BJP मध्य प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल बोले: कांग्रेस को SIR पर सवाल उठाने का हक नहीं, 10 बार उन्हीं के शासन में हुई प्रक्रिया
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मध्य प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने गुरुवार, 5 नवंबर 2026 को भोपाल में पार्टी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि चुनाव आयोग (ECI) द्वारा कराए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर कांग्रेस को सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि आज़ादी के बाद से अब तक SIR की प्रक्रिया 12 बार हो चुकी है, जिनमें से 10 बार यह कांग्रेस के शासनकाल में ही संपन्न हुई।
खंडेलवाल के मुख्य आरोप
खंडेलवाल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे मतदाता सूची से 13 करोड़ नाम काटे जाने का 'झूठा और गलत आँकड़ा' देकर जनता को भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी विदेशी नागरिकों और घुसपैठियों को मतदाता बनाए रखने के लिए अराजकता फैला रहे हैं।
खंडेलवाल ने चुनौती दी कि यदि वास्तव में किसी वैध मतदाता का नाम गलत तरीके से सूची से हटाया गया है, तो राहुल गांधी उसका प्रमाण सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत करें। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि बिहार में SIR को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में 18 याचिकाएँ दायर की गईं, परंतु विपक्ष अपने आरोप सिद्ध करने में सफल नहीं हो सका।
BJP प्रवक्ता शुक्ला की प्रतिक्रिया
इस अवसर पर BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला ने कहा कि हमारे संविधान में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विमर्श के लिए संसद का सदन निर्धारित है। उनके अनुसार, राहुल गांधी सदन में बहस करने की बजाय हंगामा करते हैं और सदन छोड़कर सड़क पर बहस की चुनौती देते हैं।
शुक्ला ने दावा किया कि चार अवसरों पर जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार सदन में अपना पक्ष रखने लगी, तब राहुल गांधी और कांग्रेस के सदस्य सदन से बाहर चले गए। उन्होंने कांग्रेस की राजनीति को 'झूठ, भ्रम और निराशा तक सीमित' बताया।
चुनावी हार और संस्थाओं पर आरोप
शुक्ला ने चुनावी आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2014, 2019 और 2024 के तीन लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की कुल सीटें मिलाकर भी 200 के आँकड़े तक नहीं पहुँच सकीं, जबकि BJP ने इन तीनों चुनावों में प्रत्येक बार कम से कम 240 सीटें हासिल कीं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस को लगातार चुनावी पराजय का कारण अपनी नीतियों, नेतृत्व और जनाधार में तलाशना चाहिए, न कि चुनाव आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाकर जनता को गुमराह करना चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष SIR की प्रक्रिया को लेकर पूरे देश में सक्रिय अभियान चला रहा है।
आगे क्या
गौरतलब है कि SIR को लेकर राजनीतिक विवाद अभी थमता नहीं दिख रहा। सर्वोच्च न्यायालय में बिहार SIR पर दायर याचिकाओं का निपटारा अभी भी प्रक्रियाधीन बताया जा रहा है। BJP और कांग्रेस के बीच यह वाकयुद्ध आने वाले राज्य चुनावों से पहले और तीखा होने की संभावना है।