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MP शीतकालीन सत्र पर उमंग सिंघार का हमला: 5 दिन में नहीं मिलेंगे जनता के सवालों के जवाब

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MP शीतकालीन सत्र पर उमंग सिंघार का हमला: 5 दिन में नहीं मिलेंगे जनता के सवालों के जवाब

सारांश

मध्य प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र 7 दिसंबर से सिर्फ पाँच दिन का है — और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का आरोप है कि BJP सरकार जहरीली शराब, किसान संकट और बेरोज़गारी जैसे ज्वलंत मुद्दों पर जवाब देने से बच रही है।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र 7 दिसंबर 2026 से शुरू होगा, अवधि मात्र पाँच दिन ।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार जनता के सवालों से भाग रही है।
इससे पहले मानसून सत्र पाँच दिन का था लेकिन तीन दिन में ही समाप्त कर दिया गया।
230 विधानसभा क्षेत्रों के विधायक सात करोड़ नागरिकों की आवाज़ हैं, लेकिन सत्र की अवधि घटाई जा रही है।
कांग्रेस बालाघाट में बच्चों की मौत, सागर-देवास में जहरीली शराब, किसान संकट और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे उठाना चाहती है।

मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 7 नवंबर 2026 को आरोप लगाया कि 7 दिसंबर से शुरू होने वाला पाँच दिवसीय शीतकालीन सत्र प्रदेश की जनता के सवालों का जवाब देने के लिए पर्याप्त नहीं है। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार जवाबदेही से बचने के लिए सदन का समय जानबूझकर सीमित रख रही है।

नेता प्रतिपक्ष के आरोप

सिंघार ने कहा कि 230 विधानसभा सीटों से चुने गए विधायक सात करोड़ मध्यप्रदेश वासियों की आवाज़ हैं और उन्हें अपने क्षेत्र, किसानों तथा युवाओं के मुद्दों पर बोलने का पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। उनका कहना था, 'सरकार सिर्फ अनुपूरक बजट के लिए समय निकाल रही है और जनता के सवालों का जवाब नहीं देना चाहती।'

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले मानसून सत्र भी पाँच दिन का था, लेकिन उसे तीन दिन में ही समाप्त कर दिया गया था। आलोचकों का कहना है कि यह प्रवृत्ति विधायी जवाबदेही को कमज़ोर करती है।

कांग्रेस के उठाए जाने वाले प्रमुख मुद्दे

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के विधायक इस सत्र में बालाघाट में कथित तौर पर बच्चों की मौत, सागर और देवास में जहरीली शराब से हुई मौतों, किसानों की बदहाली, युवाओं की बेरोज़गारी, महिलाओं की सुरक्षा, आदिवासी अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य, बढ़ते कर्ज़ और बिगड़ती कानून-व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दे उठाना चाहते हैं। सिंघार के अनुसार इन सवालों पर जनता को सरकार का सीधा जवाब मिलना ज़रूरी है।

सत्र की अवधि पर सवाल

गौरतलब है कि विधानसभा सत्र की अवधि सरकार तय करती है और विपक्ष इसे बढ़ाने की माँग कर सकता है, लेकिन अंतिम फैसला सत्ता पक्ष के पास होता है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में कई विवादास्पद घटनाओं को लेकर जनमत में सरकार के प्रति सवाल उठ रहे हैं। सिंघार ने स्पष्ट किया कि सरकार सदन का सत्र छोटा कर सकती है, लेकिन जनता के सवालों को नहीं।

आगे क्या होगा

मध्य प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र 7 दिसंबर 2026 से शुरू होने की संभावना है। विपक्ष के तेवर देखते हुए सदन में हंगामे की आशंका जताई जा रही है। कांग्रेस के विधायक प्रश्नकाल से लेकर शून्यकाल तक हर मौके पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह दर्शाता है कि सत्ता पक्ष सदन को वाद-विवाद के मंच से ज़्यादा औपचारिकता की तरह देख रहा है। बालाघाट, सागर और देवास जैसी घटनाओं पर जनता का आक्रोश सार्वजनिक है — इन पर सदन में चर्चा न होना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का क्षरण है। असली सवाल यह है कि क्या विपक्ष सीमित समय में भी अपने मुद्दे प्रभावशाली ढंग से उठा पाएगा, या छोटा सत्र असुविधाजनक सवालों को रोकने का माध्यम बन जाएगा।
RashtraPress
7 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मध्य प्रदेश शीतकालीन सत्र 2026 कब शुरू होगा?
मध्य प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र 7 दिसंबर 2026 से शुरू होगा और यह पाँच दिवसीय है। विपक्ष इस अवधि को अपर्याप्त बता रहा है।
उमंग सिंघार ने 5 दिवसीय सत्र पर क्या आपत्ति जताई?
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का कहना है कि पाँच दिन के सत्र में 230 विधायकों के सवालों के जवाब नहीं मिल पाएंगे और सरकार जनता की जवाबदेही से बच रही है। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष केवल अनुपूरक बजट पारित करने के लिए सत्र बुला रहा है।
कांग्रेस इस सत्र में कौन-से मुद्दे उठाना चाहती है?
कांग्रेस के विधायक बालाघाट में बच्चों की मौत, सागर और देवास में जहरीली शराब से हुई मौतें, किसानों की बदहाली, युवाओं की बेरोज़गारी, महिलाओं की सुरक्षा और बिगड़ती कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दे उठाना चाहते हैं।
MP में पिछला विधानसभा सत्र कितने दिन चला था?
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के अनुसार, मानसून सत्र भी पाँच दिन का था लेकिन उसे तीन दिन में ही समाप्त कर दिया गया। यह विपक्ष की आपत्ति का एक प्रमुख आधार है।
क्या सरकार सत्र की अवधि बढ़ा सकती है?
विधानसभा सत्र की अवधि तय करने का अधिकार सरकार के पास होता है। विपक्ष माँग कर सकता है, लेकिन अंतिम निर्णय सत्ता पक्ष का होता है। फिलहाल सरकार की ओर से सत्र बढ़ाने का कोई संकेत नहीं मिला है।
राष्ट्र प्रेस
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