वैश्विक व्यापार कानून में भारत की भूमिका बड़ी हो: वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल
सारांश
मुख्य बातें
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने 9 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में स्पष्ट कहा कि वैश्विक व्यापार व्यवस्था तेज़ी से बदल रही है और भारत को न केवल इन बदलावों को समझना होगा, बल्कि उन्हें आकार देने में भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। सस्टेनेबिलिटी आधारित व्यापार उपायों और डिजिटल व्यापार के बढ़ते प्रभाव के कारण स्थापित अंतरराष्ट्रीय नियमों के सामने नई चुनौतियाँ खड़ी हो गई हैं।
कार्यक्रम और अवसर
यह कार्यक्रम सेंटर फॉर ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट लॉ (CTIL) की 9वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के एक आधिकारिक बयान के अनुसार, अग्रवाल ने इस अवसर पर CTIL की सरकार, उद्योग जगत और व्यापार कानून समुदाय के बीच विश्वास स्थापित करने में निभाई गई भूमिका की सराहना की।
उन्होंने रेखांकित किया कि CTIL ने वाणिज्य विभाग को कानूनी विश्लेषण, मुक्त व्यापार समझौता (FTA) वार्ताओं, विवाद निपटान प्रक्रियाओं और संस्थागत ज्ञान निर्माण में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया है।
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश का संबोधन
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसे संस्थानों की आवश्यकता है जो अंतरराष्ट्रीय आर्थिक कानून में हो रहे बदलावों का अनुसरण करने के साथ-साथ उन्हें प्रभावित और आकार देने की क्षमता भी रखते हों।
न्यायमूर्ति नरसिम्हा ने अंतरराष्ट्रीय निवेश कानून के विकास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका प्रारंभिक उद्देश्य विदेशी निवेश की सुरक्षा था, परंतु अब इसमें देशों की नियामकीय स्वतंत्रता को भी अधिक महत्व दिया जाने लगा है। उन्होंने जोर दिया कि निवेश संरक्षण और सरकारों के नियामकीय अधिकारों के बीच टिकाऊ संतुलन कायम रखने वाला अंतरराष्ट्रीय निवेश कानून ढाँचा अत्यंत आवश्यक है।
CTIL की उपलब्धियाँ
मंत्रालय के अनुसार, CTIL ने अब तक 4,000 से अधिक कानूनी राय प्रदान की हैं। संस्थान ने लगभग 10 मुक्त व्यापार समझौतों की वार्ताओं में भाग लिया है और विश्व व्यापार संगठन (WTO) से जुड़े कई मुद्दों, अधिसूचनाओं, प्रस्तुतियों व विवाद निपटान प्रक्रियाओं में योगदान दिया है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में है जब भारत एक के बाद एक FTA वार्ताओं में तेज़ी ला रहा है — यूरोपीय संघ, यूके, और खाड़ी सहयोग परिषद के साथ बातचीत विभिन्न चरणों में जारी है।
मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव की टिप्पणी
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव यशवीर सिंह ने कहा कि CTIL ने भारत के प्रमुख व्यापारिक समझौतों, WTO चर्चाओं और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक कूटनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में संगठन ने G20, BRICS, FTA और WTO वार्ताओं सहित कई बहुपक्षीय एवं द्विपक्षीय मंचों पर भारत की भागीदारी को कानूनी और रणनीतिक समर्थन प्रदान किया है।
यशवीर सिंह ने यह भी रेखांकित किया कि CTIL ने अंतरराष्ट्रीय आर्थिक कानून के क्षेत्र में मानव संसाधन विकास और क्षमता निर्माण में भी योगदान दिया है, जिससे भारत की व्यापार वार्ता क्षमता और नीति निर्माण को मज़बूती मिली है।
आगे क्या होगा
CTIL की 9वीं वर्षगाँठ के इस आयोजन ने संस्थान के भविष्य के विस्तार पर चर्चा को भी प्रोत्साहित किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, जैसे-जैसे भारत वैश्विक व्यापार वार्ताओं में अधिक सक्रिय होता जाएगा, CTIL जैसे संस्थानों की भूमिका और अधिक रणनीतिक होती जाएगी — विशेष रूप से डिजिटल व्यापार और हरित व्यापार नीतियों के उभरते मोर्चे पर।