27 सितंबर 2026
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मतदाता सूची अपडेट पर CM धामी ने चुनाव आयोग के फैसलों का स्वागत किया, BLO करेंगे घर-घर दस्तावेज संग्रह

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मतदाता सूची अपडेट पर CM धामी ने चुनाव आयोग के फैसलों का स्वागत किया, BLO करेंगे घर-घर दस्तावेज संग्रह

सारांश

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चुनाव आयोग के मतदाता सूची संबंधी फैसलों की तारीफ की — BLO का घर-घर दौरा, रैन बसेरों में हेल्प डेस्क और ECINet की IIT-नेतृत्व वाली जाँच समिति। यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया को अधिक समावेशी बनाने की कोशिश है।

मुख्य बातें

CM पुष्कर सिंह धामी ने 27 सितंबर 2026 को चुनाव आयोग के मतदाता सूची अपडेट संबंधी फैसलों का स्वागत किया।
फॉर्म 6 से जुड़ी SIR प्रक्रिया को सर्वोच्च न्यायालय का अनुमोदन प्राप्त हो चुका है।
अनमैप्ड या विसंगतिपूर्ण नाम वाले मतदाताओं के दस्तावेज BLO स्वयं घर पहुँचकर एकत्र करेंगे।
रैन बसेरों में रहने वाले नागरिकों के लिए हेल्प डेस्क और स्पेशल डेस्क लगाई जाएंगी।
ECINet की जाँच के लिए IIT विशेषज्ञों सहित सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर की अध्यक्षता में समिति गठित।
चुनाव आयोग अब अपनी बैठकों का एजेंडा पहले से सार्वजनिक करेगा।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 27 सितंबर 2026 को देहरादून में चुनाव आयोग (ECI) के हालिया निर्णयों की सराहना करते हुए कहा कि इन फैसलों का एकमात्र लक्ष्य मतदाता सूची को अद्यतन करना है, न कि किसी योग्य मतदाता को उसके लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित करना। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग के कदम समावेशी और पारदर्शी शासन की दिशा में उठाए गए हैं।

फॉर्म 6 और सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी

मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि 26 सितंबर को जारी आयोग की नोट में यह रेखांकित किया गया है कि विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) के लिए फॉर्म 6 से संबंधित घोषणा को सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय द्वारा अधिकृत किया गया है। इसका अर्थ है कि इस प्रक्रिया को न्यायिक स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि गैर-SIR अवधि में मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित नियमित फॉर्म ही लागू रहेंगे, जिससे किसी भी प्रक्रियागत भ्रम की गुंजाइश नहीं बचती।

BLO करेंगे घर-घर दस्तावेज संग्रह

धामी ने बताया कि जिन मतदाताओं के नाम अनमैप्ड हैं अथवा जिनमें लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी पाई गई है, उनके दस्तावेज बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) स्वयं उनके घर पहुँचकर एकत्र करेंगे। इन मतदाताओं को व्यक्तिगत सुनवाई के लिए किसी कार्यालय में बुलाया नहीं जाएगा। यह व्यवस्था विशेष रूप से वृद्ध, दिव्यांग और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों के लिए राहत देने वाली है।

रैन बसेरों में रहने वालों के लिए विशेष हेल्प डेस्क

मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि रैन बसेरों और अस्थायी आवासों में रहने वाले नागरिकों के लिए हेल्प डेस्क और स्पेशल डेस्क स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इससे बेघर और प्रवासी वर्ग को भी मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने में सहूलियत मिलेगी। गौरतलब है कि शहरी प्रवासी और झुग्गी-बस्ती में रहने वाले नागरिक अब तक मतदाता सूची से बाहर रहने की सबसे अधिक शिकायत करते आए हैं।

छूटे और नए मतदाताओं के लिए विशेष अभियान

चुनाव आयोग ने उन नागरिकों के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने की घोषणा की है जो अब तक सूची से छूटे हुए हैं अथवा पहली बार मतदाता बन रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी योग्य नागरिक मतदान के अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित न रहे।

