4 अक्टूबर 2026
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भारतीय तटरक्षक बल ने खराब मौसम में लक्षद्वीप से 66 वर्षीय मरीज को हवाई मार्ग से बचाया

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भारतीय तटरक्षक बल ने खराब मौसम में लक्षद्वीप से 66 वर्षीय मरीज को हवाई मार्ग से बचाया

सारांश

खराब मौसम ने रोका नहीं — भारतीय तटरक्षक बल ने लक्षद्वीप के अगत्ती से 66 वर्षीय मरीज को डोर्नियर विमान से कोच्चि पहुँचाया। साथ ही अंडमान के पास एमवी एमरिस पर घायल बांग्लादेशी नाविक को भी उफनते समुद्र में बचाया। दूरस्थ द्वीपों पर तटरक्षक बल ही अंतिम उम्मीद है।

मुख्य बातें

भारतीय तटरक्षक बल ने 4 अक्टूबर 2026 को लक्षद्वीप के अगत्ती से 66 वर्षीय मरीज को हवाई निकासी के ज़रिए कोच्चि पहुँचाया।
मरीज को तत्काल मस्तिष्क एवं तंत्रिका संबंधी शल्य चिकित्सा की आवश्यकता थी; उड़ान के दौरान लगातार ऑक्सीजन सहायता दी गई।
कोच्चि स्थित तटरक्षक वायु प्रतिष्ठान से डोर्नियर विमान भेजा गया; लक्षद्वीप प्रशासन व दोनों तटरक्षक जिला मुख्यालयों के समन्वय से अभियान पूरा हुआ।
हाल ही में डिगलीपुर के पास एमवी एमरिस पर सवार 36 वर्षीय बांग्लादेशी नाविक को भारतीय तटरक्षक पोत राजदूत ने उफनते समुद्र में रात के अँधेरे में बचाया।
नाविक के सिर और रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोटें थीं; विजयपुरम स्थित समुद्री बचाव समन्वय केंद्र ने अभियान समन्वित किया।

भारतीय तटरक्षक बल ने 4 अक्टूबर 2026 को प्रतिकूल मौसम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच लक्षद्वीप के अगत्ती से एक 66 वर्षीय गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को हवाई मार्ग से कोच्चि पहुँचाकर उसकी जान बचाई। मरीज को तत्काल मस्तिष्क एवं तंत्रिका संबंधी शल्य चिकित्सा की आवश्यकता थी और उसे लगातार ऑक्सीजन सहायता दी जा रही थी।

अभियान का घटनाक्रम

केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप प्रशासन तथा कोच्चि और कवरत्ती स्थित तटरक्षक जिला मुख्यालयों के समन्वय से इस हवाई निकासी अभियान को अंजाम दिया गया। कोच्चि स्थित तटरक्षक वायु प्रतिष्ठान से डोर्नियर विमान भेजकर मरीज को अगत्ती से सुरक्षित निकाला गया।

विमान में पूरी उड़ान के दौरान मरीज को निरंतर ऑक्सीजन सहायता उपलब्ध कराई गई, ताकि उसकी स्थिति स्थिर रहे और कोच्चि पहुँचने पर आवश्यक विशेषज्ञ उपचार शुरू हो सके। यह अभियान खराब मौसम की चेतावनियों के बावजूद बिना देरी के पूरा किया गया।

अंडमान में बांग्लादेशी नाविक का बचाव

गौरतलब है कि बीते दिनों ही भारतीय तटरक्षक बल ने एक अन्य जटिल बचाव अभियान को सफलतापूर्वक पूरा किया था। विजयपुरम स्थित समुद्री बचाव समन्वय केंद्र से सूचना मिली कि एमवी एमरिस जहाज पर सवार 36 वर्षीय बांग्लादेशी नाविक जहाज पर गिरने से गंभीर रूप से घायल हो गया है। उसके सिर और रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोटें आई थीं।

सूचना मिलते ही भारतीय तटरक्षक मुख्यालय, अंडमान एवं निकोबार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए भारतीय तटरक्षक पोत राजदूत को राहत एवं चिकित्सा निकासी अभियान के लिए डिगलीपुर के पास रवाना किया। उफनते समुद्र और घने अंधेरे के बावजूद तटरक्षक कर्मियों ने जोखिम उठाते हुए घायल नाविक को सुरक्षित पोत पर पहुँचाया और उसे समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई।

मानवीय प्रतिबद्धता और परिचालन क्षमता

ये दोनों अभियान दर्शाते हैं कि भारतीय तटरक्षक बल समुद्री सुरक्षा के साथ-साथ आपात चिकित्सा निकासी में भी उतनी ही दक्षता रखता है। यह ऐसे समय में आया है जब मानसून के बाद का मौसम भारतीय तटों पर अस्थिर बना हुआ है, और समुद्री बचाव मिशनों की माँग बढ़ी है।

