4 नवंबर 2026
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कीर्तिवर्धन सिंह की फ्रांसीसी मंत्री लेफेव्रे से मुलाकात, COP-31 और जलवायु वित्तपोषण पर बनी सहमति

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कीर्तिवर्धन सिंह की फ्रांसीसी मंत्री लेफेव्रे से मुलाकात, COP-31 और जलवायु वित्तपोषण पर बनी सहमति

सारांश

भारत के पर्यावरण राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने नई दिल्ली में फ्रांसीसी इकोलॉजिकल ट्रांजिशन मंत्री मैथ्यू लेफेव्रे से मुलाकात की। COP-31 से पहले दोनों देशों ने जलवायु वित्तपोषण, जैव विविधता और ISA-CDRI सहयोग को मज़बूत करने की प्रतिबद्धता जताई।

मुख्य बातें

कीर्तिवर्धन सिंह ने 3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में फ्रांसीसी मंत्री मैथ्यू लेफेव्रे से द्विपक्षीय बैठक की।
बैठक में COP-31 की प्राथमिकताएं, जलवायु वित्तपोषण, जैव विविधता संरक्षण और ऊर्जा परिवर्तन पर चर्चा हुई।
इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA) और CDRI के ज़रिए सहयोग को और सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।
फ्रांसीसी दूतावास ने भी बैठक की जानकारी अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर साझा की।
बैठक COP-31 की वैश्विक तैयारियों के बीच भारत-फ्रांस जलवायु साझेदारी को नई दिशा देने के संदर्भ में हुई।

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री तथा विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में फ्रांस के पारिस्थितिक बदलाव (इकोलॉजिकल ट्रांजिशन) मंत्री मैथ्यू लेफेव्रे से महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक में जैव विविधता संरक्षण, सर्कुलर इकोनॉमी, जलवायु वित्तपोषण और आगामी COP-31 से जुड़ी प्राथमिकताओं पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।

बैठक में क्या हुई चर्चा

दोनों मंत्रियों ने पर्यावरण, जैव विविधता, सर्कुलर इकोनॉमी और जलवायु से जुड़े मुद्दों पर वैश्विक एवं द्विपक्षीय स्तर पर प्रयासों को और तेज़ करने के तरीकों पर चर्चा की। बैठक का केंद्रबिंदु ऊँचे जलवायु लक्ष्यों को बनाए रखना और उन्हें ज़मीनी स्तर पर क्रियान्वित करना रहा।

कीर्तिवर्धन सिंह ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'फ्रांस के इकोलॉजिकल ट्रांजिशन मंत्री मैथ्यू लेफेव्रे से मुलाकात करके खुशी हुई। हमने कई साझा हितों के विषयों पर चर्चा की, जिनमें जैव विविधता संरक्षण, ऊर्जा परिवर्तन, जलवायु वित्तपोषण और COP-31 से जुड़ी प्राथमिकताएं शामिल थीं।'

ISA और CDRI के ज़रिए सहयोग को मज़बूती

बैठक में इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA) और कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर (CDRI) जैसी भारत-प्रवर्तित बहुपक्षीय पहलों के माध्यम से द्विपक्षीय सहयोग को और सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। गौरतलब है कि ISA और CDRI दोनों ही भारत की अगुवाई में स्थापित अंतरराष्ट्रीय मंच हैं, जिनमें फ्रांस एक प्रमुख भागीदार देश है।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब COP-31 की तैयारियाँ वैश्विक स्तर पर तेज़ हो रही हैं और विकासशील व विकसित देशों के बीच जलवायु वित्तपोषण को लेकर मतभेद बने हुए हैं।

फ्रांसीसी दूतावास की प्रतिक्रिया

नई दिल्ली स्थित फ्रांसीसी दूतावास ने भी इस बैठक की जानकारी अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर साझा की। दूतावास ने अपनी पोस्ट में कहा कि दोनों नेताओं ने पर्यावरण, जैव विविधता, सर्कुलर इकोनॉमी और जलवायु से जुड़े मुद्दों पर वैश्विक और द्विपक्षीय प्रयासों को गति देने पर बल दिया, ताकि ऊँचे जलवायु लक्ष्यों और महत्वाकांक्षाओं को बनाए रखा जा सके।

