अन्नमृता फाउंडेशन का पश्चिम बंगाल में मध्याह्न भोजन विस्तार, नए जिलों में भी पहुँचेगी सेवा
सारांश
मुख्य बातें
अन्नमृता फाउंडेशन — जिसे इस्कॉन और उसके स्वयंसेवकों का समर्थन प्राप्त है — अब पश्चिम बंगाल सरकार के सहयोग से अपनी मध्याह्न भोजन सेवा को कोलकाता से आगे राज्य के अन्य जिलों तक विस्तारित करने की योजना बना रहा है। फाउंडेशन ने 1 अगस्त 2026 को कोलकाता में अपने पहले केंद्रीय मध्याह्न भोजन रसोईघर का उद्घाटन किया था, जो अब कोलकाता नगर निगम क्षेत्र के स्कूलों में नियमित रूप से पौष्टिक भोजन परोस रहा है।
कोलकाता में अब तक की प्रगति
कोलकाता स्थित केंद्रीय रसोईघर से वर्तमान में नगर निगम क्षेत्र के विद्यालयों के छात्रों को प्रतिदिन भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, इस भोजन की गुणवत्ता, पोषण मूल्य, स्वच्छता और स्वाद की छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों ने समान रूप से सराहना की है। यह पहल राज्य सरकार की मध्याह्न भोजन योजना के तहत संचालित है।
अन्नमृता फाउंडेशन की राष्ट्रीय उपस्थिति
अन्नमृता फाउंडेशन 2004 से सरकारी स्कूलों में पौष्टिक भोजन परोसने का काम कर रहा है। महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा और अन्य राज्यों में अब तक 12 लाख से अधिक भोजन परोसे जा चुके हैं। यह उन संस्थाओं में से एक है जो बच्चों की पोषण सुरक्षा के लिए सरकारी साझेदारी में काम कर रही हैं।
इस्कॉन का वैश्विक और भारतीय नेटवर्क
श्रील एसी भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद द्वारा मुंबई में स्थापित और पंजीकृत इस्कॉन की भारत भर में 450 से अधिक शाखाएँ हैं। इनमें से 35 शाखाएँ और लगभग 8,000 सभा केंद्र अकेले पश्चिम बंगाल में कार्यरत हैं। विश्व स्तर पर इस्कॉन के 1,500 से अधिक केंद्र हैं और इसका खाद्य वितरण कार्यक्रम प्रतिदिन 40 लाख भोजन परोसता है। भारत और विदेश में विभिन्न सरकारों तथा नागरिक समाज के नेताओं द्वारा इस कार्यक्रम को व्यापक मान्यता प्राप्त है।
इस्कॉन बैंगलोर विवाद: एक आवश्यक स्पष्टीकरण
यह स्पष्ट किया जाता है कि इस्कॉन बैंगलोर सोसाइटी — जिसकी स्थापना 1978 में इस्कॉन के संस्थापक के निधन के बाद हुई थी — से संबंधित एक दीर्घकालिक कानूनी विवाद चल रहा है। आरोप है कि मधु पंडित दास और उनके सहयोगियों ने इस सोसाइटी का उपयोग इस्कॉन बैंगलोर के मंदिर प्रशासन और अक्षय पात्र जैसे संबंधित कार्यक्रमों पर कथित तौर पर अवैध नियंत्रण स्थापित करने के लिए किया। इसलिए, इस सोसाइटी या उससे जुड़े न्यासियों को मूल और वैश्विक इस्कॉन संगठन — जिसे हरे कृष्ण आंदोलन के नाम से जाना जाता है — की शासी संरचना के अंतर्गत मानना उचित नहीं होगा।
आगे की राह
पश्चिम बंगाल में अन्नमृता फाउंडेशन का यह विस्तार राज्य के उन जिलों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है जहाँ मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता और नियमितता अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर स्कूली बच्चों के पोषण को लेकर नीतिगत जोर बढ़ा है। फाउंडेशन की विस्तार योजना के तहत आने वाले महीनों में नए जिलों में रसोईघर स्थापित किए जाने की संभावना है।