चोरबगान भगदड़ पर सियासत गर्म: सपा सांसद ने माँगा ₹50 लाख मुआवजा, भाजपा बोली — सुरक्षा होगी कड़ी
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के कोलकाता स्थित चोरबगान दुर्गा पूजा पंडाल में हुए भगदड़ हादसे ने 19 अक्टूबर 2026 को देशभर की राजनीति में हलचल मचा दी। विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर सुरक्षा में लापरवाही का सीधा आरोप लगाया, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने हादसे को दुखद बताते हुए भविष्य में सुरक्षा व्यवस्था को और मज़बूत करने का भरोसा दिलाया।
सपा सांसद की माँग — ₹50 लाख मुआवजा
समाजवादी पार्टी (SP) के सांसद अवधेश प्रसाद ने अयोध्या में इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि इसका असर केवल कोलकाता तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश ने इस पीड़ा को महसूस किया है। उन्होंने कहा, "ऐसे पवित्र अवसर पर सरकार की ओर से सुरक्षा में लापरवाही बरती गई है, जिसके कारण यह दर्दनाक हादसा हुआ।"
प्रसाद ने माँग की कि मृतकों के परिजनों को कम से कम ₹50 लाख का मुआवजा दिया जाए। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों के घर में अँधेरा छा गया है, उन्हें हर संभव सहायता मिलनी चाहिए। साथ ही उन्होंने पूरे मामले की जाँच कर जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की माँग रखी और कहा कि नवरात्र के दौरान सुरक्षा की गारंटी देना सरकार का दायित्व है, जिसमें वह "फेल" साबित हुई है।
कांग्रेस का आरोप — मुआवजा नहीं, रोकथाम ज़रूरी
हैदराबाद में कांग्रेस नेता वी. हनुमंत राव ने भी सरकार की कार्यशैली पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार ₹25 लाख की अनुग्रह राशि और नौकरी देने की बात कर रही है, लेकिन असल ज़रूरत यह है कि भविष्य में ऐसी घटनाएँ दोबारा न हों।
राव ने कहा, "पहले लोगों की जान चली जाए और फिर मुआवजा और नौकरी दी जाए — यह सही व्यवस्था नहीं है। यह मौजूदा सरकार की विफलता को दर्शाता है।" उन्होंने माँग की कि नई सरकार सभी नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे।
भाजपा की प्रतिक्रिया — सीसीटीवी से होगी निगरानी
BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने पटना में इस हादसे को "अत्यंत दुखद" बताया और कहा कि यह खबर सुनकर सभी गहरे सदमे में हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सीसीटीवी कैमरों और उपलब्ध सभी संसाधनों की मदद से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में कोई भी ऐसी हरकत करने की हिम्मत न करे।
गुरु प्रकाश ने त्योहारों के मौसम में जनता से सतर्क रहने और मेलों तथा उत्सवों में शांत व संयमित रहने की भी अपील की।
हादसे का राजनीतिक संदर्भ
यह हादसा ऐसे समय में हुआ है जब पूरे देश में दुर्गा पूजा और नवरात्र का उत्सव जोरों पर था। गौरतलब है कि बड़े धार्मिक आयोजनों में भगदड़ की घटनाएँ भारत में नई नहीं हैं — पिछले कुछ वर्षों में ऐसे कई हादसे हो चुके हैं, जिनके बाद भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठते रहे हैं।
विपक्षी दलों ने एकसुर में सरकार से जवाबदेही माँगी है, वहीं सत्ता पक्ष ने भविष्य की सुरक्षा पर ज़ोर देते हुए तत्काल राजनीतिक ज़िम्मेदारी से किनारा किया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा और सड़क — दोनों स्तरों पर और तेज़ होने की संभावना है।