22 अक्टूबर 2026
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पालघर के 25,000 स्कूली बच्चों को पौष्टिक भोजन: CM फडणवीस की विक्रमगढ़ केंद्रीय रसोई पहल

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पालघर के 25,000 स्कूली बच्चों को पौष्टिक भोजन: CM फडणवीस की विक्रमगढ़ केंद्रीय रसोई पहल

सारांश

पालघर के विक्रमगढ़ में 25,000 बच्चों के लिए केंद्रीय रसोईघर — CM फडणवीस की यह पहल सिर्फ मध्याह्न भोजन नहीं, बल्कि आदिवासी बच्चों की स्कूल उपस्थिति और सीखने की क्षमता सुधारने का बड़ा दांव है। प्रस्ताव अभी विचाराधीन है, लेकिन मंजूरी मिली तो 273 स्कूलों के बच्चों की जिंदगी बदल सकती है।

मुख्य बातें

CM देवेंद्र फडणवीस की पहल पर पालघर के विक्रमगढ़ तालुका में 25,000 विद्यार्थियों के लिए केंद्रीय रसोईघर स्थापित करने का प्रस्ताव विचाराधीन है।
परियोजना के लिए करीब डेढ़ एकड़ भूमि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव; आवश्यक अनुमतियाँ लेने की प्रक्रिया शुरू।
शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में विक्रमगढ़ के 273 स्कूलों में 29,124 विद्यार्थी — जिनमें आदिवासी कल्याण विभाग और अनुदानित आदिवासी स्कूलों के छात्र शामिल।
शुरुआत में 2,000-3,000 बच्चों को भोजन; बाद में चरणबद्ध विस्तार से पूर्ण क्षमता तक पहुँचने का लक्ष्य।
भोजन गुणवत्ता के लिए नियमित रिपोर्ट, स्वतंत्र लेखा परीक्षण और परिणाम-मूल्यांकन की व्यवस्था प्रस्तावित।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पहल पर पालघर जिले के विक्रमगढ़ तालुका में प्रतिदिन 25,000 विद्यार्थियों के लिए पौष्टिक भोजन तैयार करने वाले अत्याधुनिक केंद्रीय रसोईघर की स्थापना का प्रस्ताव महाराष्ट्र सरकार के विचाराधीन है। 22 अक्टूबर 2026 को सामने आई इस जानकारी के अनुसार, आवश्यक सरकारी अनुमतियाँ और मंजूरियाँ मिलने के बाद हजारों आदिवासी व ग्रामीण स्कूली बच्चों को इस योजना का सीधा लाभ मिल सकेगा।

परियोजना की रूपरेखा

प्रस्तावित केंद्रीय रसोईघर के लिए करीब डेढ़ एकड़ भूमि उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा गया है। आवश्यक सरकारी अनुमतियाँ व मंजूरियाँ प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, हालाँकि निर्माण और संचालन को लेकर अंतिम निर्णय इन्हीं मंजूरियों के बाद स्पष्ट होगा।

शुरुआत में केंद्रीय रसोईघर से 2,000 से 3,000 विद्यार्थियों को भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बाद सरकारी मंजूरियों, संचालन की तैयारियों और उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर इसे चरणबद्ध तरीके से विस्तारित कर अंततः 25,000 विद्यार्थियों की पूर्ण क्षमता तक पहुँचाया जाएगा।

विद्यार्थियों का विवरण

शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के आँकड़ों के अनुसार, विक्रमगढ़ तालुका के 273 स्कूलों में कुल 29,124 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इनमें जिला परिषद के स्कूलों में 15,091, आदिवासी कल्याण विभाग के स्कूलों में 2,636 और अनुदानित आदिवासी स्कूलों में 3,607 विद्यार्थी शामिल हैं।

राज्य सरकार की योजना इस मध्याह्न भोजन कार्यक्रम को जिला परिषद स्कूलों, स्वयं वित्तपोषित स्कूलों, निजी अनुदानित स्कूलों और सरकारी मानदंडों के अनुसार पात्र अनुदानित आदिवासी स्कूलों तक पहुँचाने की है। पात्र स्कूलों को धीरे-धीरे इस योजना में शामिल किया जाएगा।

पोषण और शिक्षा पर अपेक्षित असर

इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों को नियमित रूप से पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है। नियमित पोषण से बच्चों में भूख की समस्या कम होगी, स्कूलों में उपस्थिति दर बढ़ेगी, पढ़ाई में निरंतरता बनेगी और सीखने की क्षमता में सुधार की उम्मीद है।

