सीजेआई न्यायमूर्ति सूर्यकांत का देवघर में संदेश: न्याय अंतिम व्यक्ति के द्वार तक पहुँचे
सारांश
मुख्य बातें
भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सोमवार, 2 नवंबर 2026 को झारखंड के देवघर व्यवहार न्यायालय परिसर में आयोजित राज्य स्तरीय विधिक सेवा सह सशक्तीकरण शिविर में स्पष्ट किया कि न्याय का वास्तविक अर्थ केवल अदालत तक पहुँचना नहीं, बल्कि हर आम नागरिक को उसके अधिकारों का लाभ सुनिश्चित कराना है। उन्होंने विधिक सेवा संस्थाओं से आह्वान किया कि वे औपचारिक गतिविधियों की सीमा से बाहर निकलकर जरूरतमंदों तक स्वयं पहुँचें।
शिविर का आयोजन और पृष्ठभूमि
यह कार्यक्रम राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) और झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। शिविर में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति चंद्रशेखर, न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह, झारखंड हाईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद तथा न्यायमूर्ति रोंगोन मुखोपाध्याय सहित अनेक न्यायिक और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
सीजेआई का मुख्य संदेश
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि किसी बुजुर्ग महिला को रुकी हुई पेंशन मिलना, किसी श्रमिक को उसकी मेहनत की मज़दूरी मिलना, बच्चे को शिक्षा जारी रखने का अवसर मिलना और पीड़ित परिवार को समय पर सहायता उपलब्ध होना — ये सब न्याय की महत्वपूर्ण अभिव्यक्तियाँ हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि कोई भी व्यक्ति आर्थिक कमजोरी, अशिक्षा या कानूनी जानकारी के अभाव में न्याय से वंचित नहीं रहना चाहिए।
उन्होंने न्याय प्रणाली में भरोसे की जरूरत पर एक सटीक उदाहरण दिया — जब कोई मरीज अस्पताल पहुँचता है, तो डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिकल स्टाफ का आश्वासन उसकी आधी बीमारी दूर कर देता है। सीजेआई के अनुसार, ठीक इसी प्रकार न्याय व्यवस्था से जुड़े लोगों को जरूरतमंदों को यह भरोसा दिलाना चाहिए कि न्याय पाने की राह में वे अकेले नहीं हैं।
आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों पर विशेष जोर
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने झारखंड की सामाजिक और भौगोलिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए आदिवासी तथा दूरस्थ क्षेत्रों में स्थानीय भाषाओं के माध्यम से कानूनी जागरूकता फैलाने पर बल दिया। उन्होंने पैरा लीगल वॉलंटियर्स की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि विधिक सहायता का लाभ उन लोगों तक भी पहुँचना चाहिए जो भौगोलिक दूरी और संसाधनों की कमी के कारण संस्थानों तक नहीं आ पाते।
विधिक सहायता क्लीनिकों का उद्घाटन और लाभार्थियों को सहायता
सीजेआई ने वर्चुअल माध्यम से पलामू के भीष्म नारायण सिंह विधि महाविद्यालय और रांची के सरला बिरला विश्वविद्यालय में स्थापित विधिक सहायता क्लीनिकों का उद्घाटन किया। इस अवसर पर विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के तहत कुल 1,880 लाभुकों के बीच ₹14 करोड़ 46 लाख 90 हजार की परिसंपत्तियों और सहायता राशि का वितरण किया गया, जिसमें पीड़ितों को मुआवजे के चेक भी शामिल थे।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति चंद्रशेखर ने 'मीडिएशन फॉर द नेशन' और 'नालसा वीर परिवार सहायता योजना' की सराहना की। न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह ने झारखंड में अनाथ और जरूरतमंद बच्चों के संरक्षण के लिए चलाए जा रहे 'प्रोजेक्ट शिशु' को महत्वपूर्ण पहल बताया।
आगे की राह
गौरतलब है कि यह शिविर ऐसे समय में आया है जब देशभर में विधिक सेवाओं की पहुँच और गुणवत्ता को लेकर बहस तेज है। सीजेआई के इस आह्वान के बाद विधिक सेवा संस्थाओं से अपेक्षा है कि वे ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति और सक्रियता और बढ़ाएँगी। शिविर से पहले न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने बाबा बैद्यनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना भी की।