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तेलंगाना की 27 लाख बच्चों को नाश्ता योजना 'विश्व की सबसे बड़ी पहल': उपमुख्यमंत्री विक्रमार्क

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तेलंगाना की 27 लाख बच्चों को नाश्ता योजना 'विश्व की सबसे बड़ी पहल': उपमुख्यमंत्री विक्रमार्क

सारांश

27 लाख बच्चों को रोज़ नाश्ता — तेलंगाना सरकार इसे मुफ़्त सुविधा नहीं, मानव संसाधन में निवेश बता रही है। सूर्यापेट में ₹9.6 करोड़ की केंद्रीकृत रसोई एक ही छत से 60,000 बच्चों तक गर्म भोजन पहुँचाएगी। उपमुख्यमंत्री विक्रमार्क का दावा है कि यह पहल दुनिया में कहीं और नहीं है।

मुख्य बातें

तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने 6 अक्टूबर 2026 को सरकारी स्कूलों में 27 लाख छात्रों को नाश्ता देने की योजना को 'विश्व की सबसे बड़ी पहल' बताया।
सूर्यापेट ज़िले के मुनगला गाँव में ₹9.6 करोड़ की केंद्रीकृत सामुदायिक रसोई की आधारशिला रखी गई।
यह रसोई 1,020 स्कूलों के करीब 60,000 छात्रों को एक ही स्थान से गर्म नाश्ता उपलब्ध कराएगी।
बच्चों को सप्ताह में छह दिन नाश्ता मिलता है — तीन दिन दूध , तीन दिन रागी की दलिया ।
सरकार ने इस व्यय को 'मुफ़्त योजना' नहीं, बल्कि GSDP वृद्धि में सहयोग देने वाला दीर्घकालिक निवेश करार दिया।

तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने 6 अक्टूबर 2026 को दावा किया कि राज्य के सरकारी स्कूलों में 27 लाख छात्रों को प्रतिदिन नाश्ता उपलब्ध कराने की यह योजना दुनिया में अपनी तरह की सबसे बड़ी पहल है। उन्होंने कहा कि इस पैमाने पर बच्चों को पोषण देने वाला कार्यक्रम विश्व में कहीं और मौजूद नहीं है और तेलंगाना ऐसे अभिनव कार्यक्रम को लागू करने वाला पहला राज्य है।

मुनगला में केंद्रीकृत रसोई की आधारशिला

विक्रमार्क ने सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी के साथ सूर्यापेट ज़िले के कोडड विधानसभा क्षेत्र के मुनगला गाँव में ₹9.6 करोड़ की लागत से निर्मित होने वाली एक केंद्रीकृत सामुदायिक रसोई की आधारशिला रखी। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि यह रसोई आधुनिक तकनीक और स्वच्छता सुविधाओं से लैस होगी, जिससे 1,020 स्कूलों के लगभग 60,000 छात्रों को एक ही स्थान से गर्म नाश्ता पहुँचाया जा सकेगा।

मेनू और वितरण की व्यवस्था

राज्य भर के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को सप्ताह में छह दिन नाश्ता दिया जा रहा है। इसमें तीन दिन दूध और शेष तीन दिन रागी की दलिया परोसी जाती है। विक्रमार्क ने कहा कि घर में 100 लोगों के लिए खाना बनाना भी चुनौतीपूर्ण होता है, ऐसे में 27 लाख बच्चों को एक साथ नाश्ता मुहैया कराना तेलंगाना सरकार के मानवीय दृष्टिकोण का प्रतीक है।

निवेश का नज़रिया, मुफ़्त योजना नहीं

उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि छात्रों को दिया जा रहा पौष्टिक भोजन 'मुफ़्त' नहीं, बल्कि राज्य के भविष्य के मानव संसाधनों में दीर्घकालिक निवेश है। उन्होंने तर्क दिया कि जब बच्चे स्वस्थ रहेंगे और बेहतर शिक्षा ग्रहण करेंगे, तभी वे राज्य के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) की वृद्धि में योगदान दे सकेंगे। गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के बच्चों को प्रारंभिक वर्षों में गुणवत्तापूर्ण पोषण देकर उन्हें जीवन में उच्च स्तर तक पहुँचाने की ज़िम्मेदारी सरकार ने ली है।

