छिंदवाड़ा: BJP विधायक निवास पर कांग्रेस कार्यकर्ता से मारपीट, नकुलनाथ ने 72 घंटे में कार्रवाई की मांग की
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के अमरवाड़ा क्षेत्र में कांग्रेस कार्यकर्ता बलराम के साथ कथित तौर पर मारपीट की गंभीर घटना सामने आई है। पूर्व सांसद नकुलनाथ ने 19 अक्टूबर 2026 को इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए पुलिस प्रशासन को चेतावनी दी कि 72 घंटे के भीतर दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, अन्यथा यह मामला मुख्यमंत्री और मध्य प्रदेश विधानसभा तक पहुँचाया जाएगा।
मुख्य घटनाक्रम
आरोपों के अनुसार, अमरवाड़ा से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक कमलेश शाह के कर्मचारी नेमा एवं उनके साथियों ने कांग्रेस कार्यकर्ता बलराम को विधायक निवास पर ले जाकर मारपीट की। यह घटना अमरवाड़ा क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई है और पुलिस-प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठा रही है।
गौरतलब है कि भाजपा विधायक कमलेश शाह पहले कांग्रेस पार्टी में थे। उन्होंने 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से पूर्व भाजपा की सदस्यता ग्रहण की और वर्तमान में भाजपा विधायक के रूप में कार्यरत हैं। इस पृष्ठभूमि में हुई यह घटना राजनीतिक रूप से और भी संवेदनशील हो जाती है।
नकुलनाथ की चेतावनी
पूर्व सांसद नकुलनाथ ने इस घटना को 'बेहद गंभीर और निंदनीय' करार देते हुए कहा, 'सत्ता के अहंकार में बैठे लोग यह बात अच्छी तरह समझ लें कि कांग्रेस का कोई भी कार्यकर्ता अकेला नहीं है। पार्टी के हर छोटे-बड़े कार्यकर्ता के सम्मान, सुरक्षा और न्याय की लड़ाई में मैं स्वयं और कांग्रेस पार्टी के सभी साथी पूरी मज़बूती से उसके साथ खड़े हैं।'
उन्होंने आगे कहा, 'हम अन्याय के सामने झुकने वाले नहीं हैं। सत्ता का अहंकार हो या किसी भी तरह की गुंडागर्दी, उसका जवाब ज़रूर दिया जाएगा। कार्यकर्ता का सम्मान सर्वोपरि है। न्याय मिलने तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी।'
आदिवासी अत्याचार का संदर्भ
नकुलनाथ ने इस घटना को केवल एक कार्यकर्ता से मारपीट तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे छिंदवाड़ा जिले में आदिवासी समुदाय पर हो रहे कथित अत्याचारों के व्यापक संदर्भ से जोड़ा। उनका कहना है कि यह घटना जिले में पुलिस और प्रशासन की निष्क्रियता पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। यह ऐसे समय में आई है जब मध्य प्रदेश में आदिवासी अधिकारों और सुरक्षा का मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है।
आगे क्या होगा
नकुलनाथ ने स्पष्ट किया है कि यदि 72 घंटे में पुलिस प्रशासन की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो वे इस मामले को मुख्यमंत्री और मध्य प्रदेश विधानसभा में उठाएंगे। इस मामले में आगे की कानूनी और राजनीतिक हलचल पर सभी की नज़रें टिकी हैं।