मोदी के 76वें जन्मदिन पर CII अध्यक्ष मुकुंदन बोले: GST, JAM, UPI ने बदली अर्थव्यवस्था की दिशा
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के अध्यक्ष आर. मुकुंदन ने गुरुवार, 17 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर उन्हें बधाई देते हुए कहा कि उनके नेतृत्व ने भारतीय अर्थव्यवस्था में औपचारिकीकरण, वित्तीय समावेशन और डिजिटलाइजेशन को नई गति दी है। मुकुंदन ने यह भी रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे किए हैं — गुजरात से शुरू हुई यात्रा जो आज राष्ट्रीय परिदृश्य पर केंद्रित है।
तीन प्रमुख स्तंभ: औपचारिकीकरण, समावेशन और डिजिटलाइजेशन
मुकुंदन के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल की तीन सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हैं — अर्थव्यवस्था का औपचारिकीकरण, वित्तीय समावेशन और डिजिटल रूपांतरण। उन्होंने वस्तु एवं सेवा कर (GST) के क्रियान्वयन को अर्थव्यवस्था को संगठित क्षेत्र की ओर ले जाने की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया।
वित्तीय समावेशन के मोर्चे पर उन्होंने जन धन आधार मोबाइल (JAM) ट्रायड को सबसे प्रभावशाली नीतिगत ढाँचा करार दिया, जिसने करोड़ों भारतीयों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा। इसके साथ ही यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को भारत के डिजिटल भुगतान क्रांति का प्रतीक बताया।
अब 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' से आगे की राह
मुकुंदन ने कहा कि नीतिगत प्राथमिकताओं का अगला पड़ाव अब व्यापारिक सुगमता से आगे बढ़कर आम नागरिक के दैनिक जीवन को बेहतर बनाने पर होना चाहिए। उन्होंने कहा, "अब ध्यान 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' से हटकर आम नागरिक के लिए 'ईज़ ऑफ लिविंग', 'कॉस्ट ऑफ लिविंग' और 'स्पीड ऑफ लिविंग' पर केंद्रित होना चाहिए।"
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और रोज़मर्रा की लागत को लेकर नागरिकों की चिंताएँ नीति निर्माताओं के एजेंडे में प्रमुखता पा रही हैं। गौरतलब है कि CII जैसे शीर्ष उद्योग संगठन परंपरागत रूप से व्यापार केंद्रित नीतियों की वकालत करते रहे हैं — ऐसे में यह संकेत देना कि नागरिक जीवन की गुणवत्ता भी उतनी ही ज़रूरी है, एक उल्लेखनीय बदलाव है।
ऊंची आकांक्षाओं का आह्वान
मुकुंदन ने प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया कि वे देश और नागरिकों के लिए उच्च लक्ष्य तय करना जारी रखें। उन्होंने कहा, "हमारे नेता के तौर पर उन्हें हम सभी से और व्यापक रूप से पूरे देश से बहुत ऊंची आकांक्षाएं रखना जारी रखना चाहिए।"
उनके अनुसार, इससे भारत को अपनी विकास आकांक्षाओं को पूरा करने में मदद मिलेगी, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक और घरेलू स्तर पर विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ बन रही हैं।
आगे की दिशा
CII जैसे संगठनों की यह आवाज़ महत्वपूर्ण है, क्योंकि ये नीति निर्माण में सरकार के साथ सक्रिय भागीदार रहते हैं। मुकुंदन की टिप्पणी संकेत देती है कि उद्योग जगत अब सिर्फ व्यापारिक सुधारों तक सीमित नहीं है, बल्कि जन जीवन की गुणवत्ता को भी आर्थिक नीति के केंद्र में देखना चाहता है। आने वाले बजट चक्रों और नीतिगत घोषणाओं में यह मांग किस रूप लेती है, यह देखना होगा।