MP हाई कोर्ट का कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह को नोटिस, हलफनामे में आपराधिक मामले छिपाने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच ने कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह को 16 अक्टूबर 2026 को उनके निर्वाचन को रद्द करने की माँग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सिंह ने अपने चुनावी शपथ पत्र में वर्ष 1991 के एक आपराधिक मामले सहित कई लंबित मामलों की जानकारी जानबूझकर छिपाई। अदालत ने अब संबंधित पक्षों से जवाब माँगा है और आगे की सुनवाई निर्धारित की है।
मामले का पूरा घटनाक्रम
याचिकाकर्ता के वकील मनोज उपाध्याय के अनुसार, घनश्याम सिंह ने वर्ष 2023 में सेवढ़ा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था। इसके बाद वर्ष 2026 में उन्होंने दतिया से उपचुनाव में भाग लिया। चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार प्रत्येक उम्मीदवार को अपने शपथ पत्र में आपराधिक पृष्ठभूमि और सभी लंबित मामलों की जानकारी देना अनिवार्य है।
वकील उपाध्याय ने आरोप लगाया कि सिंह के खिलाफ चार मामले लंबित थे, लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान दाखिल हलफनामे में उन्होंने इनमें से किसी भी मामले का उल्लेख नहीं किया। इससे भी आगे, 2026 के उपचुनाव के हलफनामे में केवल दो मामलों का जिक्र किया गया, जबकि शेष दो मामलों की जानकारी फिर से छिपा ली गई।
सह-आरोपी पूर्व विधायक का संदर्भ
वकील उपाध्याय ने यह भी उल्लेख किया कि कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती भी उसी आपराधिक मामले में आरोपी हैं। वर्ष 2023 में जब भारती चुनाव मैदान में थे, तब उन्होंने अपने हलफनामे में संबंधित मामलों की जानकारी दी थी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि घनश्याम सिंह भी उसी मामले में सह-आरोपी हैं, बावजूद इसके उन्होंने यह तथ्य अपने शपथ पत्र में नहीं बताया।
याचिका का सफर — जबलपुर से ग्वालियर
दतिया निवासी दीपक बेलपत्री और विनोद शर्मा ने कथित तौर पर इन आपराधिक मामलों की जानकारी मिलने के बाद मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका पहले जबलपुर स्थित हाई कोर्ट की मुख्य पीठ में प्रस्तुत की गई, जहाँ से इसे सुनवाई के लिए ग्वालियर बेंच में स्थानांतरित कर दिया गया। गौरतलब है कि यह मामला सीधे निर्वाचन की वैधता से जुड़ा है, जिससे इसका कानूनी महत्व बढ़ जाता है।
आगे क्या हो सकता है
याचिकाकर्ताओं ने माँग की है कि यदि हलफनामे में जानकारी छिपाने का आरोप सही पाया जाता है, तो घनश्याम सिंह का निर्वाचन रद्द किया जाए। वकील उपाध्याय के अनुसार, यदि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट साक्ष्यों के आधार पर यह निष्कर्ष निकालता है कि जानकारी जानबूझकर छिपाई गई, तो अदालत सख्त कार्रवाई कर सकती है और विधायकी रद्द होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। अब सभी संबंधित पक्षों से जवाब लिया जाएगा और मामले की अगली सुनवाई तय की जाएगी।