बेंगलुरु में जीबीए अधिकारियों पर हमला: भाजपा नेता आर. अशोक ने कांग्रेस सरकार की चुप्पी पर उठाए तीखे सवाल
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने मंगलवार, 21 जुलाई को बेंगलुरु के शिवाजीनगर इलाके में फुटपाथ अतिक्रमण हटाने के अभियान के दौरान ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (जीबीए) के अधिकारियों पर हुए हमले की कड़े शब्दों में निंदा की। भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता अशोक ने इस घटना को राज्य में बिगड़ती कानून-व्यवस्था का प्रत्यक्ष प्रमाण बताते हुए कांग्रेस सरकार की चुप्पी पर तीखे सवाल दागे। पुलिस ने घटना में कई लोगों को गिरफ्तार कर जाँच शुरू कर दी है।
मुख्य घटनाक्रम
शिवाजीनगर में जीबीए की टीम फुटपाथ से अतिक्रमण हटाने का नियमित अभियान चला रही थी, तभी अधिकारियों पर हमला हो गया। इस घटना ने राज्य की राजनीति में तूफान ला दिया और विपक्ष को सरकार को घेरने का मौका मिल गया। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जाँच शुरू कर दी है और कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है।
यह ऐसे समय में आया है जब बेंगलुरु में अतिक्रमण विरोधी अभियान को लेकर पहले से ही राजनीतिक माहौल गर्म था। गौरतलब है कि शिवाजीनगर एक संवेदनशील इलाका माना जाता है और वहाँ अतिक्रमण हटाने को लेकर पहले भी विवाद उठते रहे हैं।
भाजपा की प्रतिक्रिया
विपक्ष के नेता आर. अशोक ने अधिकारियों पर हुए हमले को 'बेहद निंदनीय' करार दिया। उन्होंने कहा, "शिवाजीनगर में फुटपाथ से अतिक्रमण हटाने का काम कर रहे जीबीए अधिकारी पर जानलेवा हमला बेहद निंदनीय है। अपनी ड्यूटी निभा रहे सरकारी अधिकारी पर इस तरह का हमला इस बात का जीता-जागता सबूत है कि राज्य में कानून-व्यवस्था कितनी बुरी तरह बिगड़ गई है।"
अशोक ने बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, "मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा, जो बेंगलुरु के दूसरे हिस्सों में अतिक्रमण हटाने के अभियानों के दौरान कैमरे के सामने रील्स बनाते हैं, आप अभी चुप क्यों हैं? क्या अधिकारियों पर हमले के समय उनके साथ खड़े होना आपकी जिम्मेदारी नहीं है? या कानून के शासन से ज़्यादा आपके लिए वोट-बैंक की राजनीति जरूरी है?"
मुख्यमंत्री पर सवाल
भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, "मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, अपनी कानूनी ड्यूटी निभा रहे अधिकारियों पर जानलेवा हमले के बाद भी आपकी सरकार चुप क्यों है? क्या कानून लागू करने से ज़्यादा आपके लिए राजनीतिक नफा-नुकसान जरूरी है? क्या ऐसे मामलों में सरकार की चुप्पी का मतलब दोषियों को परोक्ष रूप से बचाना नहीं है?"
अशोक ने यह भी सवाल उठाया कि क्या राज्य सरकार में शिवाजीनगर से अतिक्रमण हटाने की इच्छाशक्ति है। उन्होंने कहा, "क्या देश के कानून कुछ खास इलाकों पर लागू नहीं होते? क्या राज्य में दो अलग-अलग कानूनों की व्यवस्था है?"
भाजपा की माँग
विपक्ष के नेता ने राज्य सरकार से तत्काल कार्रवाई की माँग की। उन्होंने कहा, "आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू की जानी चाहिए। अपनी ड्यूटी निभा रहे अधिकारियों की सुरक्षा पक्की की जानी चाहिए। सिर्फ बातों से नहीं, बल्कि काम से साबित करें कि कानून के सामने सब बराबर हैं।"
यह घटना कर्नाटक में कांग्रेस सरकार और विपक्षी भाजपा के बीच कानून-व्यवस्था को लेकर चल रहे राजनीतिक टकराव को और तेज करने वाली है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और क्या अधिकारियों को न्याय मिलता है।