा है, जहाँ पार्किंग, कैंटीन और प्रवेश शुल्क वसूली से संबंधित एक टेंडर प्रक्रिया चल रही थी। यह टेंडर एक निजी फर्म को आवंटित किया गया था, जिसका संचालन शिकायतकर्ता अपनी माँ की ओर से देख रहा था।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कैंटोनमेंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य लगातार दबाव बना रहे थे और टेंडर को बिना किसी रुकावट के जारी रखने के एवज में ₹3 लाख की अवैध राशि की माँग कर रहे थे। इस शिकायत के आधार पर सीबीआई ने जाँच शुरू कर आरोपों की पुष्टि के लिए एक सुनियोजित रणनीति तैयार की।

सीबीआई का जाल और गिरफ्तारी

29 मई 2026 को सीबीआई ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया। आरोपी को ठीक उस समय पकड़ा गया जब वह शिकायतकर्ता से ₹3 लाख की राशि स्वीकार कर रहा था। गिरफ्तारी के तत्काल बाद आरोपी को हिरासत में ले लिया गया और उसके खिलाफ विधिवत मामला दर्ज किया गया।

जाँच का दायरा

सीबीआई अधिकारियों के अनुसार मामले की विस्तृत जाँच जारी है। अधिकारी यह भी पता लगा रहे हैं कि इस प्रकरण में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता है या नहीं, और क्या यह भ्रष्टाचार का कोई बड़ा नेटवर्क है। गौरतलब है कि कैंटोनमेंट बोर्डों में टेंडर प्रक्रियाओं से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं।

प्रशासनिक हलकों में हलचल

इस गिरफ्तारी के बाद मेरठ कैंटोनमेंट बोर्ड से जुड़े प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है। मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है और आगे की कार्रवाई न्यायालय के समक्ष जाँच रिपोर्ट पेश होने के बाद तय होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन रंगे हाथों पकड़े जाने के मामले दुर्लभ हैं। असली सवाल यह है कि क्या यह एकल आरोपी की करतूत है या किसी संगठित नेटवर्क की कड़ी — जिसकी जाँच सीबीआई कर रही है। कैंटोनमेंट बोर्डों पर रक्षा मंत्रालय का नियंत्रण होता है, इसलिए इस मामले के निष्कर्ष केवल स्थानीय प्रशासन तक सीमित नहीं रहेंगे।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई ने मेरठ कैंट बोर्ड सदस्य को किस आरोप में गिरफ्तार किया?
सीबीआई ने मेरठ कैंटोनमेंट बोर्ड के एक मनोनीत सदस्य को ₹3 लाख की अवैध रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोप है कि उसने गांधी बाग क्षेत्र में पार्किंग, कैंटीन और प्रवेश शुल्क वसूली के टेंडर को बाधित न करने के बदले यह राशि माँगी थी।
यह मामला किस टेंडर से जुड़ा है?
यह मामला मेरठ कैंट के गांधी बाग क्षेत्र में पार्किंग, कैंटीन और प्रवेश शुल्क वसूली से संबंधित टेंडर से जुड़ा है। यह टेंडर एक निजी फर्म को दिया गया था, जिसका संचालन शिकायतकर्ता अपनी माँ की ओर से कर रहा था।
गिरफ्तार आरोपी को किस न्यायालय में पेश किया जाएगा?
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को गाजियाबाद स्थित सक्षम न्यायालय में पेश किया जा रहा है। सीबीआई ने उसके खिलाफ विधिवत मामला दर्ज कर लिया है।
क्या इस मामले में और लोग भी शामिल हो सकते हैं?
सीबीआई अधिकारियों के अनुसार जाँच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि इस प्रकरण में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता है या यह भ्रष्टाचार का कोई बड़ा नेटवर्क है।
एफआईआर कब दर्ज की गई और गिरफ्तारी कब हुई?
इस मामले में प्रारंभिक एफआईआर 29 मई 2026 को दर्ज की गई थी और उसी दिन सीबीआई ने जाल बिछाकर आरोपी को रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह कार्रवाई 30 मई को सार्वजनिक हुई।
राष्ट्र प्रेस
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