दूतावास ने यह भी रेखांकित किया कि इन क्षेत्रों में भारत और फ्रांस के बीच सहयोग को मिलकर आगे ले जाने पर जोर दिया गया।

भारत-फ्रांस जलवायु साझेदारी का व्यापक संदर्भ

भारत और फ्रांस के बीच जलवायु और ऊर्जा के क्षेत्र में साझेदारी पिछले कुछ वर्षों में लगातार गहरी हुई है। 2015 के पेरिस जलवायु समझौते से लेकर ISA की स्थापना तक, दोनों देश वैश्विक जलवायु एजेंडे पर अक्सर एकमत रहे हैं। COP-31 से पूर्व यह बैठक दोनों देशों की साझी प्राथमिकताओं को रेखांकित करती है।

आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच तकनीकी कार्यसमूहों की बैठकें और संयुक्त कार्यक्रमों की घोषणा की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन COP-31 की पूर्व संध्या पर भारत-फ्रांस के बीच जलवायु वित्तपोषण पर आम सहमति बनाना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि विकसित और विकासशील देशों के बीच यही मुद्दा सबसे बड़ा विभाजन रेखा बना हुआ है। ISA और CDRI जैसी भारतीय पहलों में फ्रांस की भागीदारी को दोहराना संकेत देता है कि दोनों देश बहुपक्षीय मंचों पर एकजुट मोर्चा बनाना चाहते हैं। हालाँकि, वास्तविक परीक्षा यह है कि ये प्रतिबद्धताएं COP-31 में ठोस वित्तीय प्रतिबद्धताओं में तब्दील होती हैं या नहीं — पिछले कई COPs में घोषणाएं महत्वाकांक्षी रही हैं, पर धन का प्रवाह लक्ष्य से पीछे रहा है।
RashtraPress
4 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कीर्तिवर्धन सिंह और मैथ्यू लेफेव्रे की बैठक में क्या हुआ?
3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में हुई इस बैठक में दोनों मंत्रियों ने जैव विविधता संरक्षण, ऊर्जा परिवर्तन, जलवायु वित्तपोषण और COP-31 की प्राथमिकताओं पर चर्चा की। ISA और CDRI के ज़रिए द्विपक्षीय सहयोग को मज़बूत करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई गई।
इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA) और CDRI क्या हैं?
इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA) भारत और फ्रांस की संयुक्त पहल पर 2015 में स्थापित एक बहुपक्षीय संगठन है, जो सौर ऊर्जा को बढ़ावा देता है। CDRI (कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इन्फ्रास्ट्रक्चर) भारत की अगुवाई में बना वैश्विक मंच है जो आपदा-रोधी बुनियादी ढाँचे पर काम करता है।
COP-31 से पहले यह बैठक क्यों अहम है?
COP-31 की तैयारियों के दौरान जलवायु वित्तपोषण को लेकर विकसित और विकासशील देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं। इस बैठक में भारत और फ्रांस ने ऊँचे जलवायु लक्ष्यों को बनाए रखने और उन्हें साकार करने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई।
भारत और फ्रांस के बीच जलवायु साझेदारी कितनी पुरानी है?
भारत और फ्रांस के बीच जलवायु सहयोग 2015 के पेरिस जलवायु समझौते के समय से सक्रिय रूप से गहरा हुआ है। ISA की सह-स्थापना से लेकर CDRI में फ्रांस की भागीदारी तक, दोनों देश वैश्विक जलवायु एजेंडे पर प्रमुख साझेदार रहे हैं।
सर्कुलर इकोनॉमी पर भारत-फ्रांस वार्ता का क्या महत्व है?
सर्कुलर इकोनॉमी — यानी संसाधनों के पुनः उपयोग और अपशिष्ट न्यूनीकरण पर आधारित आर्थिक मॉडल — दोनों देशों की पर्यावरण नीतियों का केंद्रीय हिस्सा बनती जा रही है। इस क्षेत्र में तकनीक और नीति-साझेदारी से दोनों देशों को अपने जलवायु लक्ष्य हासिल करने में मदद मिल सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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