कॉमनवेल्थ गेम्स में शूटिंग जैसे खेलों की वापसी हो: बिहार खेल मंत्री श्रेयसी सिंह
सारांश
मुख्य बातें
बिहार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने 2 अगस्त 2026 को पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों के बेहतर होते प्रदर्शन पर संतोष जताया, लेकिन साथ ही शूटिंग सहित उन खेलों को प्रतियोगिता से बाहर किए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की, जिनमें भारत ने ऐतिहासिक रूप से उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। उन्होंने भारत सरकार से अपील की कि इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर दृढ़ता से उठाया जाए।
भारत की पदक तालिका और बढ़ती चिंता
श्रेयसी सिंह ने कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत की पदक तालिका लगातार मजबूत हो रही है और यह समूचे देश के लिए गर्व का विषय है। हालाँकि, उन्होंने रेखांकित किया कि शूटिंग जैसे खेल — जिनमें भारत ने दशकों तक पदक जीते — अब इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं हैं। उनके अनुसार इसी तरह कई अन्य खेल भी धीरे-धीरे कार्यक्रम से हटाए जा रहे हैं, जिससे भारत जैसे देशों के खिलाड़ियों के अंतरराष्ट्रीय अवसर सीमित हो रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की पहल ज़रूरी
खेल मंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय खेल संस्थाओं के समक्ष भारत को इस विषय को प्रभावी ढंग से उठाना चाहिए, ताकि जिन खेलों में कई देशों के खिलाड़ी उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं, उन्हें पुनः प्रतियोगिता में शामिल कराया जा सके। उन्होंने कहा कि खेलों के चयन में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है और सभी खिलाड़ियों को समान अवसर मिलना चाहिए।
स्पोर्ट्स कॉन्क्लेव में बिहार की भागीदारी
श्रेयसी सिंह ने बताया कि हाल ही में भारत मंडपम में आयोजित स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर एंड फिटनेस कॉन्क्लेव में बिहार का पवेलियन लगाया गया, जिसका उद्घाटन केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने किया। इस अवसर पर बिहार में खेल अवसंरचना को सुदृढ़ करने और खेल उपकरण निर्माण उद्योग की स्थापना की संभावनाओं पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ।
उन्होंने बताया कि कई निवेशकों और उद्योग समूहों ने बिहार में खेल उपकरण निर्माण इकाइयाँ स्थापित करने में रुचि जताई है। राज्य सरकार उन्हें सुरक्षित, पारदर्शी और उद्योग-अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराएगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोज़गार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
ओडिशा मॉडल से प्रेरणा, नई खेल नीति की तैयारी
खेल मंत्री ने जानकारी दी कि खेल विभाग की टीम ने हाल ही में ओडिशा का अध्ययन दौरा किया, जहाँ वहाँ की खेल नीति, प्रशिक्षण व्यवस्था और आधुनिक खेल परिसरों का गहन अवलोकन किया गया। इसी अनुभव के आधार पर बिहार की नई खेल नीति तैयार की जा रही है।
इस नीति के तहत पंचायत स्तर से लेकर जिला, राज्य और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक स्टेडियम, कोचिंग, खेल विज्ञान और आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराने की योजना है। नई नीति में प्रतिभाओं की पहचान, ग्रामीण क्षेत्रों में खेल संस्कृति को बढ़ावा, महिला खिलाड़ियों को प्रोत्साहन और खेल अवसंरचना के विस्तार पर विशेष बल दिया जाएगा।
आगे क्या
श्रेयसी सिंह के अनुसार राज्य सरकार का लक्ष्य केवल खिलाड़ी तैयार करना नहीं, बल्कि एक ऐसा सुदृढ़ खेल तंत्र विकसित करना है जिससे बिहार के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में निरंतर श्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें। यदि खेल उपकरण निर्माण में निवेश और नई खेल नीति का क्रियान्वयन सफल रहा, तो बिहार आने वाले वर्षों में देश के अग्रणी खेल राज्यों में अपनी पहचान बना सकता है।