युवा धर्म संसद उज्जैन: आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण बोले — सफलता के बाद भी शांति नहीं, संवाद ज़रूरी
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन में 18 सितंबर 2026 को आयोजित युवा धर्म संसद में सेवाज्ञ संस्थानम के संरक्षक आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण महाराज ने कहा कि आज का युवा सफलता की अंधी दौड़ में शांति खो रहा है और इसीलिए धर्म संसद जैसे संवाद-मंचों की निरंतर ज़रूरत है। इस एक दिवसीय आयोजन में विभिन्न आध्यात्मिक व सामाजिक विषयों पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
युवाओं में सफलता और शांति का संकट
मीडिया से बातचीत में आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण ने कहा कि एक अच्छा जीवन बनाने का दबाव आज इतना बढ़ गया है कि युवाओं के लिए अपनी प्राथमिकताएँ तय करना कठिन हो गया है। उनके अनुसार युवाओं में यह सोच घर कर गई है कि किसी भी तरह सफल होना है, परंतु सफलता हासिल होने के बाद भी उन्हें मानसिक शांति नहीं मिलती। उन्होंने कहा, 'यदि किसी नाजायज़ तरीके से कोई सिद्धि प्राप्त की है, तो वह आपको सिद्ध नहीं बनने देती।'
संतुलन और स्वभाव पर ज़ोर
आचार्य ने व्यावहारिक उदाहरणों के ज़रिये समझाया कि हर परिस्थिति में संतुलन बनाए रखने के लिए पहले स्वयं को स्थिर करना होगा। उनके शब्दों में, 'अगर हमें कोई वज़न उठाना है तो पहले खुद को स्थिर करना होगा; अगर किसी चीज़ को धक्का देकर दूर ले जाना है, तो पाँव ज़मीन पर मज़बूती से जमे होने चाहिए।' उन्होंने यह भी कहा कि व्यक्ति को प्रभाव के बजाय अपने स्वभाव में जीने योग्य बनना चाहिए।
परंपरा और आधुनिकता में कोई टकराव नहीं
आचार्य ने स्पष्ट किया कि परंपरा, प्राचीनता और आधुनिकता के बीच कोई वास्तविक अंतर या टकराव नहीं है। उनके अनुसार जब हम किसी एक विचार पर अत्यधिक ध्यान केंद्रित करते हैं, तो शेष सब कुछ उसके विपरीत प्रतीत होने लगता है। उन्होंने कहा कि हम किसी चीज़ को तब तक नापसंद नहीं कर सकते जब तक कि हम किसी दूसरी चीज़ को अत्यधिक पसंद न करने लगें।
भारतीय दृष्टि: मूल्यवान जीवन बनाम कीमत चुकाना
आचार्य मिथिलेश नंदिनी शरण महाराज ने कहा कि युवाओं को केवल 'कीमत चुकाकर चीज़ें खरीदने' की सोच से आगे बढ़कर अपने जीवन को मूल्यवान बनाने की समझ विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की दृष्टि यह है कि जीवन में मूल्यों का भाव कार्यों, आचरण, विश्वासों और जीने के तरीके में दिखाई दे। उनके अनुसार धर्म का अर्थ ऐसा विकास नहीं है जिसमें एक व्यक्ति का उत्थान दूसरे के लिए दबाव या पतन का कारण बने।
आचार्य महामंडलेश्वर का संदेश
आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि ने भी इस अवसर पर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि अब हरियाणा के विद्यालयों में गीता पढ़ाई जाएगी और वंदे मातरम् के सभी छंद गाने का कानून भी बना है। उन्होंने युवा धर्म संसद जैसे आयोजनों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया। यह कार्यक्रम इस बात का संकेत है कि सांस्कृतिक व आध्यात्मिक संवाद के मंच आने वाले समय में और अधिक प्रासंगिक होते जाएँगे।