सीबीआई का 'ऑपरेशन चक्र-6': गुजरात के ₹11.42 करोड़ डिजिटल अरेस्ट मामले में दो और गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने गुजरात के ₹11.42 करोड़ के 'डिजिटल अरेस्ट' मामले में हिमांशु प्रसाद और यूनिस बिस्वास को गिरफ्तार किया है, जिससे इस मामले में अब तक गिरफ्तार आरोपियों की संख्या में इज़ाफा हुआ है। एजेंसी ने 27 सितंबर 2026 को बताया कि यह कार्रवाई 'ऑपरेशन चक्र-6' के तहत देशभर में चल रही उस मुहिम का हिस्सा है जो डिजिटल अरेस्ट से जुड़े सिंडिकेट्स को नेस्तनाबूद करने के लिए जारी है।
मामले की पृष्ठभूमि
जांच के अनुसार, पीड़ित को कथित तौर पर तीन महीने तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा गया था। साइबर अपराधियों ने पुलिस और भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) के अधिकारी बनकर पीड़ित को ₹11.42 करोड़ ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया। गौरतलब है कि 'डिजिटल अरेस्ट' एक ऐसी साइबर ठगी है जिसमें अपराधी फर्जी सरकारी अधिकारी बनकर वीडियो कॉल के ज़रिए पीड़ित को मनोवैज्ञानिक दबाव में रखते हैं।
आरोपियों की भूमिका
सीबीआई जांच में सामने आया कि हिमांशु प्रसाद और यूनिस बिस्वास ने कथित तौर पर एक कंपनी के बैंक खाते का इस्तेमाल पीड़ित से ठगे गए ₹11.42 करोड़ में से ₹2.5 करोड़ प्राप्त करने के लिए किया। दोनों ने मनी ट्रेल को छिपाने के इरादे से इन फंड्स को साथियों के कई खातों में ट्रांसफर किया। जांचकर्ताओं के अनुसार, ये आरोपी धोखाधड़ी से कमाए गए पैसे को निकालने के लिए बैंक खातों का दुरुपयोग करने और एपीके फाइलें इंस्टॉल करने में भी शामिल थे।
उनके पास से ज़ब्त डिजिटल डिवाइस में कई चैट, मैसेज और दस्तावेज़ मिले हैं, जो जांच के अनुसार अपराध में उनकी भूमिका प्रमाणित करते हैं। इन सबूतों की फोरेंसिक जांच जारी है।
ऑपरेशन चक्र-6: व्यापक कार्रवाई
सीबीआई ने 'ऑपरेशन चक्र-6' के तहत 10 राज्यों में 22 जगहों पर एक साथ तलाशी ली। एजेंसी के अनुसार, पिछले 30 दिनों में चार अलग-अलग 'डिजिटल अरेस्ट' मामलों में 22 राज्यों में 142 जगहों पर छापेमारी की गई और 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इन छापों के दौरान आपत्तिजनक बैंकिंग दस्तावेज, खाते से संबंधित रिकॉर्ड और डिजिटल डिवाइस ज़ब्त किए गए।
जांच का दायरा और आगे की राह
सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि मनी ट्रेल के विस्तृत वित्तीय और तकनीकी विश्लेषण के आधार पर यह तलाशी की गई। एजेंसी का लक्ष्य राज्यों की सीमाओं के पार चल रहे डिजिटल अरेस्ट सिंडिकेट्स के बड़े वित्तीय और तकनीकी ढाँचे का पूरी तरह से पर्दाफाश करना है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में डिजिटल अरेस्ट के मामलों में तेज़ी आई है और सरकार साइबर ठगी के विरुद्ध अपनी कार्रवाई को व्यापक बना रही है। जांच में और आरोपियों के सामने आने की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।