मां चिल्ठा देवी मंदिर, कपकोट: नवरात्रि में भव्य मेला और हिमालय के अद्भुत दृश्य
सारांश
मुख्य बातें
बागेश्वर जिले के कपकोट क्षेत्र की ऊंची पहाड़ी पर स्थित मां चिल्ठा देवी मंदिर उत्तराखंड की देवभूमि के उन पवित्र धामों में से एक है, जहाँ आस्था और प्रकृति का अनुपम संगम देखने को मिलता है। सुपी गाँव के ऊपर पहाड़ी शिखर के निकट बसा यह मंदिर चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि के दौरान विशेष रूप से श्रद्धालुओं से भरा रहता है, जब यहाँ भव्य मेलों और विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन होता है। स्थानीय मान्यताओं और देवी के अलौकिक महत्त्व ने इस मंदिर को पूरे कुमाऊँ क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है।
मंदिर की स्थिति और प्राकृतिक परिवेश
यह मंदिर कपकोट तहसील के सुदूर सुपी गाँव के ऊपर एक ऊंची पहाड़ी के शिखर के पास स्थित है। चारों ओर बांज और बुरांस के घने जंगल मंदिर परिसर को एक नैसर्गिक आवरण प्रदान करते हैं। मौसम साफ रहने पर यहाँ से नंदा देवी, नंदा कोट, पंचाचूली और पिंडारी ग्लेशियर जैसी भव्य हिमालयी चोटियों के मनोरम दर्शन होते हैं — एक ऐसा दृश्य जो श्रद्धालुओं और पर्यटकों दोनों को सम्मोहित करता है।
देवी का स्वरूप और स्थानीय मान्यताएँ
मां चिल्ठा देवी को आदिशक्ति भगवती का ही एक स्वरूप माना जाता है। स्थानीय लोग इन्हें 'छठ की भगवती' के रूप में पूजते हैं। लोकमान्यता है कि देवी ने यहाँ स्थानीय निवासियों को बाल रूप में दर्शन दिए थे, जो इस स्थान की महिमा को और अलौकिक बनाता है। मान्यता यह भी है कि मां चिल्ठा देवी अपने भक्तों की मनोकामनाएँ पूरी करती हैं और उनकी कृपा से जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
सहायक देवताओं के मंदिर और परिसर
मां चिल्ठा देवी मंदिर के आसपास नाग देवता, दूधाधारी देवता, उहाण देवता, वीरंग देवता और भैरव देवता के छोटे मंदिर तथा पवित्र स्थान भी बने हुए हैं। यह परिसर कुमाऊँनी लोक-धर्म की उस समृद्ध परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है जहाँ एक ही स्थल पर अनेक देवशक्तियों की उपासना की जाती है।
नवरात्रि मेला और श्रद्धालुओं की भीड़
चैत्र नवरात्रि की अष्टमी और शारदीय नवरात्रि के दौरान मंदिर परिसर में भव्य मेलों का आयोजन होता है, जिनमें दूरदराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुँचते हैं। ये मेले केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि क्षेत्रीय संस्कृति, लोकगीत और परंपराओं के जीवंत उत्सव भी हैं।
मुख्यमंत्री धामी की अपील
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स के ज़रिए सभी श्रद्धालुओं और पर्यटकों से इस मंदिर के दर्शन करने की अपील की। उन्होंने लिखा, 'बागेश्वर जिले के कपकोट इलाके की खूबसूरत पहाड़ियों के बीच बसा मां चिल्ठा देवी का पवित्र धाम आस्था, भक्ति और प्रकृति की खूबसूरती का अद्भुत संगम है। देवभूमि की समृद्ध धार्मिक विरासत और उसकी अलौकिक प्राकृतिक सुंदरता को करीब से महसूस करने के लिए बागेश्वर की यात्रा के दौरान मां चिल्ठा देवी के दर्शन जरूर करें।' यह अपील उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की व्यापक पहल का हिस्सा है, जो राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्त्वपूर्ण है।
गौरतलब है कि उत्तराखंड में ऐसे अनेक पहाड़ी मंदिर हैं जो मुख्य धार्मिक सर्किट से दूर होने के कारण अपेक्षाकृत अनजाने रह जाते हैं। मां चिल्ठा देवी मंदिर जैसे स्थलों पर सरकार और सार्वजनिक हस्तियों का ध्यान जाने से इन्हें राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थान मिलने की उम्मीद बढ़ती है।