25 सितंबर 2026
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क्रिस बोवेन ने नई दिल्ली में ई-रिक्शा चलाया, COP31 से पहले भारत-ऑस्ट्रेलिया जलवायु साझेदारी पर ज़ोर

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क्रिस बोवेन ने नई दिल्ली में ई-रिक्शा चलाया, COP31 से पहले भारत-ऑस्ट्रेलिया जलवायु साझेदारी पर ज़ोर

सारांश

ऑस्ट्रेलियाई जलवायु मंत्री क्रिस बोवेन ने नई दिल्ली में ई-रिक्शा चलाकर स्वच्छ ऊर्जा का संदेश दिया और भूपेंद्र यादव से COP31 की तैयारियों पर चर्चा की। तुर्की में नवंबर 2026 में होने वाले COP31 की अध्यक्षता करने वाला ऑस्ट्रेलिया भारत को अपना अहम सहयोगी मानता है।

मुख्य बातें

ऑस्ट्रेलिया के जलवायु मंत्री क्रिस बोवेन ने 25 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में ई-रिक्शा की सवारी की और चालक की सीट भी संभाली।
उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ने यह वीडियो एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर साझा किया।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने बोवेन से मिलकर फिजी में होने वाली प्री-COP बैठक और तुर्की में होने वाले COP31 के एजेंडे पर चर्चा की।
बोवेन ने कहा कि जलवायु और ऊर्जा नीति के भविष्य में भारत की भूमिका 'अपरिहार्य' है।
चिंतन रिसर्च फाउंडेशन और ऑस्ट्रेलियाई उच्चायोग ने COP31 पूर्व संवाद कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें विद्युतीकरण और निवेश निश्चितता प्रमुख विषय रहे।

ऑस्ट्रेलिया के जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा मंत्री क्रिस बोवेन ने 25 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में अपनी आधिकारिक यात्रा के दौरान एक इलेक्ट्रिक रिक्शा की सवारी की और चालक की सीट भी संभाली — स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन के प्रतीकात्मक संदेश के साथ। यह यात्रा नवंबर 2026 में तुर्की में होने वाले COP31 से पहले भारत-ऑस्ट्रेलिया जलवायु संबंधों को मज़बूत करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है।

ई-रिक्शा की सवारी और सोशल मीडिया पर चर्चा

भारत में ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें बोवेन पहले यात्री के रूप में ई-रिक्शा में बैठे और फिर स्वयं उसे चलाते नज़र आए। उच्चायुक्त ने बताया कि बैठकों के बीच मंत्री ने यह सवारी इसलिए की ताकि वे स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण को गति देने वाले नवाचार को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव कर सकें।

भारत में ई-रिक्शा का तेज़ी से विस्तार शहरी गतिशीलता के विद्युतीकरण का एक जीवंत उदाहरण बन चुका है। बोवेन की इस सवारी को उस व्यापक कूटनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है जो ऑस्ट्रेलिया COP31 की अध्यक्षता में देना चाहता है।

भूपेंद्र यादव से द्विपक्षीय वार्ता

बुधवार को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बोवेन से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने फिजी में होने वाली आगामी प्री-COP मंत्रिस्तरीय बैठक और तुर्की में होने वाले COP31 के लिए महत्वपूर्ण एजेंडा बिंदुओं पर विचार-विमर्श किया।

यादव ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर लिखा: 'आज नई दिल्ली में ऑस्ट्रेलिया के जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा मंत्री और COP31 वार्ता के अध्यक्ष क्रिस बोवेन से मिलकर खुशी हुई। हमने फिजी में होने वाली आगामी प्री-COP और तुर्की में होने वाली COP31 के लिए महत्वपूर्ण एजेंडा मुद्दों पर सार्थक चर्चा की।' उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में भारत द्वारा की गई महत्वाकांक्षी जलवायु पहलों का भी उल्लेख किया और COP31 अध्यक्षता में ऑस्ट्रेलिया के साथ सहयोग की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।

पूर्व-COP संवाद में भारत की भूमिका पर ज़ोर

चिंतन रिसर्च फाउंडेशन (CRF) द्वारा ऑस्ट्रेलियाई उच्चायोग के सहयोग से 'हरित संक्रमण में भागीदार: COP31 के लिए महत्वाकांक्षा, कार्रवाई और साझेदारी को आगे बढ़ाना' विषय पर एक संवाद आयोजित किया गया। इसमें नीति निर्माता, राजनयिक, शोधकर्ता और जलवायु विशेषज्ञ एकत्रित हुए।