व्यापक कल्याण दृष्टिकोण

यह कदम ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकारें शिक्षा में पोषण हस्तक्षेप को नीतिगत प्राथमिकता बना रही हैं। विक्रमार्क ने कहा कि सरकार के कल्याणकारी कार्यक्रम — चाहे गरीबों, किसानों, महिलाओं या छात्रों के लिए हों — को सब्सिडी नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था में लौटने वाला निवेश माना जाना चाहिए। गौरतलब है कि मध्याह्न भोजन योजना केंद्र स्तर पर दशकों से लागू है, परंतु स्कूल-पूर्व नाश्ते को इस पैमाने पर संस्थागत स्वरूप देना अपेक्षाकृत नया प्रयोग है।

आगे की राह

मुनगला की केंद्रीकृत रसोई जैसे मॉडल को राज्य के अन्य हिस्सों में भी विस्तारित किए जाने की संभावना है। यदि यह प्रयोग सफल रहा, तो तेलंगाना का मॉडल अन्य राज्यों के लिए एक संदर्भ बिंदु बन सकता है। सरकार का दावा है कि इस योजना से न केवल उपस्थिति दर बढ़ेगी, बल्कि बच्चों की शारीरिक और मानसिक क्षमता में भी सुधार होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

मुफ़्त नहीं' का तर्क राजनीतिक रूप से चतुर है, लेकिन इसे सत्यापन की ज़रूरत है — क्या नाश्ते की गुणवत्ता, उपस्थिति दर और सीखने के परिणामों पर कोई स्वतंत्र डेटा संग्रह हो रहा है? विश्व की 'सबसे बड़ी पहल' का दावा तभी टिकाऊ होगा जब तुलनीय वैश्विक कार्यक्रमों — जैसे ब्राज़ील का PNAE या जापान के स्कूल लंच कार्यक्रम — से इसकी व्यवस्थित तुलना की जाए। केंद्रीकृत रसोई मॉडल लागत-दक्षता तो दे सकता है, परंतु दूरदराज़ के गाँवों तक समय पर गर्म भोजन पहुँचाना एक लॉजिस्टिक चुनौती है जिस पर पर्याप्त चर्चा नहीं हुई। असली कसौटी यह है कि आने वाले वर्षों में स्कूली ड्रॉपआउट दर और स्वास्थ्य संकेतकों में कितना मापनीय सुधार आता है।
RashtraPress
7 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेलंगाना की स्कूल नाश्ता योजना क्या है?
तेलंगाना सरकार राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 27 लाख छात्रों को सप्ताह में छह दिन निःशुल्क नाश्ता उपलब्ध कराती है। इसमें तीन दिन दूध और तीन दिन रागी की दलिया दी जाती है।
मुनगला में बनने वाली केंद्रीकृत रसोई से क्या होगा?
सूर्यापेट ज़िले के मुनगला गाँव में ₹9.6 करोड़ की लागत से बनने वाली यह रसोई आधुनिक तकनीक और स्वच्छता सुविधाओं से लैस होगी। इससे 1,020 स्कूलों के करीब 60,000 छात्रों को एक ही स्थान से गर्म नाश्ता पहुँचाया जाएगा।
उपमुख्यमंत्री विक्रमार्क ने इसे निवेश क्यों कहा?
विक्रमार्क का तर्क है कि पोषण से बच्चे स्वस्थ मानव संसाधन बनते हैं, जो आगे चलकर राज्य के GSDP में योगदान देते हैं। उनके अनुसार यह खर्च मुफ़्त सुविधा नहीं, बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक निवेश है।
क्या तेलंगाना की यह योजना वाकई दुनिया में सबसे बड़ी है?
उपमुख्यमंत्री विक्रमार्क के अनुसार, 27 लाख बच्चों को एक साथ प्रतिदिन नाश्ता उपलब्ध कराने वाला ऐसा कार्यक्रम विश्व में कहीं और नहीं है। हालाँकि यह दावा सरकार का है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी तक उपलब्ध नहीं है।
इस योजना से किसे सबसे ज़्यादा फायदा होगा?
योजना का लाभ मुख्यतः गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के बच्चों को मिल रहा है जो राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं। सरकार का लक्ष्य है कि प्रारंभिक वर्षों में पोषण सुनिश्चित कर इन बच्चों को जीवन में बेहतर अवसर दिए जाएँ।
राष्ट्र प्रेस
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