सीबीआई ने WCL अधिकारी को ₹40,000 रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा, पीरवा गांव पुनर्वास परियोजना में भ्रष्टाचार उजागर
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 30 सितंबर 2026 को वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) के एक वरिष्ठ ओवरसियर (सिविल) को ₹40,000 की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपी अधिकारी WCL के उमरेड क्षेत्र के गोकुल मुरपार उपक्षेत्र में तैनात था और उस पर ₹25,35,693 के अनुबंध बिल के भुगतान को जारी करने के बदले रिश्वत माँगने का आरोप है।
मामले का पूरा घटनाक्रम
सीबीआई के अनुसार, शिकायतकर्ता को WCL द्वारा पीरवा गांव के पुनर्वास स्थल पर पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक ठेका दिया गया था। इस ठेके के तहत दो बोरवेल का निर्माण, सबमर्सिबल पंपों की स्थापना, आंतरिक मुख्य लाइन और वितरण पाइपलाइन बिछाने का काम शामिल था।
शिकायत के अनुसार, आरोपी वरिष्ठ ओवरसियर ने तीसरे बिल का भुगतान जारी करने के लिए ₹25,35,693 के कुल बिल का दो प्रतिशत अर्थात ₹50,000 की रिश्वत की माँग की थी।
जाल और गिरफ्तारी
शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने 30 सितंबर 2026 को मामला दर्ज कर उसी दिन जाल बिछाया। जाँच दल ने आरोपी अधिकारी को ₹40,000 की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथों पकड़ा। रिश्वत की राशि बरामद करने के बाद उसे विधिवत हिरासत में ले लिया गया।
गौरतलब है कि माँगी गई रकम ₹50,000 थी, जबकि जाल में ₹40,000 की राशि स्वीकार करते हुए पकड़ा गया। अधिकारियों के अनुसार, सक्षम न्यायालय में पेशी सहित आवश्यक कानूनी औपचारिकताएँ प्रक्रिया के अनुसार पूरी की जा रही हैं।
भ्रष्टाचार का व्यापक संदर्भ
सीबीआई ने कहा है कि यह मामला पुनर्वास और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े विकास कार्यों के भुगतान की प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार को उजागर करता है। यह ऐसे समय में आया है जब कोयला क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। WCL, जो कोल इंडिया लिमिटेड की सहायक कंपनी है, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में कोयला खनन संचालन करती है।
आलोचकों का कहना है कि पुनर्वास परियोजनाओं में भ्रष्टाचार विशेष रूप से गंभीर है क्योंकि इससे विस्थापित ग्रामीणों की बुनियादी सुविधाएँ — जैसे पेयजल — सीधे प्रभावित होती हैं।
जाँच की वर्तमान स्थिति
सीबीआई ने पुष्टि की है कि मामले की जाँच जारी है। एजेंसी अतिरिक्त साक्ष्य जुटाने और बयान दर्ज करने में लगी है ताकि कथित अनियमितताओं की पूरी सीमा, आरोपी की भूमिका और मामले से जुड़े अन्य संभावित पहलुओं की पड़ताल की जा सके। आगे की पूछताछ के आधार पर इस प्रकरण का दायरा बढ़ सकता है।