गौरतलब है कि पालघर जिले के आदिवासी बहुल इलाकों में बाल कुपोषण लंबे समय से एक गंभीर चिंता रही है। ऐसे में यह प्रस्ताव न केवल पोषण, बल्कि शैक्षिक निरंतरता के नज़रिए से भी महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।

पारदर्शिता और गुणवत्ता नियंत्रण

परियोजना में भोजन की गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विशेष व्यवस्था प्रस्तावित है। इसके तहत नियमित रिपोर्ट तैयार की जाएगी, स्वतंत्र संस्थाओं से लेखा परीक्षण कराया जाएगा और योजना के परिणामों का समय-समय पर मूल्यांकन भी किया जाएगा।

आगे की राह

फिलहाल यह प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन है और आवश्यक मंजूरियाँ मिलने के बाद ही निर्माण कार्य की समयसीमा स्पष्ट होगी। यदि यह योजना निर्धारित लक्ष्य के अनुसार आगे बढ़ती है, तो विक्रमगढ़ का यह मॉडल राज्य के अन्य आदिवासी बहुल तालुकाओं के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह प्रस्ताव अभी भी मंजूरी के इंतज़ार में है — और यही सबसे बड़ी चुनौती है। महाराष्ट्र में अतीत में कई कल्याण योजनाएँ क्रियान्वयन की सुस्त रफ्तार के कारण लक्षित लाभार्थियों तक देर से पहुँची हैं। चरणबद्ध विस्तार की रणनीति व्यावहारिक ज़रूर है, पर पारदर्शिता और स्वतंत्र लेखा परीक्षण के प्रावधान तभी अर्थपूर्ण बनेंगे जब इन्हें बाध्यकारी समयसीमा के साथ लागू किया जाए। असली कसौटी यह है कि क्या यह योजना पालघर में बाल कुपोषण के दीर्घकालिक आँकड़ों को बदल पाएगी।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पालघर विक्रमगढ़ केंद्रीय रसोईघर योजना क्या है?
यह महाराष्ट्र सरकार का एक प्रस्तावित मध्याह्न भोजन कार्यक्रम है, जिसके तहत पालघर जिले के विक्रमगढ़ तालुका में एक अत्याधुनिक केंद्रीय रसोईघर स्थापित किया जाएगा। इसकी अंतिम क्षमता प्रतिदिन 25,000 विद्यार्थियों के लिए पौष्टिक भोजन तैयार करने की होगी और यह जिला परिषद, आदिवासी कल्याण तथा अनुदानित स्कूलों के बच्चों को लाभ पहुँचाएगी।
इस योजना से कितने और कौन से बच्चे लाभान्वित होंगे?
विक्रमगढ़ तालुका के 273 स्कूलों में 29,124 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें जिला परिषद के 15,091, आदिवासी कल्याण विभाग के 2,636 और अनुदानित आदिवासी स्कूलों के 3,607 विद्यार्थी शामिल हैं। योजना की अंतिम क्षमता 25,000 बच्चों तक भोजन पहुँचाने की है।
केंद्रीय रसोईघर कब शुरू होगा?
फिलहाल यह प्रस्ताव महाराष्ट्र सरकार के विचाराधीन है और आवश्यक सरकारी अनुमतियाँ व मंजूरियाँ लेने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। निर्माण और संचालन की अंतिम समयसीमा इन मंजूरियों के बाद ही स्पष्ट होगी।
योजना में शुरुआत में कितने बच्चों को भोजन मिलेगा?
प्रारंभिक चरण में केवल 2,000 से 3,000 विद्यार्थियों को भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बाद सरकारी मंजूरियों, संचालन की तैयारियों और उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर इसे चरणबद्ध तरीके से 25,000 की पूर्ण क्षमता तक विस्तारित किया जाएगा।
भोजन की गुणवत्ता कैसे सुनिश्चित की जाएगी?
प्रस्ताव के अनुसार, नियमित रिपोर्ट तैयार की जाएगी, स्वतंत्र संस्थाओं से लेखा परीक्षण कराया जाएगा और योजना के परिणामों का मूल्यांकन समय-समय पर किया जाएगा। इससे पारदर्शिता बनाए रखी जा सकेगी और भोजन की गुणवत्ता पर निगरानी रखी जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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