उत्तराखंड: योग और अध्यात्म की महाकाशी, सीएम धामी का प्रेरणादायक उद्बोधन
सारांश
Key Takeaways
- मुख्यमंत्री धामी का योग महोत्सव में भाग लेना महत्वपूर्ण है।
- योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन में संतुलन का साधन है।
- राज्य का योग नीति २०२५ के माध्यम से विकास।
- आध्यात्मिक और प्राकृतिक चिकित्सा पर जोर।
- विश्व में योग का बढ़ता प्रभाव।
देहरादून, १३ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को योग नगरी ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन में आयोजित ३८वें अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने देश-विदेश से आए योग साधकों, योगाचार्यों तथा अन्य सम्मानित व्यक्तियों का देवभूमि उत्तराखंड में स्वागत किया।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि यह उनके लिए एक विशेष सौभाग्य है कि उन्हें इस महान अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में भाग लेने का अवसर प्राप्त हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि मां गंगा की दिव्य आरती में शामिल होना और विश्वकल्याण के लिए आयोजित पवित्र यज्ञ में आहुति अर्पित करना उनके लिए गर्व की बात है।
उन्होंने कहा कि योग भारत की एक प्राचीन और महान विधा है, जो आज विश्वभर के करोड़ों लोगों के जीवन का हिस्सा बन चुकी है। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह मन, शरीर और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने वाला एक सार्वभौमिक विज्ञान है, जो आत्मिक शांति प्रदान करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में जब विश्व तनाव, अवसाद और जीवनशैली से जुड़े रोगों का सामना कर रहा है, योग एक नेचुरल हीलिंग सिस्टम के रूप में शांति और संतुलन प्रदान कर रहा है। योगासन और प्राणायाम के माध्यम से शरीर और मन को तनावमुक्त किया जा सकता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि योग ने जाति, भाषा, धर्म और भूगोल की सीमाओं को पार कर मानवता को जोड़ा है और “वसुधैव कुटुम्बकम्” तथा “सर्वे भवन्तु सुखिनः” का संदेश फैलाया है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा २१ जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र में पेश किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप आज १८० से अधिक देशों में योग का अभ्यास हो रहा है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड केवल देवभूमि नहीं, बल्कि योग और अध्यात्म की भूमि भी है। राज्य की प्राकृतिक सुंदरता और शुद्ध वातावरण योग साधना के लिए अनुकूल हैं। इसी उद्देश्य से राज्य सरकार ने उत्तराखंड को योग की वैश्विक राजधानी बनाने के लिए देश की पहली 'योग नीति २०२५' लागू की है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि योग और ध्यान केंद्र विकसित करने के लिए २० लाख रुपए तक की सब्सिडी एवं शोध कार्यों के लिए १० लाख रुपए तक के अनुदान का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा पांच नए योग हब स्थापित किए जा रहे हैं और सभी आयुष हेल्थ एवं वेलनेस सेंटर में योग सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आयुष वेलनेस सेंटर एवं नेचुरोपैथी केंद्रों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश में ३०० से अधिक आयुष्मान आरोग्य केंद्र संचालित हैं और प्रत्येक जनपद में ५० एवं १० बेड वाले आयुष चिकित्सालय स्थापित किए जा रहे हैं। ई-संजीवनी पोर्टल के माध्यम से विशेषज्ञों द्वारा आयुष परामर्श भी प्रदान किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि ‘उत्तराखंड आयुष नीति’ के माध्यम से औषधि निर्माण, वेलनेस, शिक्षा, शोध एवं औषधीय पौधों के संवर्धन को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही गढ़वाल एवं कुमाऊं मंडल में एक-एक ‘स्पिरिचुअल इकोनॉमिक जोन’ की स्थापना हेतु बजट में १० करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त की कि इस महोत्सव में देश-विदेश के प्रतिष्ठित योगाचार्य अपने ज्ञान और अनुभव साझा कर रहे हैं, जिसमें हठ योग, राज योग, कर्म योग एवं भक्ति योग के साथ ध्यान, प्राणायाम और प्राकृतिक चिकित्सा संबंधी सत्र शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि परमार्थ निकेतन पिछले ८० वर्षों से भारतीय संस्कृति, योग और अध्यात्म के माध्यम से विश्व को जोड़ने का कार्य कर रहा है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में यह महोत्सव योग, प्राणायाम और आध्यात्म के माध्यम से मानवता को शांति और सद्भाव के मार्ग पर प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कार्यक्रम में परमार्थ निकेतन से स्वामी चिदानन्द सरस्वती एवं साध्वी भगवती सरस्वती, गायक कैलाश खेर, विभिन्न देशों से आए योगाचार्य, योग प्रशिक्षक तथा पर्यटक उपस्थित रहे।