हेमंत सोरेन ने मां रूपी सोरेन की अस्थियां रजरप्पा संगम में विसर्जित कीं, संताली परंपरा से हुए अंतिम संस्कार
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 19 अक्टूबर 2026 को अपनी दिवंगत माता रूपी सोरेन की अस्थियां रामगढ़ जिले के रजरप्पा में दामोदर और भैरवी नदियों के पवित्र संगम पर पारंपरिक विधि-विधान के साथ विसर्जित कीं। इस अनुष्ठान के संपन्न होने के साथ ही दिवंगत आत्मा की शांति से जुड़े सभी पारंपरिक धार्मिक कार्यक्रम पूरे हो गए।
अस्थि विसर्जन का पूरा विवरण
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपने पैतृक गांव गोला प्रखंड के नेमरा से माता रूपी सोरेन का अस्थि कलश लेकर रामगढ़ के रजरप्पा पहुँचे। प्रसिद्ध मां छिन्नमस्तिका मंदिर के समीप स्थित जाडंग बाहा तुपुनाई घाट पर यह पूरी रस्म अदा की गई। इस अनुष्ठान के दौरान मुख्यमंत्री भावुक नज़र आए और अपनी माँ को याद कर श्रद्धांजलि अर्पित की।
संताली परंपराओं का निष्ठापूर्वक पालन
यह पूरा अनुष्ठान संताल समाज की प्राचीन सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं के अनुसार संपन्न कराया गया। संताली धर्मगुरु परगना बाबा जोगेश्वर सोरेन के नेतृत्व में सभी विधियाँ पूरी हुईं। मांझी बाबा बिन्दे सोरेन, लुगू गोडैत, सुरेन्द्र टुडू, पारानीक बाबा महावीर मुर्मू, सोमाय टुडू और जीतलाल मुर्मू जैसे संताली रीति-रिवाजों के जानकारों ने सभी पारंपरिक धार्मिक रस्में पूरी कराईं।
परिजनों की उपस्थिति और वस्त्र वितरण
इस अवसर पर मुख्यमंत्री के परिवार के अन्य सदस्य और करीबी रिश्तेदार भी उपस्थित रहे, जिन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। अनुष्ठान के पश्चात हेमंत सोरेन ने घाट पर मौजूद स्थानीय ग्रामीणों और जरूरतमंदों के बीच वस्त्रों का वितरण किया।
माँ का निधन और अंतिम संस्कार
सीएम हेमंत सोरेन की माता रूपी सोरेन का निधन 7 अक्टूबर 2026 को रांची के एक अस्पताल में इलाज के दौरान हुआ था। उनका अंतिम संस्कार पैतृक गांव नेमरा में सम्पन्न हुआ था। 18 अक्टूबर 2026 को नेमरा में ही संस्कार भोज और पारंपरिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया था। गौरतलब है कि रजरप्पा का यह संगम स्थल झारखंड की संताली और हिंदू दोनों समुदायों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है, जो इस अनुष्ठान की सांस्कृतिक गहराई को और बढ़ाता है।