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शारदीय नवरात्रि 2026: धमतरी के सिहावा स्थित शीतला शक्तिपीठ में उमड़ी हजारों श्रद्धालुओं की भीड़

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शारदीय नवरात्रि 2026: धमतरी के सिहावा स्थित शीतला शक्तिपीठ में उमड़ी हजारों श्रद्धालुओं की भीड़

सारांश

छत्तीसगढ़ के सिहावा स्थित स्वयंभू शीतला शक्तिपीठ में शारदीय नवरात्रि 2026 पर हजारों श्रद्धालु उमड़ रहे हैं। यहाँ की अनूठी मान्यता है कि माँ सफेद पुष्प और चावल गिराकर भक्तों को आशीर्वाद देती हैं — ओडिशा, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों से भक्त संतान प्राप्ति और मनोकामना पूर्ति के लिए पहुँचते हैं।

मुख्य बातें

धमतरी जिले के सिहावा स्थित मां शीतला शक्तिपीठ में शारदीय नवरात्रि 2026 पर हजारों श्रद्धालु पहुँच रहे हैं।
स्थानीय मान्यता के अनुसार माँ सफेद पुष्प और चावल मस्तक से नीचे गिराकर भक्तों को आशीर्वाद देती हैं।
ओडिशा और महाराष्ट्र समेत देशभर के कई राज्यों से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँच रहे हैं।
श्रद्धालु शैलेंद्र कुमार कौशल ने बताया कि वे 22 वर्षों से यहाँ ज्योति जलाते आ रहे हैं।
मंदिर प्रबंधन प्रतिदिन भक्तों को भोजन प्रसादी वितरित कर रहा है।
यह शक्तिपीठ स्वयंभू मानी जाती है और सिहावा क्षेत्र के लोग इसे माता सीता का स्वरूप मानते हैं।

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के सिहावा स्थित प्राचीन स्वयंभू मां शीतला शक्तिपीठ में शारदीय नवरात्रि 2026 के पावन अवसर पर हजारों श्रद्धालुओं की अपार आस्था और भक्ति का संगम देखने को मिल रहा है। देश के विभिन्न राज्यों — ओडिशा, महाराष्ट्र और अन्य प्रांतों — से भक्त माता के दर्शन और आशीर्वाद के लिए यहाँ पहुँच रहे हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह शक्तिपीठ स्वयंभू रूप में प्रकट हुई है, जो इसे समूचे क्षेत्र में विशिष्ट धार्मिक महत्व प्रदान करती है।

मुख्य आस्था और अनूठी मान्यता

श्रद्धालुओं के बीच सबसे चर्चित मान्यता यह है कि माँ शीतला अपने मस्तक पर चढ़ाए गए सफेद पुष्प और चावल नीचे गिराकर भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। ज्योत पुजारी नारायण प्रसाद पाठक ने बताया कि 'मां भगवती शीतला हर गांव में हैं, लेकिन सिहावा की माता स्वयंभू हैं। मां की महिमा है कि वह चावल से आशीर्वाद देती हैं। यहाँ से कोई खाली हाथ नहीं जाता है।'

सिहावा क्षेत्र के लोग मां शीतला को माता सीता का स्वरूप मानते हैं और विशेष श्रद्धा के साथ उनकी पूजा करते हैं। संतान सुख की कामना लेकर हर वर्ष हजारों दंपति इस शक्तिपीठ में पहुँचते हैं।

नवरात्रि उत्सव का आयोजन

मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं द्वारा मनोकामना ज्योति (जोत) प्रज्ज्वलित की गई है। नवरात्रि के दौरान विशेष धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जा रहा है। मंदिर प्रबंधन की ओर से प्रतिदिन श्रद्धालुओं को भोजन प्रसादी भी वितरित की जा रही है।

गौरतलब है कि नवरात्रि के नौ दिनों में यहाँ का वातावरण जयकारों और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत रहता है। मंदिर के चारों ओर भक्तों की लंबी कतारें सुबह से रात तक लगी रहती हैं।

