21 सितंबर 2026
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विश्व शांति दिवस पर चंडीगढ़ के सुखना लेक पर 'पीस वॉक', मूक-बधिर बच्चों ने भी लिया हिस्सा

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विश्व शांति दिवस पर चंडीगढ़ के सुखना लेक पर 'पीस वॉक', मूक-बधिर बच्चों ने भी लिया हिस्सा

सारांश

विश्व शांति दिवस पर चंडीगढ़ के सुखना लेक पर आयोजित 'पीस वॉक' में मूक-बधिर बच्चों की विशेष भागीदारी रही। चीफ इंजीनियर सी.बी. ओझा ने आंतरिक शांति की पहचान और दिव्यांग बच्चों के सामाजिक समावेश का संदेश दिया।

मुख्य बातें

21 सितंबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस के अवसर पर चंडीगढ़ के सुखना लेक पर 'पीस वॉक' का आयोजन हुआ।
मूक-बधिर बच्चों को विशेष रूप से कार्यक्रम में शामिल किया गया, जो समावेशी समाज की दिशा में सकारात्मक कदम रहा।
ओझा ने कहा कि आंतरिक शांति हमारे भीतर होती है, लेकिन हम उसे पहचानते नहीं।
संयुक्त राष्ट्र ने 1981 में इस दिवस की स्थापना की थी; 2001 से 21 सितंबर स्थायी अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस है।
ओझा ने युवा पीढ़ी को देश का भविष्य बताते हुए उन्हें शांति के संदेशवाहक की भूमिका निभाने का आह्वान किया।

21 सितंबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस के अवसर पर चंडीगढ़ की प्रसिद्ध सुखना लेक पर एक विशेष 'पीस वॉक' का आयोजन किया गया, जिसमें मूक-बधिर बच्चों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। विभिन्न युवा एवं शांति संगठनों द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में चीफ इंजीनियर सी.बी. ओझा ने शिरकत की और कहा कि आज के दौर में शांति का संदेश फैलाना अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम का स्वरूप और भागीदारी

सुखना लेक के किनारे आयोजित इस पीस वॉकथॉन में विभिन्न संगठनों के युवा सदस्यों के साथ-साथ मूक-बधिर बच्चों को विशेष रूप से शामिल किया गया। आयोजकों का उद्देश्य था कि शांति का संदेश समाज के हर वर्ग तक पहुँचे और दिव्यांग बच्चों को भी सामाजिक गतिविधियों में समान अवसर मिले। यह आयोजन शहर में अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस की प्रमुख गतिविधियों में से एक रहा।

सी.बी. ओझा का संदेश — आंतरिक शांति की पहचान ज़रूरी

चीफ इंजीनियर सी.बी. ओझा ने कार्यक्रम में कहा, 'आज अलग-अलग संगठनों, युवा संगठनों और शांति संगठनों की ओर से आयोजित पीस वॉक या पीस वॉकथॉन बहुत ही सराहनीय है। आज के समय में हमें शांति का संदेश फैलाना चाहिए और लोगों को जागरूक करना चाहिए कि आंतरिक शांति हमारे भीतर ही होती है, लेकिन हम उसे पहचानते नहीं हैं या उस पर अमल नहीं करते हैं।'

ओझा ने मूक-बधिर बच्चों की भागीदारी को विशेष महत्त्व देते हुए कहा, 'पीस वॉक में मूक-बधिर बच्चों को शामिल करने का मकसद है कि वे हमारे समाज का हिस्सा हैं। कई बार लगता है कि ऐसे बच्चों को समाज दरकिनार कर रहा है। मूक-बधिर बच्चों को ऐसे कार्यक्रमों में शामिल होने से अच्छा लगेगा और उनमें नई ऊर्जा आएगी।' उन्होंने यह भी कहा कि आने वाला समय युवाओं का है और युवा पीढ़ी देश का भविष्य है।

अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस की पृष्ठभूमि

दुनियाभर में शांति, अहिंसा और आपसी सहयोग के महत्व को रेखांकित करने के लिए प्रति वर्ष 21 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने 1981 में इस दिवस की स्थापना की थी, और 2001 में 21 सितंबर को इसे स्थायी रूप से अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस के रूप में निर्धारित किया गया। यह दिन वैश्विक स्तर पर संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान और सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहराने का अवसर देता है।

समावेशिता का संदेश — दिव्यांग बच्चों की भागीदारी क्यों अहम

इस आयोजन की सबसे उल्लेखनीय विशेषता मूक-बधिर बच्चों की सहभागिता रही। गौरतलब है कि सामाजिक कार्यक्रमों में दिव्यांग बच्चों की भागीदारी अक्सर सीमित रहती है। ऐसे में उन्हें पीस वॉक में शामिल करना समावेशी समाज की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजन दिव्यांग बच्चों के आत्मविश्वास और सामाजिक जुड़ाव को बढ़ाने में सहायक होते हैं।

आगे की राह

इस तरह के आयोजन शांति और समावेशिता के प्रति सामाजिक जागरूकता बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में ऐसे कार्यक्रमों का दायरा और बढ़ेगा तथा अधिक से अधिक युवा एवं दिव्यांग वर्ग इनसे जुड़ेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ऐसे एक-दिवसीय आयोजन मूक-बधिर बच्चों के दीर्घकालिक सामाजिक समावेश की नीति से जुड़े हैं? शांति दिवस पर संदेश देना पर्याप्त नहीं — ज़रूरत है कि दिव्यांग बच्चों के लिए शिक्षा, अवसर और सामाजिक भागीदारी सुनिश्चित करने की व्यवस्थागत प्रतिबद्धता भी दिखे। इस तरह के आयोजन तब अधिक अर्थपूर्ण होते हैं जब ये केवल प्रतीकात्मक न रहकर नीतिगत बदलाव का हिस्सा बनें।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चंडीगढ़ में विश्व शांति दिवस पर 'पीस वॉक' कहाँ और कब हुई?
यह पीस वॉक 21 सितंबर 2026 को चंडीगढ़ के सुखना लेक पर आयोजित की गई। इसमें विभिन्न युवा एवं शांति संगठनों ने भाग लिया और मूक-बधिर बच्चों को विशेष रूप से शामिल किया गया।
पीस वॉक में मूक-बधिर बच्चों को क्यों शामिल किया गया?
चीफ इंजीनियर सी.बी. ओझा के अनुसार, मूक-बधिर बच्चे समाज का अभिन्न हिस्सा हैं और उन्हें अक्सर सामाजिक कार्यक्रमों में नज़रअंदाज़ किया जाता है। उनकी भागीदारी से समाज में समावेशिता और सकारात्मकता का संदेश जाता है।
अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस कब और क्यों मनाया जाता है?
हर साल 21 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र ने 1981 में इसकी स्थापना की थी और 2001 से इसे 21 सितंबर को स्थायी रूप से मनाया जा रहा है। इसका उद्देश्य वैश्विक शांति, अहिंसा और आपसी सहयोग को बढ़ावा देना है।
सी.बी. ओझा ने शांति को लेकर क्या कहा?
चीफ इंजीनियर सी.बी. ओझा ने कहा कि आंतरिक शांति हमारे भीतर ही होती है, लेकिन हम उसे पहचानते या उस पर अमल नहीं करते। उन्होंने युवाओं को शांति का संदेशवाहक बनने और दिव्यांग बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का आह्वान किया।
इस पीस वॉक का आयोजन किसने किया?
यह पीस वॉकथॉन विभिन्न युवा संगठनों और शांति संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की गई। आयोजन स्थल चंडीगढ़ का प्रसिद्ध सुखना लेक था।
राष्ट्र प्रेस
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