लक्षद्वीप जैसे दूरस्थ द्वीपीय क्षेत्रों में उन्नत चिकित्सा सुविधाओं की सीमित उपलब्धता को देखते हुए तटरक्षक बल की हवाई निकासी क्षमता जीवनरक्षक साबित होती है। यह बल की बहुआयामी भूमिका को रेखांकित करता है — सीमा सुरक्षा से लेकर नागरिक जीवन-रक्षा तक।

आगे की दिशा

दोनों बचाव अभियानों की सफलता के बाद भारतीय तटरक्षक बल की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और समन्वय प्रणाली की सराहना हो रही है। आने वाले महीनों में समुद्री मौसम की जटिलताओं को देखते हुए बल की परिचालन तैयारी और भी महत्वपूर्ण होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भौगोलिक वास्तविकता है। फिर भी इन द्वीपों पर चिकित्सा अवसंरचना की कमी एक नीतिगत प्रश्न है जो हर ऐसे अभियान के साथ उजागर होता है। तटरक्षक बल की वीरता की प्रशंसा आवश्यक है, लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि बेहतर द्वीपीय स्वास्थ्य सुविधाएँ ऐसी आपात निकासी की ज़रूरत को ही कम कर सकती हैं। दो अलग-अलग अभियानों में एक भारतीय वृद्ध और एक बांग्लादेशी नाविक दोनों को बचाना — यह बल की मानवीय प्रतिबद्धता और गैर-भेदभावपूर्ण दृष्टिकोण को भी रेखांकित करता है।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय तटरक्षक बल ने लक्षद्वीप में किसे और कैसे बचाया?
तटरक्षक बल ने लक्षद्वीप के अगत्ती से 66 वर्षीय गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को कोच्चि स्थित तटरक्षक वायु प्रतिष्ठान के डोर्नियर विमान से हवाई निकासी कर कोच्चि पहुँचाया। मरीज को उड़ान के दौरान लगातार ऑक्सीजन सहायता दी गई, क्योंकि उसे तत्काल मस्तिष्क एवं तंत्रिका संबंधी शल्य चिकित्सा की आवश्यकता थी।
एमवी एमरिस बचाव अभियान क्या था?
एमवी एमरिस पर सवार 36 वर्षीय बांग्लादेशी नाविक जहाज पर गिरने से गंभीर रूप से घायल हो गया था, जिसके सिर और रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोटें थीं। विजयपुरम स्थित समुद्री बचाव समन्वय केंद्र की सूचना पर भारतीय तटरक्षक पोत राजदूत को डिगलीपुर के पास भेजा गया और उफनते समुद्र में रात के अँधेरे में उसे सुरक्षित बचाया गया।
लक्षद्वीप से कोच्चि निकासी में किन एजेंसियों ने समन्वय किया?
इस अभियान में केंद्रशासित प्रदेश लक्षद्वीप प्रशासन, कोच्चि स्थित तटरक्षक जिला मुख्यालय और कवरत्ती स्थित तटरक्षक जिला मुख्यालय ने मिलकर समन्वय किया। कोच्चि तटरक्षक वायु प्रतिष्ठान ने डोर्नियर विमान उपलब्ध कराया।
खराब मौसम में तटरक्षक बल ने अभियान कैसे पूरा किया?
प्रतिकूल मौसम और समुद्री चुनौतियों के बावजूद तटरक्षक दल ने पूरी तत्परता के साथ दोनों अभियानों को अंजाम दिया। हवाई निकासी में डोर्नियर विमान के जरिये मरीज को ऑक्सीजन सहायता देते हुए ले जाया गया, जबकि समुद्री बचाव में पोत राजदूत के कर्मियों ने उफनती लहरों में घायल नाविक को सुरक्षित निकाला।
भारतीय तटरक्षक बल की चिकित्सा निकासी क्षमता क्यों महत्वपूर्ण है?
लक्षद्वीप और अंडमान जैसे दूरस्थ द्वीपीय क्षेत्रों में उन्नत चिकित्सा सुविधाएँ सीमित हैं, इसलिए तटरक्षक बल की हवाई और समुद्री निकासी क्षमता अक्सर एकमात्र जीवनरक्षक विकल्प होती है। यह बल नागरिकों के साथ-साथ विदेशी नागरिकों को भी बिना भेदभाव के आपात सहायता प्रदान करता है।
राष्ट्र प्रेस
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