श्रद्धालुओं के अनुभव

करीब 22 वर्षों से शीतला शक्तिपीठ में ज्योति प्रज्ज्वलित करते आ रहे श्रद्धालु शैलेंद्र कुमार कौशल ने बताया कि 'मां भगवती हमारी सारी इच्छाओं को पूरा करती हैं। माता शीतला सिहावा गढ़ की देवी हैं। इनकी महिमा इतनी अधिक है कि कई राज्यों से लोग दर्शन के लिए यहाँ आते हैं। मां हर दुखियारे की मनोकामना पूरी करती हैं — विवाह और नौकरी जैसी समस्याओं का समाधान माता रानी जरूर करती हैं।'

पुजारी ज्ञान सागर के हवाले से श्रद्धालु तुका राम ने बताया कि जब भक्त अपनी समस्या लेकर आते हैं तो माता रानी से याचना की जाती है, और माता मस्तक पर चढ़ाए गए सफेद फूल और चावल नीचे गिराकर आशीर्वाद देती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कई ऐसे भक्त आए हैं जिनके घर में संतान नहीं थी और माता रानी ने उनकी गोद भरी है।

क्षेत्रीय और सांस्कृतिक महत्व

यह शक्तिपीठ केवल धमतरी और आसपास के जिलों तक सीमित नहीं है — ओडिशा, महाराष्ट्र समेत देश के दूरदराज हिस्सों से भी श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार मां शीतला का प्राकट्य स्वयंभू रूप में हुआ था, जिसके कारण इस पीठ का पूरे क्षेत्र में अलग आध्यात्मिक स्थान है।

जीवन की समस्याओं के समाधान, परिवार की सुख-समृद्धि और किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले भक्त माता के चरणों में अपनी अर्जी लगाते हैं — यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है।

आगे की संभावना

नवरात्रि के शेष दिनों में भी श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि की संभावना है। मंदिर प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन द्वारा भक्तों की सुविधा और सुरक्षा के समुचित प्रबंध किए गए हैं। मां शीतला शक्तिपीठ की यह अनूठी आस्था आने वाली पीढ़ियों तक इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत रखती रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो सांख्यिकीय डेटा नहीं बल्कि सामूहिक अनुभव पर टिकी है। यह भी उल्लेखनीय है कि ओडिशा और महाराष्ट्र जैसे दूर के राज्यों से श्रद्धालुओं का आना इस तीर्थ की क्षेत्रीय सीमाओं से परे प्रासंगिकता को रेखांकित करता है — जो छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक भूगोल की एक कम चर्चित पहलू है।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मां शीतला शक्तिपीठ सिहावा कहाँ स्थित है?
मां शीतला शक्तिपीठ छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के सिहावा क्षेत्र में स्थित है। यह एक प्राचीन स्वयंभू शक्तिपीठ है, जिसे सिहावा गढ़ की देवी के रूप में पूजा जाता है।
मां शीतला शक्तिपीठ की अनूठी मान्यता क्या है?
स्थानीय मान्यता के अनुसार माँ शीतला अपने मस्तक पर चढ़ाए गए सफेद पुष्प और चावल नीचे गिराकर भक्तों को आशीर्वाद देती हैं। यह संकेत माता की कृपा का प्रतीक माना जाता है।
शारदीय नवरात्रि 2026 पर सिहावा में क्या विशेष आयोजन हो रहे हैं?
नवरात्रि 2026 के दौरान मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-अर्चना और मनोकामना ज्योति प्रज्ज्वलन का आयोजन हो रहा है। मंदिर प्रबंधन की ओर से प्रतिदिन भक्तों को भोजन प्रसादी भी वितरित की जा रही है।
क्या केवल छत्तीसगढ़ के लोग यहाँ आते हैं?
नहीं, धमतरी और आसपास के जिलों के अतिरिक्त ओडिशा, महाराष्ट्र समेत देश के अनेक राज्यों से श्रद्धालु मां शीतला के दर्शन के लिए सिहावा पहुँचते हैं। इस शक्तिपीठ की ख्याति एक विस्तृत क्षेत्र में फैली हुई है।
मां शीतला शक्तिपीठ में किस प्रकार की मनोकामनाएं पूरी होती हैं?
श्रद्धालुओं की मान्यता है कि माँ शीतला संतान प्राप्ति, विवाह, नौकरी और जीवन की अन्य समस्याओं का समाधान करती हैं। हर वर्ष हजारों दंपति संतान सुख की कामना लेकर यहाँ आते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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