विश्व शांति दिवस पर चंडीगढ़ के सुखना लेक पर 'पीस वॉक', मूक-बधिर बच्चों ने भी लिया हिस्सा
सारांश
मुख्य बातें
21 सितंबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस के अवसर पर चंडीगढ़ की प्रसिद्ध सुखना लेक पर एक विशेष 'पीस वॉक' का आयोजन किया गया, जिसमें मूक-बधिर बच्चों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। विभिन्न युवा एवं शांति संगठनों द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में चीफ इंजीनियर सी.बी. ओझा ने शिरकत की और कहा कि आज के दौर में शांति का संदेश फैलाना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम का स्वरूप और भागीदारी
सुखना लेक के किनारे आयोजित इस पीस वॉकथॉन में विभिन्न संगठनों के युवा सदस्यों के साथ-साथ मूक-बधिर बच्चों को विशेष रूप से शामिल किया गया। आयोजकों का उद्देश्य था कि शांति का संदेश समाज के हर वर्ग तक पहुँचे और दिव्यांग बच्चों को भी सामाजिक गतिविधियों में समान अवसर मिले। यह आयोजन शहर में अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस की प्रमुख गतिविधियों में से एक रहा।
सी.बी. ओझा का संदेश — आंतरिक शांति की पहचान ज़रूरी
चीफ इंजीनियर सी.बी. ओझा ने कार्यक्रम में कहा, 'आज अलग-अलग संगठनों, युवा संगठनों और शांति संगठनों की ओर से आयोजित पीस वॉक या पीस वॉकथॉन बहुत ही सराहनीय है। आज के समय में हमें शांति का संदेश फैलाना चाहिए और लोगों को जागरूक करना चाहिए कि आंतरिक शांति हमारे भीतर ही होती है, लेकिन हम उसे पहचानते नहीं हैं या उस पर अमल नहीं करते हैं।'
ओझा ने मूक-बधिर बच्चों की भागीदारी को विशेष महत्त्व देते हुए कहा, 'पीस वॉक में मूक-बधिर बच्चों को शामिल करने का मकसद है कि वे हमारे समाज का हिस्सा हैं। कई बार लगता है कि ऐसे बच्चों को समाज दरकिनार कर रहा है। मूक-बधिर बच्चों को ऐसे कार्यक्रमों में शामिल होने से अच्छा लगेगा और उनमें नई ऊर्जा आएगी।' उन्होंने यह भी कहा कि आने वाला समय युवाओं का है और युवा पीढ़ी देश का भविष्य है।
अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस की पृष्ठभूमि
दुनियाभर में शांति, अहिंसा और आपसी सहयोग के महत्व को रेखांकित करने के लिए प्रति वर्ष 21 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने 1981 में इस दिवस की स्थापना की थी, और 2001 में 21 सितंबर को इसे स्थायी रूप से अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस के रूप में निर्धारित किया गया। यह दिन वैश्विक स्तर पर संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान और सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर देता है।
समावेशिता का संदेश — दिव्यांग बच्चों की भागीदारी क्यों अहम
इस आयोजन की सबसे उल्लेखनीय विशेषता मूक-बधिर बच्चों की सहभागिता रही। गौरतलब है कि सामाजिक कार्यक्रमों में दिव्यांग बच्चों की भागीदारी अक्सर सीमित रहती है। ऐसे में उन्हें पीस वॉक में शामिल करना समावेशी समाज की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजन दिव्यांग बच्चों के आत्मविश्वास और सामाजिक जुड़ाव को बढ़ाने में सहायक होते हैं।
आगे की राह
इस तरह के आयोजन शांति और समावेशिता के प्रति सामाजिक जागरूकता बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में ऐसे कार्यक्रमों का दायरा और बढ़ेगा तथा अधिक से अधिक युवा एवं दिव्यांग वर्ग इनसे जुड़ेंगे।