छोले-कुलचे वाले की बेटे अर्जुन राजपूत का भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम में चयन, 4 जुलाई को श्रीलंका दौरा
सारांश
मुख्य बातें
जालंधर के राम नगर में डीएवी कॉलेज के बाहर छोले-कुलचे की रेहड़ी लगाने वाले होती राम के बेटे अर्जुन राजपूत का चयन भारतीय अंडर-19 क्रिकेट टीम में हो गया है। 12 जून को आई इस खबर ने जालंधर के एक साधारण परिवार के असाधारण सफर को राष्ट्रीय पहचान दिला दी। अर्जुन 4 जुलाई को टीम के साथ श्रीलंका दौरे पर रवाना होंगे और देश की नीली जर्सी पहनकर मैदान पर उतरेंगे।
कौन हैं अर्जुन राजपूत
अर्जुन राजपूत लेफ्ट-हैंड बल्लेबाज और राइट-आर्म ऑफ स्पिनर हैं — यानी टीम को बल्ले और गेंद दोनों से योगदान देने में सक्षम। उन्होंने क्रिकेट की बुनियाद हरभजन सिंह क्रिकेट अकादमी में रखी, जहाँ कोच विक्रम सिद्धू ने उनकी प्रतिभा को निखारा। अर्जुन के अनुसार उन्होंने 8-9 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया था, जबकि उनके पिता के अनुसार वे 5-6 साल की उम्र से ही गेंद-बल्ले से दोस्ती कर चुके थे।
सीमित साधन, असीमित जुनून
पिता होती राम कई वर्षों से डीएवी कॉलेज के बाहर कुलचे बनाकर परिवार का भरण-पोषण करते आए हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने बेटे के क्रिकेट के सपने को कभी टूटने नहीं दिया। चयन की खबर मिलने पर भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि अर्जुन ने दिन-रात मेहनत की है और यह पल उनके लिए अत्यंत खुशी का है।
माँ नन्ही देवी को 12 जून की सुबह ही यह खुशखबरी मिली। उन्होंने इसे बेहद खुशी का पल बताया। बहन किरण राजपूत ने कहा कि भाई को नीली जर्सी में देखने का सपना अब साकार हुआ है — पूरा परिवार उसके साथ हर कदम पर खड़ा रहा।
अर्जुन की ज़ुबानी
चयन के बाद मीडिया से बातचीत में अर्जुन ने कहा, 'श्रीलंका में हमारे शुरुआती मैच होंगे। हम देश का प्रतिनिधित्व करेंगे और पूरी कोशिश करेंगे कि अच्छा प्रदर्शन करें, सारे मैच जीतें और ट्रॉफी भारत लाएं।' उन्होंने परिवार के योगदान को याद करते हुए कहा, 'मां-पिता और परिवार ने हमेशा मेरा साथ दिया। जब भी निराश होता, वे मुझे प्रेरित करते और हौसला बढ़ाते थे।'
अर्जुन ने अपने पिता के संघर्ष को सलाम करते हुए कहा, 'उन्होंने मेरे सपने पूरे करने के लिए कड़ी मेहनत की है। अब मुझे उनके सपने पूरे करने हैं। मैं पिताजी को कहता हूँ कि अब कुलचे बनाना छोड़ दो, अब पहले जैसी स्थिति नहीं है।'
आगे क्या
4 जुलाई को भारतीय अंडर-19 टीम श्रीलंका दौरे पर रवाना होगी। अर्जुन का लक्ष्य टीम के लिए बल्ले से रन और गेंद से विकेट दोनों में योगदान देना है। जालंधर के राम नगर की यह कहानी उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा है जो संसाधनों की कमी के बावजूद अपने सपनों की दिशा में डटे हुए हैं।