ECINet की स्वतंत्र तकनीकी जाँच और पारदर्शिता

ECINet को लेकर उठे तकनीकी सवालों के समाधान हेतु चुनाव आयोग ने सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर की अध्यक्षता में IIT के स्वतंत्र विशेषज्ञों को शामिल करते हुए एक समिति गठित की है। यह समिति जाँच करेगी कि ECINet प्रणाली प्रचलित कानूनों और नियमों के अनुरूप संचालित हो रही है या नहीं। इसके अतिरिक्त, आयोग ने भविष्य की बैठकों का एजेंडा पहले से सर्कुलेट करने का भी निर्णय लिया है, जिसे संस्थागत पारदर्शिता की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है।

इन घोषणाओं के साथ, उत्तराखंड सहित देशभर में चुनाव तंत्र को अधिक जन-केंद्रित बनाने की कवायद आगे बढ़ती दिख रही है। आने वाले हफ्तों में BLO की मैदानी गतिविधियाँ और विशेष अभियानों की सफलता ही इन फैसलों की असली कसौटी साबित होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

परंतु असली जाँच IIT समिति की स्वतंत्रता और BLO अभियान के ज़मीनी क्रियान्वयन से होगी। BLO के घर-घर दौरे की व्यवस्था सुनने में सरल लगती है, लेकिन उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में दुर्गम क्षेत्रों तक पहुँच एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती है। ECINet की समिति में IIT विशेषज्ञों की भागीदारी स्वागत योग्य है, किंतु उसके निष्कर्षों की समयसीमा और सार्वजनिक प्रकाशन की कोई प्रतिबद्धता अभी तक नहीं दी गई — बिना इसके पारदर्शिता का दावा अधूरा रहेगा।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चुनाव आयोग ने मतदाता सूची को लेकर क्या नए फैसले किए हैं?
चुनाव आयोग ने अनमैप्ड और विसंगतिपूर्ण नाम वाले मतदाताओं के दस्तावेज BLO द्वारा घर पर एकत्र करने, रैन बसेरों में हेल्प डेस्क स्थापित करने, नए और छूटे मतदाताओं के लिए विशेष अभियान चलाने और ECINet की जाँच के लिए IIT विशेषज्ञों की समिति गठित करने का निर्णय लिया है। साथ ही भविष्य की बैठकों का एजेंडा पहले से सार्वजनिक किया जाएगा।
CM धामी ने चुनाव आयोग के फैसलों का स्वागत क्यों किया?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इन फैसलों का उद्देश्य किसी भी योग्य मतदाता को उसके अधिकार से वंचित करना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को सटीक और समावेशी बनाना है। उन्होंने इन्हें लोकतांत्रिक पारदर्शिता की दिशा में सकारात्मक कदम बताया।
फॉर्म 6 और SIR प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट का क्या रुख है?
26 सितंबर को जारी चुनाव आयोग की नोट के अनुसार, SIR के लिए फॉर्म 6 से जुड़ी घोषणा को सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय द्वारा अधिकृत किया जा चुका है। गैर-SIR अवधि में मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत नियमित फॉर्म ही लागू रहेंगे।
ECINet की जाँच के लिए कौन सी समिति गठित की गई है?
सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर की अध्यक्षता में IIT के स्वतंत्र तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल कर एक समिति बनाई गई है। यह समिति जाँचेगी कि ECINet प्रणाली प्रचलित कानूनों और नियमों के अनुरूप संचालित हो रही है या नहीं।
रैन बसेरों में रहने वाले लोगों के लिए मतदाता सूची में नाम दर्ज कराना अब कैसे आसान होगा?
चुनाव आयोग ने रैन बसेरों और अस्थायी आवासों में रहने वाले नागरिकों के लिए हेल्प डेस्क और स्पेशल डेस्क लगाने का निर्णय लिया है। इससे बेघर और प्रवासी वर्ग के नागरिकों को भी मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने में सुविधा होगी।
राष्ट्र प्रेस
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