15 सितंबर 2026
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अन्नमृता फाउंडेशन का पश्चिम बंगाल में मध्याह्न भोजन विस्तार, नए जिलों में भी पहुँचेगी सेवा

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अन्नमृता फाउंडेशन का पश्चिम बंगाल में मध्याह्न भोजन विस्तार, नए जिलों में भी पहुँचेगी सेवा

सारांश

अन्नमृता फाउंडेशन ने 1 अगस्त 2026 को कोलकाता में खोले अपने पहले केंद्रीय मध्याह्न भोजन रसोईघर की सफलता के बाद अब पश्चिम बंगाल के अन्य जिलों में भी सेवा विस्तार की योजना बनाई है। 2004 से काम कर रहा यह फाउंडेशन देशभर में 12 लाख से अधिक भोजन परोस चुका है।

मुख्य बातें

अन्नमृता फाउंडेशन ने 1 अगस्त 2026 को कोलकाता में पहला केंद्रीय मध्याह्न भोजन रसोईघर खोला।
पश्चिम बंगाल सरकार के सहयोग से फाउंडेशन अब राज्य के अन्य जिलों में भी सेवा विस्तार की योजना बना रहा है।
फाउंडेशन 2004 से काम कर रहा है और अब तक देशभर में 12 लाख से अधिक भोजन परोसे जा चुके हैं।
इस्कॉन का खाद्य वितरण कार्यक्रम प्रतिदिन 40 लाख भोजन परोसता है; वैश्विक स्तर पर 1,500 से अधिक केंद्र हैं।
पश्चिम बंगाल में इस्कॉन की 35 शाखाएँ और लगभग 8,000 सभा केंद्र हैं।
इस्कॉन बैंगलोर सोसाइटी को वैश्विक इस्कॉन — हरे कृष्ण आंदोलन — की मुख्य शासी संरचना से अलग इकाई माना जाता है।

अन्नमृता फाउंडेशन — जिसे इस्कॉन और उसके स्वयंसेवकों का समर्थन प्राप्त है — अब पश्चिम बंगाल सरकार के सहयोग से अपनी मध्याह्न भोजन सेवा को कोलकाता से आगे राज्य के अन्य जिलों तक विस्तारित करने की योजना बना रहा है। फाउंडेशन ने 1 अगस्त 2026 को कोलकाता में अपने पहले केंद्रीय मध्याह्न भोजन रसोईघर का उद्घाटन किया था, जो अब कोलकाता नगर निगम क्षेत्र के स्कूलों में नियमित रूप से पौष्टिक भोजन परोस रहा है।

कोलकाता में अब तक की प्रगति

कोलकाता स्थित केंद्रीय रसोईघर से वर्तमान में नगर निगम क्षेत्र के विद्यालयों के छात्रों को प्रतिदिन भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, इस भोजन की गुणवत्ता, पोषण मूल्य, स्वच्छता और स्वाद की छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों ने समान रूप से सराहना की है। यह पहल राज्य सरकार की मध्याह्न भोजन योजना के तहत संचालित है।

अन्नमृता फाउंडेशन की राष्ट्रीय उपस्थिति

अन्नमृता फाउंडेशन 2004 से सरकारी स्कूलों में पौष्टिक भोजन परोसने का काम कर रहा है। महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा और अन्य राज्यों में अब तक 12 लाख से अधिक भोजन परोसे जा चुके हैं। यह उन संस्थाओं में से एक है जो बच्चों की पोषण सुरक्षा के लिए सरकारी साझेदारी में काम कर रही हैं।

इस्कॉन का वैश्विक और भारतीय नेटवर्क

श्रील एसी भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद द्वारा मुंबई में स्थापित और पंजीकृत इस्कॉन की भारत भर में 450 से अधिक शाखाएँ हैं। इनमें से 35 शाखाएँ और लगभग 8,000 सभा केंद्र अकेले पश्चिम बंगाल में कार्यरत हैं। विश्व स्तर पर इस्कॉन के 1,500 से अधिक केंद्र हैं और इसका खाद्य वितरण कार्यक्रम प्रतिदिन 40 लाख भोजन परोसता है। भारत और विदेश में विभिन्न सरकारों तथा नागरिक समाज के नेताओं द्वारा इस कार्यक्रम को व्यापक मान्यता प्राप्त है।

