सीबीआई ने मेरठ सीजीएसटी अधीक्षक संजय मीणा को ₹6,000 रिश्वत मामले में रंगे हाथों गिरफ्तार किया

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सीबीआई ने मेरठ सीजीएसटी अधीक्षक संजय मीणा को ₹6,000 रिश्वत मामले में रंगे हाथों गिरफ्तार किया

सारांश

सीबीआई ने मेरठ के सीजीएसटी कार्यालय में जाल बिछाकर अधीक्षक संजय मीणा और कंप्यूटर ऑपरेटर यश शर्मा को ₹6,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। 'कारण बताओ नोटिस' रद्द कराने के बदले मांगी गई यह रकम जीएसटी विभाग में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों की ओर इशारा करती है।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 7 मई 2025 को सीजीएसटी रेंज-I, मेरठ के अधीक्षक संजय मीणा और कंप्यूटर ऑपरेटर यश शर्मा को गिरफ्तार किया।
आरोप है कि 'कारण बताओ नोटिस' रद्द कराने के बदले ₹6,000 की अवैध रिश्वत मांगी गई।
सीबीआई ने 6 मई 2025 को प्राथमिकी दर्ज कर विशेष टीम गठित की और जाल बिछाया।
कंप्यूटर ऑपरेटर यश शर्मा को रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया।
एजेंसी अवैध वसूली के संभावित बड़े नेटवर्क की जांच कर रही है; आगे और खुलासे संभव।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 7 मई 2025 को भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए सीजीएसटी रेंज-I, मेरठ के अधीक्षक संजय मीणा और उनके कार्यालय के कंप्यूटर ऑपरेटर यश शर्मा को ₹6,000 की अवैध रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया। एजेंसी ने जाल बिछाकर यश शर्मा को शिकायतकर्ता से रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथों पकड़ा, जिसके बाद दोनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया।

मामले की पृष्ठभूमि

सीबीआई सूत्रों के अनुसार, एजेंसी ने 6 मई 2025 को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उसे जारी किए गए 'कारण बताओ नोटिस' को रद्द कराने के बदले में कंप्यूटर ऑपरेटर यश शर्मा ने ₹6,000 की अवैध रिश्वत की मांग की। शिकायत में यह भी स्पष्ट किया गया कि यह रकम वास्तव में अधीक्षक संजय मीणा की ओर से मांगी जा रही थी।

सीबीआई की जाल कार्रवाई

शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने मामले का सत्यापन किया और आरोपों की पुष्टि होने पर एक विशेष टीम गठित की। गुरुवार को बिछाए गए जाल में आरोपी कंप्यूटर ऑपरेटर यश शर्मा को शिकायतकर्ता से रिश्वत की रकम मांगते और स्वीकार करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, यह राशि सीजीएसटी अधीक्षक संजय मीणा की ओर से ली जा रही थी, जिसके बाद दोनों को हिरासत में लिया गया।

पूछताछ और जांच का दायरा

सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि दोनों आरोपियों से विस्तृत पूछताछ की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इस तरह की अवैध वसूली का कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय था। गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब केंद्र सरकार जीएसटी प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर दे रही है।

आगे क्या होगा

सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और खुलासे होने की संभावना है। दोनों आरोपियों को जल्द ही संबंधित न्यायालय में पेश किया जाएगा। यह कार्रवाई जीएसटी विभाग में भ्रष्टाचार के खिलाफ सीबीआई की बढ़ती सक्रियता का संकेत देती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 की रिश्वत की यह रकम भले ही छोटी लगे, लेकिन यह मामला जीएसटी प्रशासन की उस संरचनात्मक कमज़ोरी को उजागर करता है जहाँ 'कारण बताओ नोटिस' जैसे नियामक उपकरण करदाताओं के उत्पीड़न का ज़रिया बन जाते हैं। सीबीआई की जांच का असली महत्व इस बात में है कि क्या यह एकाकी घटना है या किसी बड़े नेटवर्क की कड़ी — जिसका जवाब आने वाले हफ्तों में मिल सकता है। जीएसटी लागू होने के आठ साल बाद भी विभागीय भ्रष्टाचार की ऐसी खबरें बताती हैं कि तकनीकी सुधारों के साथ-साथ जवाबदेही तंत्र को और मज़बूत किए जाने की ज़रूरत है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई ने सीजीएसटी अधीक्षक संजय मीणा को किस मामले में गिरफ्तार किया?
सीबीआई ने संजय मीणा को ₹6,000 की अवैध रिश्वत मामले में गिरफ्तार किया। आरोप है कि शिकायतकर्ता को जारी 'कारण बताओ नोटिस' रद्द कराने के बदले यह रकम मांगी जा रही थी।
इस मामले में कंप्यूटर ऑपरेटर यश शर्मा की क्या भूमिका थी?
यश शर्मा ने अधीक्षक संजय मीणा की ओर से शिकायतकर्ता से ₹6,000 की रिश्वत मांगी और स्वीकार की। सीबीआई ने उन्हें जाल बिछाकर रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
सीबीआई ने इस मामले में एफआईआर कब दर्ज की?
सीबीआई ने 6 मई 2025 को प्राथमिकी दर्ज की और अगले दिन 7 मई को विशेष टीम के ज़रिए जाल बिछाकर गिरफ्तारी की।
क्या इस मामले में और आरोपी हो सकते हैं?
सीबीआई अधिकारियों के अनुसार, एजेंसी यह जांच कर रही है कि क्या अवैध वसूली का कोई बड़ा नेटवर्क सक्रिय था। आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
सीजीएसटी कार्यालय में 'कारण बताओ नोटिस' क्या होता है?
'कारण बताओ नोटिस' एक आधिकारिक नोटिस होता है जो जीएसटी विभाग किसी करदाता को कर चूक या अनियमितता के संदेह में जारी करता है। इसे रद्द कराने के लिए रिश्वत मांगना गंभीर भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है।
राष्ट्र प्रेस
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