शनिदेव जयंती पर काशीपुर के शीतला माता मंदिर में नवग्रह हवन, मुस्लिम पिता ने लापता बेटी के लिए माँगी मन्नत
सारांश
मुख्य बातें
काशीपुर (ऊधम सिंह नगर) के प्राचीन श्री शीतला माता मंदिर में 16 मई 2026 को शनिदेव जयंती और शनि मंदिर की 13वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में भव्य धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ। नवग्रह हवन-पूजन, महाआरती और प्रसाद वितरण के इस पर्व में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने शनिदेव महाराज के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना की। इसी आयोजन में एक भावुक दृश्य भी देखने को मिला, जब उत्तर प्रदेश से आए एक मुस्लिम पिता ने अपनी लापता बेटी की सकुशल वापसी के लिए माता के दरबार में अर्जी लगाई।
मुख्य धार्मिक आयोजन
कार्यक्रम की शुरुआत शनिवार सुबह 10 बजे शनिदेव के रुद्राभिषेक से हुई। मंदिर के पीठाधीश एवं प्रबंधक पं. संदीप मिश्रा ने विधि-विधान के साथ तेल महाभिषेक, महास्नान, हवन-पूजन और महाआरती संपन्न कराई। इसके उपरांत श्रद्धालुओं में प्रसाद और खिचड़ी भंडारे का वितरण किया गया।
हवन के मुख्य यजमान के रूप में ज्योति मेहरोत्रा-मनोज मेहरोत्रा और प्रीति सिंह-तीरथ सिंह उपस्थित रहे। पीठाधीश पं. संदीप मिश्रा ने बताया कि सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी और कन्याओं को भोजन कराया गया।
भावुक दृश्य: मुस्लिम पिता की मन्नत
आयोजन के दौरान मंदिर परिसर में उस समय एक भावपूर्ण माहौल बन गया जब उत्तर प्रदेश से आए अब्दुल शकूर ने माता के दरबार में अपनी लापता बेटी की सकुशल बरामदगी के लिए अर्जी लगाई और मन्नत माँगी। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में बताया, 'मुझे जानकारी हुई कि गुम बच्चे का यहाँ पता लग जाता है, इसलिए मैं यहाँ अर्जी देने आया था।'
अब्दुल शकूर के अनुसार उनकी बेटी 27 फरवरी से लापता है और तब से लगातार खोजबीन के बावजूद कोई सुराग नहीं मिल सका है। उन्होंने कहा, 'बेटी अभी नहीं मिली है, उसकी जानकारी के लिए मैंने यहाँ अर्जी लगाई है।' यह दृश्य उपस्थित श्रद्धालुओं को भावुक कर गया और आस्था की सांप्रदायिक सीमाओं से परे एकता का संदेश दिया।
मंदिर का महत्व और पृष्ठभूमि
काशीपुर स्थित प्राचीन श्री शीतला माता मंदिर क्षेत्र में आस्था का प्रमुख केंद्र है। इस वर्ष शनि मंदिर की 13वीं वर्षगांठ भी एक साथ मनाई गई, जिससे आयोजन का महत्व और बढ़ गया। पं. संदीप मिश्रा ने बताया कि प्रतिवर्ष शनिदेव जयंती पर यहाँ विशेष धार्मिक अनुष्ठान होते हैं और दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं।
श्रद्धालुओं का उत्साह
पीठाधीश पं. संदीप मिश्रा के अनुसार इस बार आयोजन में भक्तों का उत्साह विशेष रूप से देखने को मिला। उन्होंने कहा, 'सभी भक्त सेवा कर रहे हैं और सुबह से ही भारी भीड़ है।' यह आयोजन धार्मिक सद्भाव और सामूहिक आस्था का प्रतीक बना, जहाँ विभिन्न समुदायों के लोग एकजुट हुए।
आगामी वर्षों में भी इस मंदिर में इसी प्रकार के भव्य आयोजनों की परंपरा जारी रहने की संभावना है, जो क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक एकता को और मजबूत करेगी।