इस्कॉन बैंगलोर विवाद: एक आवश्यक स्पष्टीकरण

यह स्पष्ट किया जाता है कि इस्कॉन बैंगलोर सोसाइटी — जिसकी स्थापना 1978 में इस्कॉन के संस्थापक के निधन के बाद हुई थी — से संबंधित एक दीर्घकालिक कानूनी विवाद चल रहा है। आरोप है कि मधु पंडित दास और उनके सहयोगियों ने इस सोसाइटी का उपयोग इस्कॉन बैंगलोर के मंदिर प्रशासन और अक्षय पात्र जैसे संबंधित कार्यक्रमों पर कथित तौर पर अवैध नियंत्रण स्थापित करने के लिए किया। इसलिए, इस सोसाइटी या उससे जुड़े न्यासियों को मूल और वैश्विक इस्कॉन संगठन — जिसे हरे कृष्ण आंदोलन के नाम से जाना जाता है — की शासी संरचना के अंतर्गत मानना उचित नहीं होगा।

आगे की राह

पश्चिम बंगाल में अन्नमृता फाउंडेशन का यह विस्तार राज्य के उन जिलों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है जहाँ मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता और नियमितता अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर स्कूली बच्चों के पोषण को लेकर नीतिगत जोर बढ़ा है। फाउंडेशन की विस्तार योजना के तहत आने वाले महीनों में नए जिलों में रसोईघर स्थापित किए जाने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल क्रियान्वयन की निरंतरता और जवाबदेही का है। सरकारी-गैर-सरकारी साझेदारियाँ मध्याह्न भोजन में गुणवत्ता सुधार का वादा तो करती हैं, पर अतीत में कई राज्यों में ऐसी पहलें आपूर्ति श्रृंखला की अड़चनों और निगरानी की कमी के कारण अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाई हैं। पश्चिम बंगाल के दूरदराज़ जिलों तक विस्तार के लिए केवल रसोईघर खोलना पर्याप्त नहीं — वितरण तंत्र, भंडारण और पोषण-सत्यापन की स्वतंत्र निगरानी उतनी ही ज़रूरी है।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अन्नमृता फाउंडेशन क्या है और यह पश्चिम बंगाल में क्या कर रहा है?
अन्नमृता फाउंडेशन इस्कॉन और उसके स्वयंसेवकों द्वारा समर्थित एक संस्था है, जो 2004 से सरकारी स्कूलों में पौष्टिक मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराती है। इसने 1 अगस्त 2026 को कोलकाता में पहला केंद्रीय रसोईघर खोला और अब पश्चिम बंगाल सरकार के सहयोग से अन्य जिलों में भी सेवा विस्तार की तैयारी में है।
अन्नमृता फाउंडेशन अब तक कितना भोजन परोस चुका है?
फाउंडेशन महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा और अन्य राज्यों सहित देशभर में अब तक 12 लाख से अधिक भोजन परोस चुका है। इस्कॉन का समग्र खाद्य वितरण कार्यक्रम प्रतिदिन 40 लाख भोजन परोसता है।
इस्कॉन बैंगलोर सोसाइटी का विवाद क्या है?
इस्कॉन बैंगलोर सोसाइटी, जो 1978 में इस्कॉन संस्थापक के निधन के बाद बनी, एक दीर्घकालिक कानूनी विवाद में है। आरोप है कि मधु पंडित दास और उनके सहयोगियों ने इस सोसाइटी का उपयोग कथित तौर पर मंदिर प्रशासन और अक्षय पात्र जैसे कार्यक्रमों पर अवैध नियंत्रण स्थापित करने के लिए किया। इसे वैश्विक इस्कॉन संगठन की मुख्य शासी संरचना से अलग माना जाता है।
पश्चिम बंगाल में इस्कॉन की उपस्थिति कितनी बड़ी है?
पश्चिम बंगाल में इस्कॉन की 35 शाखाएँ और लगभग 8,000 सभा केंद्र हैं। भारत भर में इस्कॉन की 450 से अधिक शाखाएँ हैं और वैश्विक स्तर पर 1,500 से अधिक केंद्र संचालित हैं।
अन्नमृता फाउंडेशन का पश्चिम बंगाल विस्तार कब तक होगा?
फाउंडेशन ने पश्चिम बंगाल के अन्य जिलों में विस्तार की योजना की घोषणा की है, लेकिन अभी तक कोई निश्चित समयसीमा सार्वजनिक नहीं की गई है। यह विस्तार पश्चिम बंगाल सरकार के सहयोग से किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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