इस संवाद में मुख्य भाषण देते हुए बोवेन ने कहा: 'भारत दुनिया को दिखा रहा है कि स्वच्छ ऊर्जा समृद्धि में बाधा नहीं, बल्कि समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करती है।' उन्होंने कहा कि वैश्विक जलवायु और ऊर्जा नीति के भविष्य को आकार देने में भारत की भूमिका 'अपरिहार्य' है। बोवेन ने यह भी स्पष्ट किया कि COP31 समावेशी और पारदर्शी होगा, जिसमें विद्युतीकरण और निवेश की निश्चितता प्रमुख प्राथमिकताएँ होंगी।

प्रशांत द्वीप देशों की आवाज़ और ऑस्ट्रेलिया की यात्रा का उद्देश्य

बोवेन ने फिजी और तुवालू में आयोजित होने वाले प्री-COP कार्यक्रमों के संदर्भ में प्रशांत द्वीप देशों की आवाज़ को वैश्विक जलवायु मंच पर बुलंद करने के महत्व पर विशेष बल दिया — एक ऐसा मुद्दा जो ऑस्ट्रेलियाई विदेश नीति के लिए भी संवेदनशील है।

ऑस्ट्रेलियाई मंत्री की यह भारत यात्रा ऑस्ट्रेलिया की ईंधन सुरक्षा को मज़बूत करने और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से की जा रही है। गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया COP31 का अध्यक्ष देश है, इसलिए भारत जैसे प्रमुख उत्सर्जक और विकासशील देशों के साथ उसकी कूटनीतिक सक्रियता और अधिक महत्व रखती है।

आगे की राह

COP31 के नवंबर 2026 में तुर्की में आयोजित होने से पहले भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों देशों के बीच जलवायु वार्ताओं की गति और तेज़ होने की संभावना है। इस यात्रा से यह संकेत मिलता है कि ऑस्ट्रेलिया COP31 की अध्यक्षता में प्रमुख विकासशील देशों को अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) जैसे कठिन मुद्दों पर ठोस सहमति बना पाएँगे। भारत विकासशील देशों की आवाज़ का प्रतिनिधि बनना चाहता है, जबकि ऑस्ट्रेलिया खुद एक बड़ा जीवाश्म ईंधन निर्यातक है — यह अंतर्विरोध COP31 की मेज़ पर अनदेखा नहीं रहेगा।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्रिस बोवेन की भारत यात्रा का उद्देश्य क्या है?
क्रिस बोवेन ऑस्ट्रेलिया की ईंधन सुरक्षा को मज़बूत करने और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर भारत सहित अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के साथ समन्वय के लिए भारत की आधिकारिक यात्रा पर हैं। COP31 के अध्यक्ष देश के मंत्री के रूप में वे प्रमुख देशों के साथ जलवायु एजेंडे पर सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
COP31 कब और कहाँ होगा?
COP31 नवंबर 2026 में तुर्की में आयोजित होगा। इससे पहले फिजी में एक प्री-COP मंत्रिस्तरीय बैठक भी होनी है, जिस पर भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों के बीच चर्चा हुई।
भूपेंद्र यादव और क्रिस बोवेन की बैठक में क्या हुआ?
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने बोवेन से मिलकर फिजी में प्री-COP बैठक और तुर्की में COP31 के एजेंडा बिंदुओं पर चर्चा की। यादव ने PM मोदी के नेतृत्व में भारत की जलवायु उपलब्धियाँ गिनाईं और COP31 अध्यक्षता में ऑस्ट्रेलिया के साथ सहयोग की प्रतिबद्धता दोहराई।
बोवेन ने नई दिल्ली में ई-रिक्शा क्यों चलाया?
उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन के अनुसार, बोवेन ने बैठकों के बीच ई-रिक्शा की सवारी इसलिए की ताकि वे स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को आगे बढ़ाने वाले नवाचार को प्रत्यक्ष रूप से देख सकें। यह भारत के शहरी विद्युत गतिशीलता मॉडल को वैश्विक मंच पर रेखांकित करने का एक प्रतीकात्मक कदम भी था।
पूर्व-COP संवाद में किन मुद्दों पर चर्चा हुई?
चिंतन रिसर्च फाउंडेशन और ऑस्ट्रेलियाई उच्चायोग द्वारा आयोजित संवाद में विद्युतीकरण, निवेश की निश्चितता, और प्रशांत द्वीप देशों की आवाज़ को वैश्विक जलवायु मंच पर बुलंद करने जैसे विषय प्रमुख रहे। नीति निर्माता, राजनयिक, शोधकर्ता और जलवायु विशेषज्ञ इसमें शामिल हुए।
राष्ट्र प्रेस
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