सीतापुरम बनाने का बड़ा फैसला: CM सम्राट चौधरी ने पुनौरा धाम से किया ऐलान, पहली कैबिनेट में मिली मंजूरी
सारांश
Key Takeaways
- सम्राट चौधरी सरकार ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में सीतामढ़ी को सीतापुरम बनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया।
- मां सीता मंदिर का निर्माण 31 दिसंबर 2028 तक पूरा करने की समयसीमा तय की गई।
- पुनौरा धाम में जानकी नवमी पर सीतामढ़ी महोत्सव का उद्घाटन CM सम्राट चौधरी ने किया।
- मां जानकी से जुड़े सभी तीर्थस्थलों को आपस में जोड़ा जाएगा ताकि पर्यटक कम से कम तीन दिन क्षेत्र में रह सकें।
- क्षेत्र में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज का नाम मां सीता के नाम पर रखा जाएगा।
- CM सम्राट चौधरी ने पुनौरा धाम परिसर के पवित्र कुंड में जलाभिषेक और आरती कर राज्य की सुख-समृद्धि की कामना की।
सीतामढ़ी, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जानकी नवमी के पावन अवसर पर शनिवार को मां जानकी की पवित्र जन्मस्थली पुनौरा धाम, सीतामढ़ी पहुंचकर एक ऐतिहासिक घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीतामढ़ी को सीतापुरम के रूप में विकसित करने का निर्णय उनकी सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में ही ले लिया गया है। यह घोषणा न केवल धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से बल्कि बिहार के सांस्कृतिक और आर्थिक विकास के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सीतामढ़ी महोत्सव का उद्घाटन और समीक्षा बैठक
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पुनौरा धाम पहुंचकर सर्वप्रथम सीतामढ़ी महोत्सव का विधिवत उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक भी आयोजित की, जिसमें क्षेत्र के विकास कार्यों की प्रगति का जायजा लिया गया।
महोत्सव के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हजारों वर्ष पूर्व इस भूमि पर भीषण अकाल पड़ा था। उसी कठिन समय में माता जानकी का इस धरती पर अवतरण हुआ और तत्पश्चात वर्षा हुई। उन्होंने यह भी स्मरण कराया कि जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार यहां भव्य मंदिर के शिलान्यास अवसर पर पधारे थे, तब जितनी देर वे यहां रहे, उतनी देर वर्षा होती रही — जिसे श्रद्धालुओं ने दैवीय संकेत माना।
मां सीता मंदिर निर्माण की समयसीमा तय
समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि मां सीता मंदिर का निर्माण कार्य 31 दिसंबर 2028 तक हर हाल में पूर्ण किया जाए। उन्होंने कहा कि मां सीता की जन्मस्थली को पूर्ण रूप से विकसित करना सरकार की प्राथमिकता है।
उल्लेखनीय है कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस क्षेत्र को सीतापुरम बनाने की घोषणा की थी। अब सम्राट चौधरी सरकार ने इस संकल्प को आगे बढ़ाते हुए अपनी पहली कैबिनेट बैठक में ही इसे औपचारिक रूप से स्वीकृति प्रदान कर दी है। यह इस बात का संकेत है कि नई सरकार की प्राथमिकताओं में सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक पर्यटन सर्वोपरि है।
सीतापुरम: पर्यटन और आस्था का केंद्र बनाने की योजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि मां जानकी से जुड़े समस्त तीर्थस्थलों को पुनौरा धाम से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। उनकी परिकल्पना है कि यहां आने वाला कोई भी श्रद्धालु या पर्यटक कम से कम तीन दिन इस क्षेत्र में रहे, विभिन्न स्थलों का भ्रमण करे और शोध-अनुसंधान करे।
इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री ने यह भी आश्वस्त किया कि इस क्षेत्र में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज का नाम भी मां सीता के नाम पर रखा जाएगा। यह निर्णय स्थानीय जनता की दीर्घकालिक मांग को पूरा करेगा और इस क्षेत्र की पहचान को और सुदृढ़ करेगा।
बिहार के विकास पर मुख्यमंत्री का संकल्प
सम्राट चौधरी ने कहा कि आज का बिहार पूरी तरह बदल चुका है। नीतीश कुमार ने बिहार को विकास के पथ पर अग्रसर किया है और अब इस यात्रा को और तेज गति देनी है। उन्होंने कहा कि बिहार को केवल विकसित नहीं बल्कि समृद्ध भी बनाना है।
मुख्यमंत्री ने पुनौरा धाम मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर राज्य की सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। उन्होंने पुनौरा धाम परिसर के पवित्र कुंड में जलाभिषेक और आरती भी संपन्न की।
विश्लेषण: राजनीतिक और आर्थिक महत्व
यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बाद धार्मिक पर्यटन को लेकर पूरे देश में एक नई लहर देखी जा रही है। उत्तर प्रदेश के अयोध्या मॉडल की तर्ज पर बिहार भी अपनी रामायण-कालीन विरासत को पर्यटन के केंद्र में लाने की कोशिश कर रहा है। सीतापुरम परियोजना से स्थानीय रोजगार, होटल-आतिथ्य उद्योग और छोटे व्यापारियों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि सीतामढ़ी नेपाल सीमा से लगा एक ऐसा जिला है जो दशकों से विकास की प्रतीक्षा में रहा है। 2028 तक मंदिर निर्माण की समयसीमा और सीतापुरम की घोषणा यदि जमीन पर उतरती है तो यह क्षेत्र के लाखों लोगों के जीवन में बदलाव ला सकती है। आने वाले महीनों में इस परियोजना की प्रगति पर सबकी नजर रहेगी।