कोलकाता एयरपोर्ट पर CISF की बड़ी कार्रवाई: बैंकॉक जाते दो यात्रियों से ₹1.14 करोड़ की विदेशी मुद्रा ज़ब्त
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने 19 अक्टूबर 2026 को कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बैंकॉक जाने वाले दो यात्रियों के हैंड बैगेज से 1,19,900 अमेरिकी डॉलर (भारतीय मूल्य लगभग ₹1,13,64,002) की विदेशी मुद्रा बरामद की। बैगों में बने नकली हिस्सों में अखबार में लपेटकर छिपाई गई यह रकम नियमित एक्स-रे स्क्रीनिंग के दौरान पकड़ में आई।
बरामदगी का पूरा घटनाक्रम
यह कार्रवाई 19 अक्टूबर 2026 को सुबह करीब 10:20 बजे अंतरराष्ट्रीय टर्मिनल के सुरक्षा जांच क्षेत्र में हुई। CISF के एक स्क्रीनर को एक्स-रे जांच के दौरान दोनों यात्रियों के बैग में संदिग्ध सामग्री दिखाई दी। दोनों यात्री भूटान एयरलाइंस की फ्लाइट B3700 से बैंकॉक रवाना होने वाले थे।
विस्तृत तलाशी में बैगों के अंदर बने फॉल्स कंपार्टमेंट (नकली हिस्सों) से विदेशी मुद्रा मिली, जिसे अखबार में लपेटकर सुरक्षा जांच से बचाने की कोशिश की गई थी। गौरतलब है कि इस तरह की छुपाने की तकनीक बताती है कि यह कदम सुनियोजित था।
किसके बैग से कितनी रकम
बरामद कुल 1,19,900 अमेरिकी डॉलर में से 74,900 डॉलर पहले यात्री के हैंड बैगेज से मिले, जबकि शेष 45,000 डॉलर दूसरे यात्री के बैग से बरामद किए गए। दोनों यात्रियों और जब्त विदेशी मुद्रा को तत्काल कस्टम विभाग की एयर इंटेलिजेंस यूनिट (AIU) को सौंप दिया गया।
कानूनी कार्रवाई
20 अक्टूबर 2026 को जिस यात्री के बैग से 74,900 डॉलर बरामद हुए थे, उसे AIU/कस्टम अधिकारियों ने जिला एवं सत्र न्यायालय में पेश किया। वहीं दूसरे यात्री को 45,000 डॉलर की बरामदगी के संबंध में डिटेंशन रसीद जारी करने के बाद छोड़ दिया गया। आगे की जांच जारी है।
CISF की प्रतिबद्धता
CISF ने अपने बयान में कहा कि वह प्रभावी स्क्रीनिंग, सतर्क निगरानी और अपने कर्मियों के पेशेवर व्यवहार के जरिए विमानन सुरक्षा बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। अधिकारियों के अनुसार, यह मामला दर्शाता है कि वित्तीय और विदेशी मुद्रा से जुड़े संभावित उल्लंघनों को रोकने में हवाई अड्डा सुरक्षा एजेंसियों और कस्टम विभाग के बीच समन्वित कार्रवाई कितनी महत्वपूर्ण है।
आगे की जांच
यह ऐसे समय में आया है जब भारत के प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर विदेशी मुद्रा की अवैध तस्करी की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। कस्टम अधिकारी अब यह जांचेंगे कि यह राशि किस स्रोत से आई और इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जाना था। फेमा (विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम) के तहत इस मामले में आगे की कार्रवाई होने की संभावना है।